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क्या पुलवामा हमले के बाद एयरलिफ़्ट किए गए कश्मीरी छात्र?
- Author, फ़ैक्ट चेक टीम
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
भारतीय वायु सेना के विमान में बैठे कश्मीरी छात्रों की तस्वीरों वाली एक पोस्ट सोशल मीडिया पर तेज़ी से शेयर की जा रही है.
15 फ़रवरी से लेकर अब तक फ़ेसबुक और ट्विटर पर इस पोस्ट को हज़ारों बार शेयर किया जा चुका है और हर जगह इस पोस्ट की भाषा एक ही है.
पोस्ट में लिखा है: "इस बीच कश्मीर के 319 छात्रों ने आज GATE की परीक्षा दी. कल की घटना के कारण सड़क के रास्ते जाना सुरक्षित नहीं था, इसलिए इन छात्रों को एयर-लिफ़्ट किया गया. भारतीय वायु सेना इस काम के लिए आगे आई. मेरे ये शब्द दुख की इस घड़ी में हमारे सैनिकों की सराहना करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं. हम सैनिकों के ऋणी हैं. भारतीय सशस्त्र बलों को सलाम."
14 फ़रवरी को भारत प्रशासित कश्मीर के पुलवामा में हुई बड़ी चरमपंथी वारदात से जोड़ते हुए कश्मीरी छात्रों की इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया है. इस हादसे में भारतीय सशस्त्र बल CRPF के 45 से ज़्यादा जवानों की मौत हो गई थी.
इस हादसे के बाद अधिकांश लोगों ने सोशल मीडिया के ज़रिए ही अपने दुख और गुस्से को ज़ाहिर किया है. काफ़ी लोग इस वायरल पोस्ट को एक 'पॉज़िटिव संदेश' बता रहे हैं, तो कई लोगों ने इसे कश्मीरी लोगों के ख़िलाफ़ अपना गुस्सा रखने के लिए इस्तेमाल किया है.
वायरल पोस्ट के साथ कई लोगों ने लिखा है:
- भारतीय फ़ौज इनके लिए क्या करती है देख लीजिए और ये भारतीय फ़ौज के साथ क्या करते हैं, सबको पता है.
- दुख की घड़ी में फ़ौज के इस संयम की तारीफ़ होनी चाहिए.
- दुआ करते हैं कि ये लोग अब भारतीय सैनिकों का सम्मान करेंगे.
- जब पुलवामा हमले में मारे गए सैनिकों को एयरलिफ़्ट नहीं मिला, तो इन्हें क्यों?
लेकिन तथ्यों के मुताबिक़ कश्मीरी छात्रों की इन वायरल तस्वीरों का पुलवामा हादसे से कोई लेना-देना नहीं है.
कई फ़ैक्ट गड़बड़
पहली चीज़ ये कि 15 फ़रवरी से लेकर अब तक जिस वायरल पोस्ट को 14 तारीख़ के पुलवामा हादसे से जोड़कर शेयर किया जा रहा है, वो हादसे से तीन दिन पहले की हैं.
वायरल पोस्ट में इस्तेमाल की गईं तस्वीरें जम्मू के डिफ़ेंस प्रवक्ता ने 11 फ़रवरी को ट्वीट की थीं.
वहीं ये दावा करना कि 'हादसे के बाद एग्ज़ाम देने सड़क के रास्ते जाना सुरक्षित नहीं था इसलिए छात्रों को एयरलिफ़्ट किया गया' पूरी तरह ग़लत है क्योंकि इंजीनियरिंग के लिए होने वाले सेंट्रल एग्ज़ाम GATE की कोई परीक्षा पुलवामा हादसे वाले दिन या उसके बाद नहीं हुई.
आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार GATE-2019 की अंतिम परीक्षा 10 फ़रवरी 2019 को थी, यानी पुलवामा हादसे से 4 दिन पहले.
भारत की रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण और जम्मू के डिफ़ेंस प्रवक्ता ने ट्वीट के ज़रिए ये जानकारी दी थी कि भारतीय वायु सेना ने 9 और 10 फ़रवरी को हुई GATE परीक्षा के लिए 300 से ज़्यादा कश्मीरी छात्रों को एयरलिफ़्ट किया था.
डिफ़ेंस प्रवक्ता ने 9 फ़रवरी को लिखा था, "भारतीय वायु सेना के सी-17 ग्लोबमास्टर विमान ने श्रीनगर में फंसे 319 GATE परीक्षार्थी छात्रों को एयरलिफ़्ट कर जम्मू पहुँचाया. यात्रियों समेत 39 स्थानीय नागरिक भी इस विमान में श्रीगनर से जम्मू गए. स्थानीय प्रशासन और वायु सेना के प्रयास के कारण ये संभव हो पाया."
इस ट्वीट में लिखा था कि भारी बर्फ़बारी के कारण जम्मू और कश्मीर को जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग ब्लॉक हो गया था, जिस वजह से ये लोग फंसे हुए थे.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 9-11 फ़रवरी के बीच 700 से ज़्यादा लोगों को एयरलिफ़्ट किया गया जिसमें क़रीब 200 लोगों को जम्मू से श्रीनगर ले जाया गया था.
GATE के चेयरमेन के अनुसार इस साल जम्मू-कश्मीर के लगभग 9,000 छात्रों ने GATE की परीक्षा दी है और इस बार सूबे में छात्रों का अटेंडेंस 75 प्रतिशत रहा जोकि पिछले साल से 6 प्रतिशत कम है.
GATE की परीक्षा के बाद स्थानीय मीडिया में छपी कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार एयरलिफ़्ट किए गए छात्रों में से क़रीब 180 छात्र GATE-2019 की परीक्षा नहीं दे पाए थे.
इन रिपोर्टों में जम्मू-कश्मीर सरकार और मानव संसाधन मंत्रालय के बीच ख़राब तालमेल को इसका ज़िम्मेदार ठहराया गया था.
हालांकि ये पहली बार नहीं है जब भारतीय वायु सेना ने जम्मू-कश्मीर के स्थानीय लोगों और यात्रियों को एयरलिफ़्ट किया है और फंसे हुए लोगों को बाहर निकाला है.
हर साल जब सर्दियों में (नवंबर से फ़रवरी के बीच) बर्फ़बारी के दौरान हालात बिगड़ते हैं और सड़क मार्ग से जाना असंभव होता है तो वायु सेना लोगों की मदद के लिए आगे आती है.
लेकिन भारतीय वायु सेना के इस हालिया बयान को पुलवामा हमले से जोड़ना ग़लत है.
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