You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
नितिन गडकरी ने कहा इंदिरा को आरक्षण की ज़रूरत नहीं पड़ी: प्रेस रिव्यू
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्हें अपनी क्षमता साबित करने के लिए किसी तरह के आरक्षण की ज़रूरत नहीं पड़ी और उन्होंने कांग्रेस के अपने समय के पुरुष नेताओं से बेहतर काम किया.
जनसत्ता में छपी ख़बर के मुताबिक़ भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि वे महिला आरक्षण के विरोधी नहीं है, लेकिन धर्म और जाति आधारित राजनीति के ख़िलाफ़ हैं.
गडकरी ने ये टिप्पणियां रविवार को महिला स्वयं सहायता समूहों के एक प्रदर्शनी कार्यक्रम के उद्घाटन के मौक़े पर की.
भाजपा देश में आपातकाल लगाने के लिए इंदिरा गांधी की आलोचना करती रही है.
असम की भाजपा सरकार से एजीपी ने समर्थन वापस लिया
नागरिकता (संशोधन) विधेयक के मुद्दे पर असम गण परिषद (एजीपी) ने असम की भाजपा नीत गठबंधन सरकार से सोमवार को समर्थन वापस लेन का एलान किया.
इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक़ केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सोमवार को ही नागरिकता संशोधन विधेयक को मंज़ूरी दे दी.
इसका मसौदा दोबारा से तैयार किया गया है. एजीपी पूरी ताक़त से विधेयक का विरोध कर रही है.
यह विधेयक आज लोक सभा में पेश किया जाएगा, जो संसद के शीतकालीन सत्र का अंतिम दिन है.
इस मुद्दे का असम समेत पूरे पूर्वोत्तर में असर दिखा. कई जगह बंद का आह्वान किया गया.
'अखिलेश ने एक ही दिन में 13 खनन पट्टों को दी मंज़ूरी'
सीबीआई ने हमीरपुर खनन घोटाला मामले में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखलेश यादव के ख़िलाफ़ पुख़्ता सबूत मिलने का दावा किया है.
एजेंसी ने कहा है कि उसके पास दस्तावेज़ हैं जो कहते हैं कि अखिलेश ने अपनी ही सरकार की ई-टेंडर नीति और इस पर इलाहाबाद हाइकोर्ट के फ़ैसले का उल्लंघन करते हुए खनन पट्टे बांटे. 'खनन मंत्री के रूप में उन्होंने ख़ुद 14 पट्टों का आवंटन किया और 13 पट्टे तो एक ही दिन में दिए गए थे.'
द हिंदू समेत कई अख़बारों में ये ख़बर है.
सीबीआई के इन दावों के बीच सोमवार को संसद की कार्यवाही स्थगित होने के बाद सपा-बसपा के नेताओं ने एक साथ मीडिया के सामने आकर सरकार को घेरा.
रामगोपाल यादव और बसपा नेता सतीश चंद्र मिश्रा की अगुवाई में दोनों दलों के नेताओं ने केंद्र सरकार पर सीबीआई के दुरुपयोग का आरोप लगाया.
'ख़त्म क़ानून पर गिरफ्तारी की तो अफसरों को जेल'
सूचना प्रौद्योगिकी क़ानून (आईटी) की धारा-66ए ख़त्म किए जाने के बावजूद इसके तहत हो रही गिरफ्तारियों पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाई.
हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार कहता है कि कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि इसे रोका नहीं गया तो ऐसा करने वाले अफ़सरों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा.
कोर्ट ने 2015 में धारा को अभिव्यक्ति की आज़ादी का उल्लंघन बताते हुए रद्द कर दिया था.
इस धारा के तहत सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक, अश्लील साम्रगी पोस्ट करने पर व्यक्ति को गिरफ्तारी का अधिकार दिया गया था.
सीबीआई निदेशक वर्मा की याचिका पर फैसला आज
सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को अधिकारों से वंचित कर छुट्टी पर भेजने के केंद्र सरकार के फ़ैसले के ख़िलाफ़ दायर उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को फ़ैसला करेगा.
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक़ वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच छिड़ी जंग सार्वजनिक होने के बाद सरकार ने पिछले साल 23 अक्तूबर को दोनों को अवकाश पर भेजा था.
दोनों ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे. केंद्र ने सीबीआई के संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को निदेशक का अस्थाई कार्यभार सौंप दिया है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)