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नीरव मोदी की ज़मानत याचिका ख़ारिज होने का मतलब क्या है
48 वर्षीय भारत के हीरा कारोबारी नीरव मोदी की लंदन की वेस्टमिंस्टर कोर्ट ने ज़मानत याचिका ख़ारिज कर दी है.
नीरव मोदी को लंदन के होल्बोर्न इलाक़े से मंगलवार को गिरफ़्तार किया गया था जिसके बाद उन्हें बुधवार को लंदन के वेस्टमिंस्टर कोर्ट में पेश किया गया.
कोर्ट ने नीरव मोदी की ज़मानत याचिका ख़ारिज करते हुए उन्हें 29 मार्च तक के लिए हिरासत में भेज दिया है.
लंदन की लीगल फ़र्म ज़ईवाला एंड कंपनी से जुड़े वरिष्ठ वकील सरोश ज़ईवाला से बीबीसी संवाददाता किंजल पंड्या ने बातचीत की और उन्हें बताया कि आख़िर नीरव मोदी की ज़मानत याचिका ख़ारिज होने का मतलब क्या है.
ज़ईवाला बताते हैं कि भारत के लिए इसका बहुत ही सीधा अर्थ है. ज़मानत याचिका ख़ारिज होने का मतलब है कि भारत सरकार ने क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस को अच्छे सबूत दिए हैं, जिसने कोर्ट में यह पेश किया होगा कि नीरव मोदी क्रिमिनल फ्रॉड में शामिल हैं.
नीरव मोदी को 29 मार्च तक कस्टडी में रखा गया है. लेकिन इसके बाद उन्हें ज़मानत भी मिल सकती है.
लेकिन साथ ही ज़ईवाला यह भी बताते हैं कि 29 मार्च के बाद नीरव मोदी कस्टडी से छूट सकते हैं. लेकिन अगर भारत सरकार क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस के पास आवेदन कर दे कि वो उसकी आगे की ज़मानत को ख़ारिज कर दें तो उनकी ज़मानत वहीं रोक दी जायेगी. क्योंकि अगर उन्हें छोड़ दिया गया तो वो यूके से भाग सकते हैं. और अगर वो भाग कर किसी ऐसे देश में पहुंच गए जहां भारत से अच्छे संबंध ही नहीं है तो उसे वापस लाने में बहुत ही परेशानी होगी.
ज़ईवाला कहते हैं, ''अगर भारत सरकार और क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) ने उनकी जमानत को रोकने के लिए आवेदन दिया तो वो 29 मार्च के बाद विरोध कर सकते हैं और मजिस्ट्रेट को बोल सकते हैं कि ये सही नहीं हो रहा है ये सब ग़लत हो रहा है और उसने सबूत दे दिए तो हो सकता है कि मजिस्ट्रेट उसे जमानत भी दे दें. ये पूरा फ़ैसला जज के हाथ में हैं.''
नीरव मोदी को पहले लंदन की गलियों में देखा गया और इस केस को थोड़ा हल्के में लिया गया. जिसके बाद विपक्षी दल ने इस केस की शिकायत कि की इस केस को हल्के में लिया जा रहा है. फिर अचानक कुछ इतनी जल्दी नीरव मोदी को हिरासत में ले लिया गया. क्या ये सारी जल्दबाजी वर्तमान सरकार आने वाले चुनाव के कारण कर रही है और इससे उन्हें कोई फ़ायदा भी हो सकता है?
इस सवाल पर ज़ईवाला बताते हैं, ''मुझे ऐसा नहीं लगता. हो सकता है कि वो एक्शन जल्दी लेना चाहते हो. लेकिन सरकार का बहुत ही दबाव होता है. जब विपक्षी दल ने शिकायत की और अधिकारियों ने इसे हल्के में लिया तो सरकार ने एक्शन लिया, जो सही है. अंत में अगर नीरव मोदी भारत आया और पैसा वापस लाया तो वो पैसा भारत में ही इस्तेमाल होगा. जिसे भारत में नौकरी और यहां की अर्थव्यवस्था में इस्तेमाल किया जायेगा. अभी वो पश्चिमी देशों में इस्तेमाल हो रहा है जहां पहले से ही बहुत पैसा है.''
इसके साथ ही ज़ईवाला ने बताया कि नीरव मोदी के ख़िलाफ़ भारत सरकार का केस काफ़ी मजबूत है.
वे कहते हैं, ''नीरव मोदी की जमानत याचिका ख़ारिज होना ही बताता है कि भारत का केस कितना मजबूत है. लेकिन पहले क्या होता था भारतीय सरकार क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस से आवेदन करवाता था लेकिन सीपीएस भारत सरकार का इतना साथ नहीं देता था. लेकिन मोदी सरकार ने पूरा साथ दिया है इसलिए जमानत याचिका ख़ारिज हुई.''
''और अब जब नीरव मोदी अरेस्ट हुए तो उसने जमानत याचिका डाली लेकिन इस बार सीपीएस पहले से ही तैयार थी कि उसे जमानत न मिले अगर जमानत मिली तो वो भाग जायेंगे. और इससे बहुत नुकसान होगा.''
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