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#Christchurch: 'एक रात पहले ही बेटे से मैंने कहा था भारत आने को'
- Author, संगीतम प्रभाकर
- पदनाम, बीबीसी तेलुगू संवाददाता
"एक रात पहले ही मेरी बेटे से बात हुई थी. मैंने कहा था कि तुम्हें देखे बड़े दिन हो गए, भारत का चक्कर लगाओ एक. हमें नहीं पता था कि अगले ही दिन गोलीबारी की ख़बर आएगी और मेरा बेटा भी उसकी चपेट में आ जाएगा."
न्यूज़ीलैंड के क्राइस्टचर्च में हुए हमले में घायल होने वाले फ़राज़ अहसान के पिता सैयदुद्दीन यह कहते हुए भावुक हो जाते हैं. वह बताते हैं कि उनका बेटा हर दो साल में एक बार भारत आया करता था.
सैयदुद्दीन की तरह तेलंगाना के और भी परिवार हैं जिनके लिए न्यूज़ीलैंड की घटना की ख़बर दुखों का पहाड़ बनकर टूटी है.
न्यूज़ीलैंड में भारतीय उच्चायुक्त संजीव शर्मा ने ट्वीट किया, "यह इंसानियत पर सबसे बड़ा हमला है." उन्होंने ट्वीट में यह भी लिखा कि 'हमें पता चला है कि कुल नौ भारतीय इन हमलों में ज़ख़्मी हुई हैं हालांकि इस बारे में आधिकारिक रूप से हमें कोई जानकारी नहीं मिली है.'
बीबीसी ने इस हमले के हताहतों के परिजनों से बात की जो हैदराबाद में रहते हैं.
'उम्मीद है मेरा बेटा वापस आएगा'
फ़राज़ अहसान का घर हैदराबाद के टोली चौकी में है. घर पर रिश्तेदारों और दोस्तों का जमावड़ा लगा हुआ है. ये सब अहसान के ज़ख़्मी होने की सूचना मिलने पर यहां आए थे.
पूरे घर में सन्नाटा छाया हुआ था. सिर्फ़ छत पर लगे पंखे की आवाज़ सुनाई दे ही थी. कभी-कभार बच्चों की आवाज़ें घर में गूंज जा रही थीं.
सैयदुद्दीन कहते हैं, "मेरे चार बच्चे हैं जिनमें फ़राज़ सबसे छोटा है. वो 10 साल पहले न्यूज़ीलैंड गया था और अब उसने वहां की नागरिकता भी ले ली है. वो वहां सॉफ़्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम कर रहा है. वह पहले ऑकलैंड में रहता था मगर छह साल पहले क्राइस्ट चर्च शिफ़्ट हो गया था. वो वहां अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रहता है."
"चार साल पहले उसकी शादी हुई थी. उसकी एक बेटी 3 साल की है और बेटा छह महीने का. शुक्रवार को वह नमाज़ पढ़ने के लिए अन्नूर मस्जिद गया हुआ था. जैसे ही मुझे पता चला कि फ़ायरिंग की घटना हुई है, मैंने उसे उसके मोबाइल पर फ़ोन करने की कोशिश की. हालांकि, उस तरफ़ से किसी ने फ़ोन नहीं उठाया. हम परेशान हो गए. मेरी पत्नी तो बिस्तर पर पड़ी हुई है."
"मेरी बहू ने न्यूज़ीलैंड में अधिकारियों से संपर्क करके उसके बारे में जानना चाहा है मगर उसे कहा गया है कि थोड़ा इंतज़ार करें."
"हम अपने स्तर पर भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि वह कहां है. हमने क्राइस्ट चर्च में भारतीय अधिकारियों से ईमेल के माध्यम से संपर्क किया है. असदुद्दीन ओवैसी ने भी हमें मदद का भरोसा दिया है. अगर ज़रूरी हुआ तो हम न्यूज़ीलैंड जाएंगे. हमें उम्मीद है कि फ़राज़ वापस आएगा."
'ज़ख़्मों से जूझ रहा है मेरा भाई'
ख़ुर्शीद जहांगीर हैदराबाद के एंबरपेट में रहते हैं. वह न्यूज़ीलैंड हमले में ज़ख़्मी हुए अहमद इक़बाल के भाई हैं.
