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जेएनयू विवाद: कोर्ट ने पुलिस से पूछा, 'बिना अनुमति कैसे दायर की चार्जशीट'
जेएनयू में कथित तौर पर भारत विरोधी नारे लगाए जाने के मामले में चार्जशीट को लेकर पाटियाला हाउस कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई है.
कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा है, ''आपके पास विधि विभाग की अनुमति नहीं है. आपने बिना अनुमति के चार्जशीट क्यों दायर की?''
बीबीसी के सहयोगी पत्रकार सुचित्र मोहंती ने इस बात की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि पुलिस ने विधि विभाग की अनुमति के बिना कोर्ट में चार्जशीट दायर की थी. इस पर कोर्ट ने पुलिस को विधि विभाग से अनुमति लेने के लिए कहा है.
इसके जवाब में दिल्ली पुलिस ने कहा है कि वह 10 दिनों में विधि विभाग की अनुमति ले आएगी. कोर्ट ने मामले की सुनवाई 6 फरवरी तक के लिए टाल दी है. साथ ही पुलिस से अगली सुनवाई तक आवश्यक अनुमति लाने के लिए कहा है.
दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार, उमर ख़ालिद, अनिर्बान भट्टाचार्य पर राजद्रोह करने का मामला दर्ज किया है. इन पर भारत विरोधी नारे लगाए जाने के आरोप हैं.
इसके अलावा चार्जशीट में आक़िब हुसैन, मुजीब हुसैन, मुनीब हुसैन, उमर गुल, रईस रसूल, बशीर भट और बशरत का नाम शामिल है. चार्जशीट में और भी अभियुक्तों के नाम हैं.
चार्जशीट में जानबूझकर क्षति पहुंचाना, धोखाधड़ी, दस्तावेज़ों की जालसाज़ी, अवैध तौर पर जनसभा करना, बलवा और आपराधिक साज़िश को अंज़ाम देने जैसे आरोप भी लगाए हैं.
वहीं, कन्हैया कुमार का कहना है कि ये चार्जशीट राजनीतिक मक़सद से दायर की है और पुलिस के आरोपों में सच्चाई नहीं है.
चार्जशीट में क्या है?
दिल्ली पुलिस ने कोर्ट से कन्हैया कुमार समेत 10 लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा शुरू करने की अपील की है.
हालांकि आरोप पत्र में कुल 36 लोगों के नाम हैं, लेकिन बाकी के ख़िलाफ़ पर्याप्त सबूत नहीं होने की बात कही गई है. कोर्ट चाहे तो उन्हें समन भेज सकता है.
आरोप पत्र के साथ कोर्ट में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फुटेज और अन्य दस्तावेज़ों को बतौर सबूत पेश किया गया है.
दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में सीपीआई नेता डी राजा की बेटी अपराजिता और जेएनयू छात्रसंघ नेता शहला राशिद का नाम भी शामिल किया गया है.
इसके अलावा जेएनयू प्रशासन, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्यों, सुरक्षाकर्मियों समेत कुछ अन्य लोगों से भी पूछताछ की गई है.
क्या है मामला
ये मामला साल 2016 का है. 9 फरवरी को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में कुछ अज्ञात युवकों ने संसद पर हमले के दोषी अफ़जल गुरू को मौत की सज़ा दिए जाने के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया था.
इस विरोध प्रदर्शन में कुछ युवाओं ने कथित तौर पर भारत विरोधी नारे लगाए थे. इसके बाद कन्हैया कुमार और उमर ख़ालिद को राजद्रोह के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था.
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