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जेएनयू विवाद: कन्हैया, उमर ख़ालिद के ख़िलाफ़ 3 साल बाद चार्जशीट दाख़िल
दिल्ली पुलिस ने जेएनयू में कथित तौर पर भारत विरोधी नारे लगाए जाने के मामले में सोमवार को पटियाला हाउस कोर्ट में चार्जशीट दाख़िल कर दी है.
दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार, उमर ख़ालिद, अनिर्बान भट्टाचार्य पर भी भारत विरोधी नारे लगाने का मामला दर्ज किया है.
इसके अलावा चार्जशीट में आक़िब हुसैन, मुजीब हुसैन, मुनीब हुसैन, उमर गुल, रईस रसूल, बशीर भट और बशरत का नाम शामिल है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में आरोप लगाया है कि कन्हैया उस भीड़ का हिस्सा थे और भारत-विरोधी नारे लगाने के लिए लोगों को भड़का रहे थे.
दिल्ली पुलिस ने बीजेपी सांसद महेश गिरी और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी की शिकायत के बाद दिल्ली के वसंत कुंज थाने में 11 फरवरी, 2016 को 124 ए (राजद्रोह) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया था.
बीबीसी के सहयोगी सुचित्र मोहंती ने पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल और सुप्रीम कोर्ट के वकील केसी कौशिक के हवाले से बताया है कि आरोप तय करने में पुलिस ने एक तय प्रक्रिया का पालन किया है.
केसी कौशिक बताते हैं, "पुलिस ने अभियुक्तों के ख़िलाफ़ इस मामले से उनके संबंध और उन पर लगे आरोपों के आधार पर अपनी चार्जशीट दाखिल की है. अब आगे की कार्रवाई कोर्ट तय करेगा कि मामले की सुनवाई के दौरान किन आरोपों को लगाया जाए और किन आरोपों को हटा लिया जाए."
चार्जशीट में क्या है?
दिल्ली पुलिस ने कोर्ट से कन्हैया कुमार समेत 10 लोगों के ख़िलाफ़ मुकदमा शुरू करने की अपील की है. हालांकि आरोप पत्र में कुल 36 लोगों के नाम हैं, लेकिन बाकी के ख़िलाफ़ पर्याप्त सबूत नहीं होने की बात कही गई है. कोर्ट चाहे तो उन्हें समन भेज सकता है.
आरोप पत्र के साथ कोर्ट में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फुटेज और अन्य दस्तावेजों को बतौर सबूत पेश किया गया है.
दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में सीपीआई नेता डी राजा की बेटी अपराजिता और जेएनयू छात्रसंघ नेता शहला राशिद का नाम भी शामिल किया गया है.
इसके अलावा जेएनयू प्रशासन, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्यों, सुरक्षाकर्मियों समेत कुछ अन्य लोगों से भी पूछताछ की गई है.
उमर खालिद और कन्हैया ने क्या कहा?
कन्हैया कुमार ने ट्वीट करके कहा है कि अगर ये ख़बर सही है तो मोदी जी और उनकी पुलिस को बहुत बहुत धन्यवाद है.
वहीं, उमर ख़ालिद और अनिर्बान ने चार्जशीट दाखिल होने के बाद अपना बयान जारी करके कहा है कि वह दिल्ली पुलिस, गृह मंत्रालय और सरकार को 9 फरवरी 2016 के बाद चुनाव से ठीक तीन महीने पहले गहरी नींद से जागकर उनके ख़िलाफ़ चार्जशीट दाखिल करने पर बधाई देना चाहते हैं. झूठ बोलना एक कला है और सिर्फ़ झूठ बोलना ही काफ़ी नहीं है. ऐसा करने वालों में झूठ बोलने के समय और जगह की भी समझ होनी चाहिए. यही बात किसी को बेहतरीन झूठा बनाती है. इसके साथ ही ऐसे व्यक्ति के पास अपने चीयरलीडर्स भी होने चाहिए जो एक दूसरे के झूठों की सराहना करें और इस समय वर्तमान सरकार में भारत का ज़्यादातर मीडिया यही काम कर रहा है.
आरोपों को लेकर ख़ालिद ने कहा है, "हमने अभी तक चार्जशीट नहीं देखी है और जो भी कुछ मीडिया में चल रहा है, वो सच है तो हम इन आरोपों का पूरी तरह से खंडन करते हैं. और हम क़ानूनी ढंग से इन्हें चुनौती देंगे."
आख़िर क्या था मामला?
साल 2016 में 9 फरवरी को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में कुछ अज्ञात युवकों ने संसद पर हमले के दोषी अफ़जल गुरू को मौत की सज़ा दिए जाने के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया था.
इस विरोध प्रदर्शन में कुछ युवाओं ने कथित तौर पर भारत विरोधी नारे लगाए थे.
इसके बाद कन्हैया कुमार और उमर ख़ालिद को राजद्रोह के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था.
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