बुलंदशहर: रास्ते में लगा जाम तो मंदिर में पढ़ी गई नमाज़

बुलंदशर मंदिर

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    • Author, सुमित शर्मा
    • पदनाम, बुलंदशहर से, बीबीसी हिंदी के लिए

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर स्थित जैनपुर गांव के शिव मंदिर में नमाज़ पढ़ते मुसलमानों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं.

ये तस्वीरें बुलंदशहर में चल रहे तीन दिवसीय विशेष धार्मिक सम्मेलन 'इज्तेमा' में शामिल होने आए मुसलमानों के एक समूह की हैं.

इस इज्तेमा में देश-विदेश से क़रीब दस लाख मुसलमान जुटे हैं. वे यहां से समूहों में बंटकर धार्मिक संदेश फैलाने का काम करेंगे.

वायरल हो रही तस्वीरें रविवार की हैं और सोशल मीडिया पर लोग इन्हें सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक बता रहे हैं.

ये इज्तेमा बुलंदशहर के दरियापुर गांव में हो रहा है. यहां पहुंच रहे लोगों के लिए आस-पास के ग्रामीणों ने भी खाने-पानी की व्यवस्थाएं की हैं.

भारी भीड़ की वजह से मेरठ-बुलंदशहर मार्ग पर जाम भी लग गया है.

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मुसलमानों के जिस समूह की तस्वीरें वायरल हुई हैं, वो जैनपुर गांव के पास जाम में फंस गया था. इस गांव के हिंदू लोगों ने उनके लिए पानी पीने की व्यवस्था की थी.

मंदिर के व्यवस्थापक और पुजारी कन्हैयालाल शर्मा ने बीबीसी को बताया, "कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बड़ी तादाद में लोग आ रहे थे. सड़क पर जाम लगा था. हमने भी आने वाले लोगों के लिए पानी की व्यवस्था की है. दोपहर में जब नमाज़ का समय हुआ तो उन्होंने नमाज़ पढ़ने की इच्छा ज़ाहिर की."

कन्हैया बताते हैं, "हमने उनसे कहा कि मंदिर साफ़-सुथरी जगह है, आप यहीं पर नमाज़ पढ़ लीजिए. हमारे कहने पर उन्होंने मंदिर में ही नमाज़ पढ़ी. हमें बहुत अच्छा लगा."

कन्हैयालाल शर्मा

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इमेज कैप्शन, मंदिर के पुजारी और व्यवस्थापक कन्हैयालाल शर्मा

जिस समय ये समूह नमाज़ पढ़ रहा था कन्हैया वहीं मौजूद थे. वो कहते हैं, "हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं. ये मंदिर मुख्य सड़क मार्ग पर है. यहां सभी धर्मों के साधु-संत आते रहते हैं. हम सबकी सेवा करने में विश्वास करते हैं. मुसलमानों ने नमाज़ पढ़ी, हमें अच्छा लगा. भगवान तो सभी के हैं."

कन्हैया को ख़ुशी है कि उनके मंदिर में ली गई तस्वीर ने देशभर में भाईचारे का संदेश दिया है. वो कहते हैं, "सभी लोग भाईचारे से और मिलजुल कर रहें. यही सबसे अच्छा है. जियो और जीने दो. इससे अच्छी कोई बात नहीं है."

नमाज़ पढ़ते मुसलमान

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तस्वीरें सामने आने के बाद किसी ने भी मंदिर प्रशासन से किसी तरह की शिकायत नहीं की है. कन्हैया कहते हैं, "हमारे क्षेत्र में सांप्रदायिक भाईचारा बहुत ज़्यादा है. यहां के हिंदुओं ने इज्तेमा के लिए हर संभव मदद की है और शांति व्यवस्था बनाए रखी है. खाने-पीने का इंतज़ाम भी कुछ हिंदू समूहों ने किया है."

जैनपुर शिव मंदिर

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जैनपुर गांव का शिव मंदिर कन्हैया की दादी ने बनवाया था और अब उनका परिवार इसकी देखभाल कर रहा है. 42 वर्षीय कन्हैया कहते हैं, "जिसके मन में भारत के प्रति प्रेम होगा उसके मन में भाईचारा भी होगा."

जैनपुर शिव मंदिर

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इमेज कैप्शन, जैनपुर के लोगों का कहना है कि उन्हें ख़ुशी है कि उनके गांव के मंदिर ने भाईचारे का संदेश दिया

कन्हैया कहते हैं, "हिंदू-मुसलमान के नाम पर फैलाई जा रही नफ़रत की सबसे बड़ी वजह अशिक्षा है. जब समाज से अशिक्षा दूर हो जाएगी तो नफ़रत भी ख़त्म हो जाएगी."

वो ये भी कहते हैं कि नफ़रत की एक वजह राजनीति भी है. वहीं गांव के अन्य लोगों ने भी मुसलमानों के मस्जिद में नमाज़ पढ़ने पर ख़ुशी ज़ाहिर की है.

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