लोकसभा चुनाव 2019: राहुल गांधी के वायनाड से चुनाव लड़ने से क्या कांग्रेस को फ़ायदा होगा?

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- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बेंगलुरू से, बीबीसी हिंदी के लिए
स्वागतम स्वागतम राहुल गांधी...
वायनाड अपने सितारे का स्वागत करता है...
एआईसीसी को बधाई... एआईसीसी की जय...
स्वागतम, स्वागतम राहुल गांधी...
कांग्रेस के कार्यकर्ता केरल में जगह-जगह इस तरह के नारे लगा रहे हैं.
कई दिनों से इस बात की चर्चा थी कि राहुल गांधी केरल के वायनाड सीट से चुनाव लड़ सकते हैं लेकिन उनके नाम की घोषणा को लेकर देरी हो रही थी.
इस देरी की वजह से कार्यकर्ताओं में निराशा छाने लगी थी लेकिन अब जब उनके नाम की घोषणा हो गई है तो कहा जा रहा है कि कार्यकर्ताओं का मूड ही बदल गया है.
अभी तक कांग्रेस और उनके यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ़्रंट (यूडीएफ़) के कार्यकर्ताओं के बीच एक तरह की निराशा का भाव था. दक्षिण भारत के अपने मुख्य विपक्षी मार्क्सवदी कम्युनिस्ट पार्टी और लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ़्रंट के सामने कांग्रेसी कार्यकर्ता मायूस नज़र आ रहे थे.
कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को एक तरह के जोश की ज़रूरत थी जिससे वे अपने विपक्षियों का सामना कर सकें. ख़ासतौर पर सबरीमला मंदिर पर हुए विवाद के बाद यह राज्य ख़ासा सुर्खियों में रहा.

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राहुल के आने से कार्यकर्ताओं में जोश
केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता रमेश चेन्नीताला ने बीबीसी को बताया कि इस फ़ैसले ने राज्य में पार्टी कार्यकर्ताओं में एक नया जोश फूंकने का काम किया है. पूरे राज्य में ख़ुशी की लहर है. यह पहला मौक़ा है जब एक प्रधानमंत्री पद का दावेदार केरल से चुनाव लड़ रहा है.
"मैं आपको एक बात बताता हूं कि इस बात का असर न सिर्फ़ केरल की राजनीति पर पड़ेगा बल्कि इसका असर पड़ोसी राज्यों यानी कर्नाटक और तमिलनाडु में भी दिखाई पड़ेगा."
वायनाड लोकसभा क्षेत्र में सात विधानसभा सीटें हैं. इसे साल 2009 में लोकसभा सीट बनाया गया था. यह लोकसभा क्षेत्र तीन ज़िलों वायनाड, कोझिकोड और मल्लपुरम में फैला हुआ है. विधानसभा क्षेत्रों में से दो अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं. वायनाड में केरल की सबसे अधिक जनजातीय आबादी रहती है.
साल 2009 में कांग्रेस के उम्मीदवार एम आई शनवास ने 1.53 लाख के अंतर से सीपीआई के उम्मीदवार राहतुल्लाब पर जीत दर्ज की थी. लेकिन साल 2014 के चुनाव में जीत का अंतर गिरकर महज़ 20, 870 वोटों पर सिमट गया.
वायनाड की सीमाएं तमिलनाडु में नीलगिरि और थेनी निर्वाचन क्षेत्र से मिलती हैं और कर्नाटक में मैसूर और चामराजनगर निर्वाचन क्षेत्र से.
सीपीएम के एक नेता ने नाम ज़ाहिर न किए जाने की शर्त पर कहा, "इसमें कोई शक नहीं है कि यह फ़ैसला कांग्रेस पार्टी की पकड़ और मज़बूत करेगा. इससे पार्टी की मशीनरी को बेहतर ढंग से काम करने में मदद मिलेगी. इसी तरह पार्टी राज्य के दूसरे हिस्सों में भी सीपीएम को चुनौती देगी."

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हम राहुल गांधी का सामना करेंगे: पिनारई विजयन
वहीं, केरल के मुख्यमंत्री और सीपीएम नेता पिनारई विजयन का सवाल है कि क्या कांग्रेस वाम मोर्चे जैसे लोकतांत्रिक और पंथनिरपेक्ष दलों के ख़िलाफ़ जाकर वाक़ई बीजेपी को चुनौती देने की कोशिश कर रही है?
विजयन ने कहा, "कांग्रेस के इस क़दम को लेफ़्ट को चुनौती देने के तौर पर देखा जा रहा है. राहुल गांधी ने पहले कहा था कि वो सिर्फ़ अमेठी से चुनाव लड़ेंगे. वैसे हम चिंतित या घबराए हुए नहीं हैं. हम उनका सामना करेंगे लेकिन राहुल को ऐसी जगह चुननी चाहिए थी जहां बीजेपी मैदान में हो."
वहीं, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि वायनाड कांग्रेस के लिए सबसे सुरक्षित सीट है. राजनीतिक विश्लेषक जी. प्रमोद कुमार कहते हैं, "कांग्रेस के लिए ये पूरे देश में सबसे सुरक्षित सीट है और ऐसा इसलिए नहीं है क्योंकि यहां 'सिर्फ़ 49% हिंदू हैं जैसा कि केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रेस वार्ता में कहा."
राजनीतिक विश्लेषक जॉर्ज पोडीपरा के मुताबिक़, "वायनाड यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ़्रट (यूडीएफ़) का गढ़ है. केरल में कांग्रेस (जिसका ईसाई धर्म के लोगों में गहरा असर है) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग मज़बूत राजनीतिक पार्टियां हैं और ये दोनों ही यूडीएफ़ की सदस्य हैं."

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चुनाव आयोग के मुताबिक़, केरल में वायनाड ही ऐसा निर्वाचन क्षेत्र है जहां 49% आबादी मुसलमानों और ईसाइयों की है.
प्रमोद कुमार कहते हैं, "सीपीएम को एक ऐसी पार्टी के तौर पर देखा जाता है जिसका असर हिंदू समुदाय में ज़्यादा है. वहीं यूडीएफ़ का हिंदू और अल्पसंख्यक, दोनों समुदायों में प्रभाव है."
प्रमोद कुमार कहते हैं कि केरल में सबरीमला के मुद्दे पर भी नज़र है लेकिन कोई नहीं जानता कि इसका राज्य के चुनावों में क्या असर होगा. उनका मानना है कि तिरुवनंतपुरम और पत्तनमत्तिटा जैसे निर्वाचन क्षेत्रों में सबरीमला मुद्दे का ज़्यादा असर दिखाई देगा.
आख़िर में जॉर्ज पोडीपोरा कहते हैं, "कुल मिलाकर देखें तो राहुल गांधी का वायनाड से चुनाव लड़ना कांग्रेस के लिए मददगार साबित ज़रूर होगा."
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