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पुलवामा CRPF हमला: आगरा में कश्मीरियों के लिए कुछ होटलों के दरवाजे बंद
- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ़ जवानों के काफ़िले पर आत्मघाती हमले की घटना पर देश भर में रोष और उबाल है.
हर जगह घटना के विरोध में और मारे गए जवानों के सम्मान में प्रदर्शन और कैंडल मार्च हो रहे हैं. तो दूसरी ओर, इस मामले में कुछ लोग कश्मीरी लोगों को भी निशाना बना रहे हैं.
आगरा में कुछ होटल मालिकों ने बाहर बोर्ड लगा रखा है कि उनके यहां कश्मीरी लोगों को कमरे नहीं मिलेंगे. ईदगाह इलाक़े में रहने वाले रज्जब अली किशन टूरिस्ट लॉज नाम के एक होटल के मालिक हैं और वो भी उन्हीं लोगों में से शामिल हैं जिनके यहां कश्मीरी लोगों के लिए दरवाजे बंद हैं.
रज्जब अली को ये तो नहीं मालूम कि ऐसा करना क़ानूनन सही है या नहीं लेकिन इसके पीछे उनका जो तर्क है, उसे वो सही बताते हैं.
बीबीसी से बातचीत में रज्जब अली कहते हैं, "कश्मीर में काम कर रहे जवानों पर वहां के लोग पत्थर फेंकते हैं, उन्हें परेशान करते हैं. तमाम आतंकी घटनाओं में कश्मीरी शामिल रहते हैं. ऐसे में इस तरह का कोई कश्मीरी हमारे यहां आ गया तो कौन ज़िम्मेदार होगा?"
रज्जब अली का कहना है कि उन्होंने दो दिन पहले ऐसा करने का फ़ैसला किया. हालांकि इसकी प्रेरणा उन्हें पास के ही एक अन्य होटल से मिली, जिसके रिसेप्शन पर दो दिन पहले एक छोटा सा बोर्ड लगा दिया गया था और उस पर अंग्रेज़ी में लिखा था, 'कश्मीरीज आर नॉट अलाउड हियर फॉर स्टे.' यानी यहां कश्मीरी लोगों को रहने और रुकने की अनुमति नहीं है.
बताया जा रहा है कि इस तरह के बोर्ड आगरा शहर में कई और होटल मालिकों ने लगाए हैं लेकिन आगरा के होटल एंड रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन का कहना है कि ऐसा होटल मालिकों ने अपनी मर्जी से किया है, एसोसिएशन का इससे कोई लेना-देना नहीं है.
एसोसिएशन का इनकार
एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश वाधवा ने बीबीसी को बताया, "हमारी ओर से ऐसा कुछ भी नहीं कहा गया है और कहने का सवाल भी नहीं उठता है. देश के हर नागरिक को होटल में रहने की अनुमति है यदि उसके पास पहचान पत्र है. कश्मीरी कोई अलग नहीं हैं और न ही हर कश्मीरी ऐसा है, जैसा कि लोग सोच रहे हैं. हां, कुछ होटलवालों ने इस तरह के बोर्ड दो-एक दिन से लगा रखे हैं, हमें भी पता चला है. ये उनकी मर्जी है. हालांकि हमने न तो पता लगाया है कि ये बोर्ड किन लोगों ने लगाए हैं और न ही हम किसी को मना करने जा रहे हैं."
वाधवा दावा करते हैं कि इस तरह का बोर्ड लगाने वाले होटल इक्का-दुक्का ही हैं, ज़्यादा नहीं. हालांकि स्थानीय पत्रकारों के मुताबिक़, क़रीब एक दर्जन होटलों में इस तरह के बोर्ड लगे देखे गए हैं. होटल मालिक रज्जब अली भी बताते हैं कि उनके इलाक़े में ही कई लोगों ने इस तरह के बोर्ड लगा रखे हैं जिनमें कुछ लोगों ने बाद में ये बोर्ड हटा भी दिए.
वहीं, प्रशासन का कहना है कि उसके संज्ञान में ये बात है और इस तरह के बोर्ड लगाने वालों को चिह्नित करके उन्हें नोटिस भेजने की तैयारी की जा रही है. आगरा के अपर ज़िलाधिकारी नगर (एडीएम सिटी) केपी सिंह ने बीबीसी को बताया, "पुलवामा घटना के बाद कुछ लोगों ने प्रदर्शन किए थे, सड़कों पर जाम भी लगाया था. उसी में ये बात संज्ञान में आई थी कि इस तरह के बोर्ड भी कुछ लोगों ने अपने होटलों के बाहर लगाए हैं. जानकारी ली जा रही है और यदि ऐसा पाया गया तो उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी."
एडीएम सिटी केपी सिंह कहते हैं कि ऐसे बोर्ड लगाने वाले होटलों की संख्या बहुत ज़्यादा नहीं है, लेकिन जिन्होंने भी ऐसा किया है उन्हें नोटिस भेजा जाएगा और उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी.
वहीं इस तरह की ख़बरें नोएडा के कुछ होटलों के बारे में भी सामने आई हैं जहां कश्मीरी लोगों को कमरे देने से इनकार किया जा रहा है. लेकिन फ़िलहाल इस संबंध में न तो प्रशासन के पास कोई जानकारी है और न ही किसी ने खुलकर ऐसी शिकायत की है.
इससे पहले कई शिक्षण संस्थाओं से भी कश्मीरी छात्रों को प्रवेश न देने या फिर उन्हें निकाले जाने के मामले भी सामने आ चुके हैं.
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