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बुलंदशहर हिंसा: गोकशी के तीन अभियुक्तों पर रासुका
उत्तर प्रदेश पुलिस ने हाल ही में बुलंदशहर हिंसा के मामले में अज़हर ख़ान, नदीम ख़ान और महबूब अली के ख़िलाफ़ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाया है.
स्याना के गांव महाव के बाहर खेतों में तीन दिसंबर को मवेशियों के कंकाल मिले थे. इसके बाद भीड़ ने उत्पात मचाते हुए चिंगरावठी पुलिस चौकी पर हमला कर दिया था.
इस हिंसा में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह और चिंगरावठी के एक व्यक्ति सुमित कुमार की गोली लगने से मौत हुई थी.
इसी मामले में दो एफ़आईआर दर्ज की गई थीं जिसमें से एक में 27 नामज़द लोगों के ख़िलाफ़ हिंसा भड़काने का मामला दर्ज किया गया था.
वहीं, दूसरी एफ़आईआर में गोकशी को लेकर मामला दर्ज किया गया था.
रासुका लगाने की पुष्टि
स्थानीय पत्रकार सुमित शर्मा ने बताया कि बुलंदशहर के ज़िलाधिकारी ने तीन अभियुक्तों के ख़िलाफ़ रासुका लगाने की पुष्टि की है.
बुलंदशहर के ज़िलाधिकारी अनुज कुमार झा ने कहा, "हमने इस मामले में कुछ गिरफ्तारियां की थी और जाँच की गई थी. जिन तीन अभियुक्तों को जेल भेजा गया था, उन्होंने कोर्ट में ज़मानत की अर्जी दी थी. ये जानते हुए कि उन्हें ज़मानत मिल सकती है और वो जिले की क़ानून-व्यवस्था को बिगाड़ सकते हैं, हमने इन अभियुक्तों अज़हर, नदीम और महबूब अली के ख़िलाफ़ रासुका (राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून) लगा दिया है."
पुलिस ने भी एक विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि गोकशी के मामले में तीन अभियुक्तों के ख़िलाफ़ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है.
विज्ञप्ति में कहा गया है, "अगर उन्हें ज़मानत पर छोड़ा जाता है, तो वैसी ही गोकशी की घटनाएं फिर हो सकती हैं और वे सबूतों के साथ छेड़खानी भी कर सकते हैं."
बुलंदशहर में दिसंबर में हुआ क्या था
हिंसा भड़कने के बाद इस मामले में स्याना थाना, बुलंदशहर में एफ़आईआर दर्ज की गई थी.
एफ़आईआर के मुताबिक़, महाव गांव के जंगल में गोकशी की घटना की जानकारी मिली थी. इसके बाद जब पुलिस घटना स्थल पर पहुंची तो वहां काफ़ी भीड़ जमा थी.
पुलिस ने वहां लोगों को समझाने-बुझाने की कोशिश की. 50-60 लोगों की भीड़ को स्याना के प्रभारी निरीक्षक सुबोध कुमार सिंह ने भी काफ़ी मनाने की कोशिश की, लेकिन कोई ख़ास कामयाबी हासिल नहीं हुई.
लेकिन भीड़ कुछ सुनने को तैयार नहीं थी और भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया.
इसके बाद योगेश राज और कुछ लोगों के नेतृत्व में दोपहर क़रीब 13:35 बजे चौकी चिंगरावठी के सामने सड़क पर लगे जाम लगाए खड़े लोग और उग्र होने लगे.
मौके पर मौजूद एसडीएम स्याना और क्षेत्राधिकारी स्याना ने भीड़ को समझाने की कोशिश की, दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई का आश्वासन दिया. कुछ लोगों को कोतवाली, स्याना चलकर एफ़आईआर की कॉपी लेने को भी कहा था. लेकिन वहां कुछ लोग भीड़ को भड़काते रहे जिसके बाद हालात काबू से बाहर हो गए.
एफ़आईआर के मुताबिक भीड़ ने असलाह, लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया.
सुबोध कुमार सिंह पर हमला
प्रभारी निरीक्षक सुबोध कुमार सिंह को गोली मारी गई थी और उनकी लाइसेंसी पिस्तौल, तीन मोबाइल फ़ोन छीन लिया गया था.
भीड़ ने निजी-सरकारी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया गया था.
जब क्षेत्राधिकारी स्याना अपनी जान बचाने के लिए चौकी में घुसे थे तो भीड़ ने मारो-मारो का शोर करते हुए चौकी में भी आग लगा दी.
इस दौरान पुलिसकर्मी घायल पड़े सुबोध कुमार सिंह को इलाज के लिए सरकारी वाहन में बैठाने लगे तो भीड़ ने दोबारा हमला कर दिया.
घायल प्रभारी निरीक्षक सुबोध कुमार सिंह को सीएचसी लखावटी (औरंगाबाद) ले जाया गया था जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था.
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