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अशोक गहलोत से बग़ावत करने वाले सचिन पायलट की पूरी कहानी
- Author, टीम बीबीसी हिंदी
- पदनाम, नई दिल्ली
राजस्थान के उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच की नाराज़गी आज राजनीति की सुर्खियों में है.
राज्य में कांग्रेस की सरकार रहेगी या जाएगी इन सब अटकलों के बीच, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को विधायकों की बैठक बुलाई. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक इस बैठक में 107 विधायक शामिल हुए हैं. एजेंसी के मुताबिक बैठक से बाहर निकले एक विधायक ने कहा,- "आल इज़ वेल."
इस बैठक में सचिन पायलट नहीं पहुँचे. सचिन फिलहाल दिल्ली में हैं. लेकिन ऐसा नहीं की दोनों के बीच की नाराज़गी नई बात हो.
उसकी एक बानग़ी 2018 के चुनावी नतीजों के आने के बाद भी दिखी थी.
मुख्यमंत्री कौन बनेगा - प्रदेश अध्यक्ष और युवा चेहरा सचिन पायलट या पूर्व मुख्यमंत्री और तज़ुर्बेकार दिग्गज अशोक गहलोत? ये सवाल तब भी कई दिनों तक चर्चा में रहा था, और उसकी वजह भी थी.
दरअसल 2018 में कांग्रेस पाँच साल बाद राजस्थान में फिर सत्ता में लौटी, और ज़ोरदार तरीक़े से लौटी. 2013 के चुनाव में 200 में से मात्र 21 सीटें जीतने वाली पार्टी ने इस बार 99 सीटें ख़ुद की जीतीं.
कुछ सीटें सहयोगियों ने जीतीं और पार्टी ने आसानी से सरकार बनाने लायक बहुमत जुटा लिया.
जीत का असल हीरो माना गया सचिन पायलट को - जिन्होंने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष की ज़िम्मेदारी उठाते हुए प्रदेश के चप्पे-चप्पे में जाकर वापस उन वोटरों का ध्यान खींचा जो 2013 में पार्टी से दूर चले गए थे, या हताश महसूस कर रहे थे.
मगर आख़िरकार अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बने, सचिन पायलट उप-मुख्यमंत्री.
सचिन पायलट 2002 में कांग्रेस में शामिल हुए थे. इसके बाद वह राजनीति की सीढ़ियां चढ़ते चले गए.
मात्र 23 साल की उम्र में अपने पिता को खोने वाले सचिन पायलट कॉरपोरेट सेक्टर में नौकरी करना चाहते थे.
उनकी इच्छा भारतीय वायुसेना में पायलट की नौकरी करने की भी थी.
लेकिन 11 जून, 2000 को एक सड़क हादसे में पिता राजेश पायलट की मौत ने युवा सचिन पायलट के जीवन की दिशा बदल दी.
गाड़ी चलाकर गांव-गांव घूमने वाले नेता
पायलट के लिए राजनीति का क्षेत्र कोई अजनबी जगह नहीं है. भारतीय राजनीति में उनके पिता राजेश पायलट का बड़ा नाम है. उनकी मां रमा पायलट भी विधायक और सांसद रही हैं.
साल 1977 में यूपी के सहारनपुर में जन्मे पायलट ने उच्च शिक्षा प्राप्त की है. उनकी प्रारम्भिक शिक्षा नई दिल्ली में एयर फ़ोर्स बाल भारती स्कूल में हुई और फिर उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफ़न्स कॉलेज में शिक्षा प्राप्त की. इसके बाद पायलट ने अमेरिका में एक विश्वविद्यालय से प्रबंधन में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की.
कांग्रेस पार्टी में शामिल होने से पहले सचिन पायलट बीबीसी के दिल्ली स्थित कार्यालय में बतौर इंटर्न और अमरीकी कंपनी जनरल मोटर्स में काम कर चुके हैं.
लेकिन बचपन से वो भारतीय वायुसेना के विमानों को उड़ाने का ख़्वाब देखते आए थे.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, "जब मुझे पता चला कि मेरी आंखों की रोशनी कमज़ोर है तो मेरा दिल टूट गया क्योंकि मैं बड़े होकर अपने पिता की तरह एयरफ़ोर्स पायलट बनना चाहता था. स्कूल में बच्चे मुझे मेरे पायलट सरनेम को लेकर चिढ़ाया करते थे. तो मैंने अपनी मां को बताए बिना हवाई जहाज़ उड़ाने का लाइसेंस ले लिया."
लेकिन जब सचिन पायलट ने अपने पिता की राजनीतिक विरासत संभालना शुरू किया तो अपने पिता के अंदाज़ में ही ख़ुद गाड़ी चलाकर गांव-गांव घूमना शुरू किया था.
