राम मंदिर मुद्दा: अयोध्या के मुसलमान गए कहीं नहीं, पर आशंकित ज़रूर हैं

अयोध्या में हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता
    • Author, समीरात्मज मिश्र
    • पदनाम, अयोध्या से बीबीसी हिंदी के लिए

शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के दौरे के बाद विश्व हिंदू परिषद यानी विहिप की रविवार को अयोध्या में धर्मसभा के आयोजन को लेकर भारी सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं.

अयोध्या शहर के भीतर प्रवेश करने वाले सभी रास्तों पर पुलिस, पीएसी और आरएएफ़ के जवानों की तैनाती और अधिकारियों की हूटर लगी गाड़ियों की आवाजाही ये बता रही है कि सड़कों के दोनों ओर 'अयोध्या चलो' के नारों के साथ जो पोस्टर्स और होर्डिंग्स लगे हैं, उनका कितना महत्व है.

'जय श्रीराम', 'मंदिर वहीं बनाएंगे', 'हर हिन्दू की यही पुकार-पहले मंदिर फिर सरकार' जैसे नारे यूं तो शनिवार को अयोध्या के लक्ष्मण क़िला मैदान में उद्धव ठाकरे की सभा के दौरान जमकर लग रहे थे, लेकिन ऐसे नारे अयोध्या की फ़िज़ां में पिछले कई दिनों से गूंज रहे हैं. शिवसेना की सभा को संतों के आशीर्वाद लेने के मक़सद से और इसी नाम से शनिवार को आयोजित किया गया था.

महाराष्ट्र के तमाम इलाकों से शिव सैनिक ट्रेन बुक कराकर, गाड़ियों से और बाइक्स से अयोध्या पहुंचे. शिवसैनिक बेहद आक्रामक थे और जोशीले नारे लगा रहे थे.

शिवसेना

इमेज स्रोत, SAMIRATMAJ MISHRA

इमेज कैप्शन, शहर में जगह-जगह शिवसेना के पोस्टर लगे हैं

कड़ी सुरक्षा

अपने नेता उद्धव ठाकरे के एक-एक बयान पर कई-कई नारे लग रहे थे और इन्हीं नारों की ताक़त से उद्धव सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार को मंदिर निर्माण के मुद्दे पर कठघरे में खड़ा कर रहे थे.

उद्धव ठाकरे ने कहा कि कुंभकर्ण की भांति सोई हुई सरकार को जगाने के लिए वो अयोध्या आए हैं. उद्धव ठाकरे रविवार को भी अयोध्या में ही हैं.

रविवार को ही होने वाले विश्व हिन्दू परिष्द के कार्यक्रम धर्म सभा को लेकर उनका कहना था कि मंदिर निर्माण कोई भी करे, शिवसेना का उसको समर्थन रहेगा.

शिवसेना और वीएचपी के कार्यक्रमों को देखते हुए अयोध्या में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं. स्थानीय पुलिस के अलावा 48 कंपनी पीएसी, आरएएफ़ और एडीजी स्तर के सात अधिकारियों की तैनाती यहां की गई है.

पुलिसकर्मी

इमेज स्रोत, SAMIRATMAJ MISHRA

मुस्लिम टोला का माहौल

लखनऊ ज़ोन के डीआईजी ओंकार सिंह का कहना था कि सभी को आश्वस्त किया गया है कि उनकी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी पुलिस और प्रशासन की है, इसलिए बेफ़िक्र रहें. ओंकार सिंह ने कहा कि स्थानीय लोगों को असुविधा न हो, इसलिए कई रास्तों पर गाड़ियों के आवागमन को प्रतिबंधित भी किया गया है.

बावजूद इसके, अयोध्या के स्थानीय नागरिक ख़ुद को परेशानी में महसूस कर रहे हैं. पांजीटोला, मुगलपुरा जैसे कुछ मोहल्ले की मुस्लिम बस्तियों के लोगों ने बातचीत में आशंका जताई कि बढ़ती भीड़ को लेकर उनमें थोड़ा भय का माहौल है, क्योंकि ऐसी ही स्थितियां 1992 में भी बनीं थीं.

