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#Christchurch: न्यूज़ीलैंड की मस्जिद पर हमला करने वाला शख़्स कौन है?
न्यूज़ीलैंड के क्राइस्टचर्च की दो मस्जिदों पर शुक्रवार को हुए हमलों में 49 लोगों की मौत हो गई है. लेकिन यह सवाल अभी तक बरक़रार है कि इस हमले को किन लोगों अंजाम दिया था.
अब तक जितनी भी जानकारियां मिली हैं उसके हिसाब से इस पूरी घटना की फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम पर ऑनलाइन स्ट्रीमिंग की गई थी. स्ट्रीमिंग करने वाला शख़्स ब्रेंटन टैरंट है. हालांकि, फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम से इन वीडियो को हटा दिया गया है और ट्विटर ने भी उनके अकाउंट को सस्पेंड कर दिया है.
अल नूर मस्जिद में उन्हें पुरुषों, महिलाओं और बच्चों पर बेरहमी से गोली चलाते हुए देखा जा सकता है.
इस शख़्स ने हिंसक दक्षिणपंथी विचारधारा वाले अपशब्द लिखे दस्तावेज़ों को अपने अकाउंट पर पोस्ट किया था.
पुलिस ने कहा है कि तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है और 28 वर्ष से अधिक उम्र के एक शख़्स पर हत्या के आरोप तय किए गए हैं.
शुक्रवार को ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने पुष्टि की थी कि न्यूज़ीलैंड की हिरासत में मौजूद वह शख़्स ऑस्ट्रेलिया का नागरिक है.
मॉरिसन ने कहा कि वह शख़्स 'दक्षिणपंथी आतंकवादी' है. उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई प्रशासन जांच में न्यूज़ीलैंड का सहयोग करेगा.
हमले का सीधा प्रसारण
वीडियो में दिख रहे शख़्स ने लाइव स्ट्रीम के लिए हेलमेट वाले कैमरे का इस्तेमाल किया है. इस पूरी घटना का वीडियो फ़ेसबुक पर प्रसारित हुआ है जिसमें लोगों को चुन-चुनकर गोली मारी जा रही है.
हमलावर ने कार से जाने और मस्जिद में हमला करने और मस्जिद से बाहर निकलने का पूरा वीडियो लाइव प्रसारित किया है. हमलावर की कार में 1992-95 के बीच हुए बोस्निया युद्ध के दौरान सर्बियाई राष्ट्रवादी अर्धसैनिक बलों की इकाई चेतनिक्स का मार्चिंग एंथम बज रहा है.
यह गीत बोस्नियाई सर्ब नेता राडोवन केराडज़िच की प्रशंसा कर रहा है. केराडज़िच को नरसंहार और युद्ध अपराध का दोषी ठहराया गया था.
इसके अलावा हमलावर के हथियारों पर उन लोगों के नाम लिखे थे जो मुसलमानों और शरणार्थियों की हत्या के दोषी थे. यूरोपीय देशों और तुर्क साम्राज्य के बीच हुई ऐतिहासिक लड़ाइयों के नाम भी उसके हथियारों पर लिखे हुए थे.
ऑस्ट्रेलियाई मीडिया का कहना है कि ब्रेंटन टैरंट मूल रूप से ग्रैफ़्टन के रहने वाले हैं जो उत्तरी सिडनी से 600 किलोमीटर दूर है. वह पहले एक जिम में काम किया करते थे.
उनकी पूर्व बॉस ट्रेसी ग्रे ने सेवन न्यूज़ से कहा, "उन्होंने कभी भी अतिवादी विचार या कोई भी पागलपन रवैया नहीं दिखाया था."
हिरासत में लिए गए अन्य लोग कौन हैं?
16,500 शब्दों के दस्तावेज़ में टैरंट ने कहा था कि वह 2017 में यूरोप का दौरा करने के बाद हमले की योजना बना रहे थे. वहां हुई घटनाओं के कारण वह ग़ुस्से में थे.
ख़ासतौर पर उसने स्वीडन में कथित आईएस समर्थक द्वारा किए गए ट्रक हमले, फ्रांस में इमैनुअल मैक्रों के राष्ट्रपति चुने जाने और फ्रांस में जातीय विविधता होने का ज़िक्र किया है.
उन्होंने यह भी कहा है कि वह इस हमले में बचना चाहते हैं ताकि इससे और डर फैले. दस्तावेज़ के अनुसार, उन्होंने तीन महीने पहले अल नूर मस्जिद पर हमले की योजना बनाई थी.
न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री जैसिंडा अर्डर्न ने कहा है कि हिरासत में लिया गया कोई भी शख़्स सुरक्षा निगरानी की सूची में नहीं था.
उन्होंने पत्रकारों से कहा, "पुलिस हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ कर रही है तो इस समय मैं उनके बारे में ज़्यादा कुछ नहीं कह सकती हूं."
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