कांग्रेस में शामिल होने के बाद उन्हें "डाइनैस्टिक लीडर" होने यानी वंशवाद के कारण राजनीतिक लाभ मिलने जैसी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था.
अपने राजनीतिक सफ़र की शुरुआत में ही सचिन ने एनडीटीवी के एक कार्यक्रम में इस बारे में बात की थी.
सचिन पायलट ने कहा था, "राजनीति कोई सोने का कटोरा नहीं है जिसे कोई आगे बढ़ा देगा. इस क्षेत्र में आपको अपनी जगह ख़ुद बनानी होती है.''
राजनीतिक सफ़र
42 साल के सचिन बीते 17 सालों में राजनीति की सीढ़ियां चढ़ते चले गए.
सचिन ने अपने राजनीतिक सफर के बारे में कहा था, "जब मेरे पिता ज़िंदा थे तो मैंने कभी उनके साथ बैठकर अपने राजनीतिक सफर को लेकर कोई बात नहीं की. लेकिन जब उनकी मौत हो गई तो ज़िंदगी एक दम बदल गई. इसके बाद मैंने सोच-समझकर राजनीति में आने का फ़ैसला किया. किसी ने भी राजनीति को मेरे ऊपर थोपा नहीं. मैंने अपनी पढ़ाई से जो कुछ भी सीखा था, मैं उसकी बदौलत सिस्टम में एक बदलाव लाना चाहता था."
दलाई लामा से सीखी विनम्रता
दौसा और अजमेर से सांसद रहे पायलट हाल में हुए विधानसभा चुनावों में टोंक से कांग्रेस पार्टी की टिकट पर चुने गए.
इस दौरान उन्होंने कई जगह चुनावी सभाएं की और लोगों से सीधा रिश्ता बनाने की कोशिशें की.
एक रैली के दौरान जब सचिन पायलट चुनावी सभा में देरी से पहुंचे तो उन्होंने उनको सुनने आए लोगों से माफ़ी भी मांग ली.
हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में सचिन पायलट ने कहा, "मैं दलाई लामा का काफ़ी सम्मान करता हूं. किसी भी व्यक्ति की असली ताकत वो होती है जब कोई व्यक्ति आपके साथ 30 सेकेंड भी बिताता है तो आपके अंदर विनम्रता, धैर्य और चेहरे पर वो मुस्कान रहे जिससे लोग आपके साथ सहज हो जाएं. वो बीते पचास सालों से इसी मुस्कान के साथ जी रहे हैं."
सारा से शादी पर सचिन
सचिन पायलट ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्ला की बेटी सारा से शादी की है.
इंडियन टेरिटोरियल आर्मी में अधिकारी रह चुके सचिन ने मुस्लिम समुदाय की लड़की से शादी करने पर सवाल उठाने वालों को एक इंटरव्यू में खुलकर जवाब दिया था.
सिमी गरेवाल से बातचीत के साथ एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, "धर्म एक बहुत ही व्यक्तिगत मसला है. जब आप ज़िंदगी के अहम फ़ैसले लेते हैं तो धर्म और जाति के आधार पर ही फ़ैसला नहीं लेना चाहिए."
राहुल गांधी से कैसे संबंध
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के सबसे क़रीबियों में गिने जाने वाले सचिन को अपनी बात साफगोई के साथ रखने वाला नेता माना जाता रहा है.
ब्लूमबर्ग क्विंट को दिए इंटरव्यू में सचिन पायलट कहते है, "मैं मानता हूं कि राहुल गांधी एक ऐसे व्यक्ति हैं जो कि समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं और उनके अंदर ताक़त की भूख नहीं है."
राजस्थान में सचिन पायलट को मुख्यमंत्री पद का दावेदार माना जा रहा था लेकिन कांग्रेस नेतृत्व ने अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री पद की कमान सौंप दी.
इसके बाद औपचारिक प्रेस वार्ता में सचिन पायलट ने 'कौन बनेगा करोड़पति' कार्यक्रम के आधार पर मज़ाक में कहा, "इस कमरे में सभी लोग बैठे थे, किसे पता था आख़िर में दो लोग करोड़पति बन जाएंगे."
गंभीर मुद्दों पर स्पष्टता के साथ बात करने वाले सचिन पायलट को इस दौरान खुलकर ठहाके लगाते हुए भी देखा जा सकता है.
राजनीति में ऐसे कम ही लोग हैं जो खुलकर ठहाके लगाते हैं.
उन्हें अपनी बात को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की महारत हासिल है. इसमें तर्क भी होते हैं और शब्द भी.
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