बीजेपी में सिर्फ नितिन गडकरी में साहस है: राहुल गांधी

कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी में सिर्फ नितिन गडकरी ऐसे नेता हैं, जिनमें साहस है.

राहुल गांधी ने गडकरी के लिए यह टिप्पणी उनके उस बयान पर किया है जिसमें उन्होंने एबीवीपी के पूर्व सदस्यों से कहा था कि पहले अपने घर की ज़रूरतों पर ध्यान दें तब पार्टी और देश के बारे में सोचें.

एबीवीपी भारतीय जनता पार्टी का स्टूडेंट विंग है. गडकरी ने एबीवीपी के पूर्व सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा था कि जो अपने घर का ध्यान नहीं रख सकता वो देश नहीं चला सकता.

गडकरी ने कहा था, ''मुझसे कई लोग मिलते हैं. मिलने के बाद कहते हैं कि वो बीजेपी और देश के लिए काम करना चाहते हैं. मैंने ऐसे लोगों में से ही एक व्यक्ति से पूछा कि तुम क्या करते हो और तुम्हारे परिवार में कौन लोग हैं. उसने कहा कि एक दुकान चलाता था लेकिन ठीक से चली नहीं इसलिए उसको बंद कर दिया. उसकी पत्नी है और बच्चे भी हैं. मैंने उससे कहा कि तुम पहले अपने घर पर ध्यान दो क्योंकि जो घर नहीं संभाल सकता वो देश क्या संभालेगा.''

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के इस बयान की रिपोर्ट को ट्विटर पर शेयर करते हुए राहुल गांधी ने उनके साहस की प्रशंसा की है.

गडकरी से राहुल ने कहा कि वो चाहते हैं तीन और मुद्दों पर बोलने का साहस दिखाएं. इनमें राहुल ने रफ़ाल, किसानों की समस्या और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमज़ोर किए जाने के मुद्दे पर बोलने का साहस दिखाने का आग्रह किया है.

राहुल गांधी ने चार घंटे बाद एक और ट्वीट किया. इस ट्वीट में उन्होंने माफ़ी मांगते हुए गडकरी से कहा, ''ओह, गडकरी जी. एक बड़ी भूल हो गई. सबसे अहम चीज़ तो भूल ही गया...नौकरी! नौकरी! नौकरी!''

फ़्रांस से लड़ाकू विमान रफ़ाल की ख़रीदारी में राहुल गांधी केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हैं. राहुल का आरोप है कि मोदी सरकार ने रफ़ाल सौदे में उद्योगपति अनिल अंबानी की नई-नवेली कंपनी को ऑफ़सेट पार्टनर बना मोदी सरकार फ़ायदा पहुंचाया है.

इसके साथ ही कांग्रेस पार्टी यह आरोप भी लगाती है कि किसानों की मोदी सरकार उपेक्षा कर रही है और संवैधानिक संस्थाओं पर हमला कर रही है.

यह पहली बार है जब गडकरी की टिप्पणी का इस्तेमाल मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने किया है. इससे पहले गडकरी ने कहा कि था कि नाकामी की ज़िम्मेदारी नेतृत्व को लेनी चाहिए. तब गडकरी की इस टिप्पणी को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में बीजेपी की हार से जोड़कर देखा गया था.

इसके अलावा गडकरी ने ये भी कहा था कि जो नेता सपने दिखाकर वोट लेते हैं और पूरे नहीं करते तो जनता पीटाई भी करती है. इन सबके अलावा मराठा आरक्षण के मुद्दे पर पिछले साल भी गडकरी का एक बयान काफ़ी लोकप्रिय हुआ था.

गडकरी ने तब कहा था कि आरक्षण मिल जाने से किसी को फ़ायदा नहीं होगा क्योंकि देश में नौकरियां लगातार कम हो रही हैं.

गडकरी के इस बयान को पार्टी के उन वादों से जोड़कर देखा गया था जिसमें बीजेपी ने 2014 के आम चुनाव में करोड़ों रोज़गार पैदा करने का आश्वासन दिया था लेकिन सत्ता में आने के बाद नाकाम रही.

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