जहांगीर ने बीबीसी को बताया, "हम कुल नौ भाई-बहन हैं. इक़बाल सबसे छोटा है. वह न्यूज़ीलैंड में बस गया है और पिछले 15 सालों से अपने परिवार के साथ वहां रह रहा है."
"कई नौकरियों में क़िस्मत आज़माने के बाद उसने नौकरी छोड़ छह महीने पहले ही अपना रेस्तरां शुरू किया था. हमें जानकारी मिली है क वह शूटिंग में बुरी तरह घायल हुआ है. हालांकि ऑपरेशन के बाद उसे लगी गोली निकाल दी गई है. धीरे-धीरे उसकी हालत में सुधार हो रहा है."
जहांगीर बताते हैं कि इस ख़बर को सुनकर उनकी मां को सदमा लगा है. उन्होंने कहा, "शुक्रवार सुबह उसने मां से बात की थी. मेरी मां 80 साल की हैं. हमने उन्हें गोलीबारी की घटना की जानकारी नहीं दी क्योंकि हमें लगा कि इस उम्र में वह ऐसी ख़बर को सह नहीं पाएंगी. हालांकि बाद में उन्हें कहीं से पता चला और वह सदमे में चली गईं."
"मेरी भाभी विदेश में अकेले ही इस सबसे से जूझ रही हैं और वो भी दो बच्चों के साथ. हम न्यूज़ीलैंड जाने की तैयारी कर रहे हैं. ज़रूरी मंज़ूरी आदि का इंतज़ार है."
अस्पताल में गुजरात के मूसा वली की मौत
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़ गुजरात के मूसा वली पटेल की अस्पताल में मौत हो गई है. उन्हें घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
मूसा वली सुलेमान पटेल के भाई हाजी अली पटेल ने बताया कि इलाज के दौरान मूसा वली की मौत हो गई है.
गुजरात के भरूच इलाके के हाजी अली पटेल ने एएनआई को बताया कि उनके भाई शुक्रवार को अपने परिवार के साथ मस्जिद में प्रार्थना के लिए गए थे जहां उन्हें गोलियां लगी थीं.
"ऑकलैंड से अधिक शांतिपूर्ण है क्राइस्टचर्च"
श्रीलता न्यूज़ीलैंड मे रहती हैं और इन दिनों छुट्टियों पर भारत आई हैं. उन्होंने बीबीसी से बात करते हुए न्यूज़ीलैंड के माहौल के बारे में बताया.
श्रीलता ने कहा, "हम 16 साल पहले न्यूज़ीलैंड जाकर बस गए थे. हम ऑकलैंड में रहते हैं. तेलुगू राज्यों के बहुत से लोग वहां बसे हुए हैं. न्यूज़ीलैंड शांतिपूर्ण देश है. न्यूज़ीलैंड में छोटे से एक्सिडेंट को भी बड़ा मामला माना जाता है और लोग ऐसे इस पर चर्चा करते हैं जैसे बड़ी बात हो गई हो. हम शुक्रवार को हुई फ़ायरिंग की घटना के बारे में सुनकर हैरान हैं."
श्रीलता बताती हैं कि 2011 में आए भीषण भूकंप के बाद हुए पुनर्निर्माण के कारण क्राइस्ट चर्च में नौकरियों के अवसर बढ़ गए है. इस कारण बहुत सारे तेलुगू भाषी लोग कारोबार या नौकरी करने के इरादे से वहां बसे है. उनकी नज़र में अगर ऑकलैंड से तुलना की जाए तो क्राइस्ट चर्च ज़्यादा शांतिपूर्ण जगह है.
वह कहती हैं, "मैंने शहर में रहने वाले अपने कुछ दोस्तों से बात की है. उन्होंने मुझे बताया है कि पूरे इलाक़े में पुलिस तैनात है और चीज़ें धीरे-धीरे सामान्य हो रही हैं."
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन पार्टी के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने ट्वीट करके न्यूज़ीलैंड में मौजूद अधिकारियों से हताहतों की मदद करने के लिए कहा है.
हैदराबाद के मेयर बोंथू राममोहन और एमआईएम पार्टी के नेताओं ने प्रभावितों के परिजनों से मुलाक़ात की और उनके साथ हमदर्दी जताई.
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