समझौता ब्लास्ट केस: असीमानंद समेत चारों अभियुक्त बरी, पाकिस्तान ने की निंदा

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समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट मामले में पंचकुला की स्पेशल एनआईए कोर्ट ने असीमानंद समेत चारों अभियुक्तों को बरी कर दिया है.

असीमानंद के अलावा इस मामले में लोकेश शर्मा, कमल चौहान और राजिंदर चौधरी अभियुक्त थे.

पाकिस्तान ने समझौता ब्लास्ट के अभियुक्तों की रिहाई पर सख़्त विरोध जताया है. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करके कहा है कि धमाके के 11 साल बाद भी सभी अभियुक्तों का बरी हो जाना इस बात को साबित करता है कि भारतीय अदालतों की विश्वसनीयता कितनी कम है.

इस मामले में कुल 8 अभियुक्त थे, जिनमें से एक की मौत हो चुकी है, जबकि तीन को भगोड़ा घोषित किया जा चुका है.

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लेकिन अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष अपने लगाए आरोप को साबित नहीं कर सका और इस कारण सभी अभियुक्तों को बरी किया जा रहा है.

एनआईए के वकीलों का कहना है कि उन्हें अभी तक अदालती फ़ैसले की कॉपी नहीं मिली है और कॉपी देखने के बाद ही वो फ़ैसला करेंगे कि अदालत के इस फ़ैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे या नहीं.

इससे पहले, समझौता ब्लास्ट में अपने पिता को खोने वाली पाकिस्तानी महिला राहिला वकील की याचिका को खारिज कर दिया. राहिला वकील ने इस केस में गवाही देने की अनुमति मांगी थी.

पाकिस्तान की कड़ी प्रतिक्रिया

इस बीच,पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की तरफ़ से जारी बयान में कहा गया है कि इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायुक्त को पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के दफ़्तर बुलाकर पाकिस्तान ने अपनी नाराज़गी का इज़हार किया.

पाकिस्तान के कार्यवाहक विदेश सचिव ने सभी अभियुक्तों के बरी किए जाने की कड़ी निंदा की.

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने हमेशा ही इस केस के बारे में भारत को अपनी चिंताओं से अवगत कराया है कि इस केस में कोई ख़ास प्रगति नहीं हो रही है और भारत जानबूझकर इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों की मदद कर रहा है जिसमें 44 बेगुनाह पाकिस्तानी नागरिक मारे गए थे.

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने बार-बार इस मुद्दे को भारत के सामने उठाया है. 2016 में हार्ट ऑफ़ एशिया सम्मेलन में भी पाकिस्तान ने ये मुद्दा उठाया था.

उनका कहना था, ''ये भारत के दोहरे चरित्र को भी दर्शाता है जो पाकिस्तान पर तो आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाता है लेकिन भारत अपने आतंकवादियों की मदद करता है जिन्होंने सार्वजनिक रूप से अपने गुनाह क़ुबूल किए थे.''

उन्होंने भारत से अपील की है कि वो सभी न्यायिक विकल्प को तलाशें ताकि इस धमाके के गुनहगार लोगों को क़ानून के कठघरे में लाया जा सके.

धमाके का दिन

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18 फ़रवरी 2007 को भारत-पाकिस्तान के बीच हफ़्ते में दो दिन चलने वाली ट्रेन संख्या 4001 अप अटारी (समझौता) एक्सप्रेस में दो आईईडी धमाके हुए थे जिसमें 68 लोगों की मौत हो गई थी.

यह हादसा रात 11.53 बजे दिल्ली से क़रीब 80 किलोमीटर दूर पानीपत के दिवाना रेलवे स्टेशन के पास हुआ. ट्रेन अटारी जा रही थी जो कि भारतीय हिस्से का आख़िरी रेलवे स्टेशन है.

धमाकों की वजह से ट्रेन में आग लग गई और इसमें महिलाओं और बच्चों समेत कुल 68 लोगों की मौत हो गई जबकि 12 लोग घायल हुए.

19 फ़रवरी को जीआरपी/एसआईटी हरियाणा पुलिस ने मामले को दर्ज किया और क़रीब ढाई साल के बाद इस घटना की जांच का ज़िम्मा 29 जुलाई 2010 को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी यानी एनआईए को सौंपा गया था.

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