बुलंदशहर हिंसा: चश्मदीद का दावा, 'इंस्पेक्टर सुबोध ने मारी थी सुमित को गोली'

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- Author, टीम बीबीसी हिंदी
- पदनाम, नई दिल्ली
बुलंदशहर हिंसा मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस को अहम कामयाबी दरअसल एक चश्मदीद की मदद से मिली.
पुलिस ने इसी चश्मदीद के बयान के आधार पर इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या के आरोप में गुरुवार को सिकंदराबाद-नोएडा बॉर्डर से प्रशांत नट को गिरफ़्तार किया. प्रशांत का नाम पहले से दर्ज एफआईआर में नहीं था.
मुकेश नाम के इस चश्मदीद ने शुक्रवार को पुलिस की मौजूदगी में मीडिया को बताया कि प्रशांत नट ने इंस्पेक्टर सुबोध की रिवॉल्वर छीनकर उन पर गोली चलाई थी, जिससे उनकी मौत हो गई थी.
प्रशांत को शुक्रवार को स्थानीय अदालत में पेश किया गया जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
पुलिस जब प्रशांत को ले जा रही थी तो पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या उन्होंने इंस्पेक्टर को गोली मारी. इसके जवाब में प्रशांत ने कहा, "नहीं."

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मुकेश का दावा, 'इंस्पेक्टर ने चलाई थी सुमित पर गोली'
मुकेश ने यह दावा भी किया कि पहले इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह ने मृतक सुमित को गोली मारी थी, जिसके बाद भीड़ ने उन पर हमला कर दिया था.
मुकेश ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "कोतवाल साहब मुझे जानते थे. मेरा उनसे परिचय था. चौकी के सामने उनकी ठोड़ी फूट चुकी थी. मैं रेत की एक ट्रॉली की आड़ में खड़ा था. चारों ओर से पथराव हो रहा था. मैं उन्हें अपने गांव की तरफ़ ले जाने की कोशिश कर रहा था."
"सुमित ने पत्थर मारा जो कोतवाल साहब के लग गया. कोतवाल साहब ने भी मारा जो किसी और को जाकर लगा. सुमित पथराव में सबसे आगे था. रास्ते में एक नाली पड़ती है. नाली कूदते समय ही कोतवाल साहब ने सुमित को गोली मार दी."
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"सुमित मौक़े पर ही गिर गया. वहां एक दीवार पड़ती है, दीवार के पीछे से प्रशांत आया और उसने (इंस्पेक्टर को) पीछे से जकड़ लिया. इसके बाद पब्लिक एकदम टूट पड़ी. लोगों ने पत्थर और डंडों से उन्हें मारा. वो नीचे गिर गए. तभी प्रशांत ने उनसे रिवॉल्वर छीनकर उनको गोली मार दी."
मुकेश का कहना है कि उनके सामने ही प्रशांत ने इंस्पेक्टर सुबोध सिंह को गोली मारी.
उन्होंने कहा, "इसके बाद प्रशांत ने रिवॉल्वर वहीं गिरा दी थी. पहले वो उसे ले जा रहा था फिर किसी ने कहा कि इसे वहीं छोड़ दो तो उसने वैसा ही किया."