इश्तियाक़ अहमद
इमेज कैप्शन, इश्तियाक़ अहमद

इश्तियाक़ अहमद कहते हैं, "ये जो भीड़ बढ़ रही है, उसमें लोगों को अहसास हो रहा है कि 1992 जैसा कोई हादसा न हो जाए. कुछ लोगों ने अपने घरों से बच्चों और औरतों को हटा दिया है. कुछ लोग राशन-पानी भी अपने घरों में जमा कर चुके हैं. "

पांजीटोला के कहने वाले शेर अली कहते हैं, "प्रशासन ने आश्वस्त किया है लेकिन आप जानते हैं कि दूध का जला मट्ठा भी फूंककर पीता है. 1992 का मंज़र लोग देख चुके हैं कि किस तरह से मुसलमानों के घरों, मज़ारों और मस्जिदों पर बाहरी लोगों के हमले हुए, किस तरह लोगों को कई-कई दिन तक घरों में क़ैद रहना पड़ा. इसलिए थोड़ा डर तो है ही."

अयोध्या

इमेज स्रोत, SAMIRATMAJ MISHRA

विवादित परिसर से कुछ ही दूरी पर रहने वाले रईस अहमद कहते हैं कि लोग एहतियातन अपने घरों में खाने-पीने का सामान जमा किए हुए हैं ताकि किसी इमर्जेंसी में उन्हें दिक़्क़त न हो.

उनके मुताबिक, "लोगों में, ख़ासतौर पर मुसलमानों में डर ज़रूर है लेकिन कोई भी व्यक्ति यहां से कहीं गया नहीं है. इस तरह की बातें सही नहीं हैं."

हालाँकि उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से ऐसा कोई बयान नहीं आया कि उनका भरोसा प्रशासन पर जगे. पिछले दिनों भी ऐसा हुआ था पुलिसबलों के सामने ही कांड हुए थे. इसलिए वे अपनी सुरक्षा को लेकर आश्वस्त नहीं हैं.

रईस
इमेज कैप्शन, रईस

महंगी हुई चीज़ें

वहीं अयोध्या में टूरिस्ट गाइड का काम करन वाले संजय यादव कहते हैं कि भीड़ बढ़ने की आशंका से लोगों को बेतमतलब की परेशानी उठानी पड़ रही है, "लोग कहीं आ-जा नहीं सकते हैं. हर जगह और हर बार चेकिंग हो रही है, ज़रूरी सामान या तो मिल नहीं रहे हैं या फिर बहुत महंगे हो गए हैं. तो इस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है."

किसी अनहोनी की आशंका से घरों में राशन और ज़रूरी सामान जमा करने की बात संजय भी स्वीकार करते हैं.

वो कहते हैं, "मैंने ख़ुद ही घर में अपने लोगों के खाने के लिए और जानवरों के लिए भी दाना-पानी, भूसा इत्यादि इकट्ठा कर लिया है. मेरी तरह ऐसा करने वाले और भी लोग है."

महिला

इमेज स्रोत, SAMIRATMAJ MISHRA

इमेज कैप्शन, कड़ी सुरक्षा के कारण लोगों को आने-जाने में भी दिक्कत हो रही है

बहरहाल, उद्धव ने राम लला के लिए लड़ाई का अपना दावा पहले ठोंक कर वीएचपी को परेशान ज़रूर किया है लेकिन जानकारों का कहना है कि प्रशासन के लिए वीएचपी का आयोजित कार्यक्रम कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण है.

वीएचपी के नेताओं का दावा है कि कार्यक्रम में दो लाख से ज़्यादा लोग आएंगे, लेकिन असलियत में ये संख्या कितनी रहती है, ये देखना बहुत महत्वपूर्ण होगा.

ये भी पढ़ेंः

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)