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ऐसे सामने आया प्रशांत नट का नाम
बुलंदशहर के एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने बीबीसी संवाददाता नवीन नेगी को बताया कि चश्मदीद मुकेश को एक वीडियो के आधार पर चिह्नित किया गया और फिर उससे पूछताछ की गई.
उन्होंने बताया, "उस वीडियो में 2 मिनट 8 सेकेंड पर गोली चलने की आवाज़ आती है. उसके आगे पीछे सात-आठ लोग वहां पाए गए, जहां इंस्पेक्टर घुटनों के बल गिरे हुए थे. उन सबकी पहचान की गई लेकिन उनमें से एक व्यक्ति की पहचान नहीं हो पा रही थी. वो एक व्यक्ति ऐसा निकला जिसे इंस्पेक्टर ने मदद के लिए बुलाया था. वो हरवानपुर का था और इंस्पेक्टर को दीवार कुदवाने के लिए ले जा रहा था. फिर उसने बताया कि इसमें कौन कौन लोग शामिल थे."
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एसएसपी प्रभाकर चौधरी के मुताबिक, शुरू में वीडियो में प्रशांत की पहचान नहीं हो पाई थी क्योंकि वह वीडियो बनाने वाले के पीछे खड़ा था. लेकिन बाद में वह एक जगह दिख रहा था. फिर उसके घर पर पता किया गया तो पता चला कि घटना के बाद ही वह अपने परिवार समेत फ़रार हो गया था.
उन्होंने बताया, "प्रशांत थोड़ा दबंग टाइप का है. हट्टा कट्टा है. उसकी उम्र 32-34 के क़रीब है."
जीतू फौजी पर हत्या के आरोप नहीं: पुलिस
प्रभाकर चौधरी ने बीबीसी संवाददाता कुलदीप मिश्र को बताया कि यह कहना ग़लत है कि प्रशांत की गिरफ़्तारी करके उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपनी थ्योरी बदली है.

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उन्होंने कहा, "जब इस मामले में जीतू फौजी को गिरफ़्तार किया गया था तो कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि उसे इंस्पेक्टर की हत्या के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है. हमारी ओर से कभी ऐसा नहीं कहा गया. जीतू फौजी हिरासत में है और उस पर भीड़ में शामिल होने, नारेबाज़ी और आगज़नी करने के आरोप हैं."
एएसपी का कहना है कि पुलिस ने इससे पहले किसी को इंस्पेक्टर की हत्या के आरोप में गिरफ़्तार नहीं किया था.

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पहले योगेश राज को मुख्य अभियुक्त बताया गया था
इस मामले में शुरुआत में बजरंग दल की स्थानीय इकाई से जुड़े योगेश राज को मुख्य अभियुक्त बनाया गया था, जिनकी अभी तक गिरफ़्तारी नहीं हुई है.
इस पर प्रभाकर चौधरी ने कहा, "योगेश राज को न्यायालय ने उद्घोषित अपराधी घोषित किया है. अगर छह-सात दिन में वह नहीं हाज़िर होता है या नहीं गिरफ़्तार किया जाता है तो उसके ख़िलाफ़ अलग से एक मुक़दमा भी दर्ज होगा और उसके घर की कुर्की करा दी जाएगी."



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कलुआ ने किए थे कुल्हाड़ी से वार: पुलिस
एक और वीडियो का ज़िक्र करते हुए प्रभाकर चौधरी ने बताया, "एक वीडियो आपने देखा होगा जिसमें बॉडी आधी लटकी हुई है वो तब का है जब इंस्पेक्टर को गोली लग चुकी थी और पुलिस उन्हें बचाने पहुंची थी. लेकिन भीड़ फिर वहां आ गई. उन्होंने पुलिस पर फायर किया तो सब (पुलिसकर्मी) भाग गए. भीड़ ने आकर जीप में आग लगा दी थी. जलाने की भी कोशिश की थी और इंस्पेक्टर का जूता जल गया था. तीसरी बार की कोशिश में पुलिस उन्हें वहां से ले जा पाई."
बुलंदशहर के एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने बीबीसी संवाददाता नवीन नेगी को बताया कि कलुआ नाम के एक शख़्स की भी तलाश की जा रही है जिसने इंस्पेक्टर सुबोध पर कुल्हाड़ी से हमला किया था.

एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने बताया, "कलुआ सड़क जाम करने के लिए पेड़ काट रहा था. सुबोध सिंह के शरीर पर जो गहरे ज़ख़्म पाए गए थे वे कुल्हाड़ी के वार से ही थे. सिर में छह-सात घाव थे. शायद वो चोट न लगी होती तो, वे भी दौड़कर अपनी जान बचा सकते थे."
तीन दिसंबर, 2018 को बुलंदशहर में गुस्साई भीड़ के हमले में पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह और एक स्थानीय युवक सुमित की मौत हो गई थी. यह भीड़ उस क्षेत्र में कथित गो हत्या के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर रही थी.
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