ज़ोमैटो के डिलिवरी मैन से लोगों को क्यों हैं 'सहानुभूति'

ज़ोमैटो

इमेज स्रोत, Twitter

    • Author, टीम बीबीसी
    • पदनाम, नई दिल्ली

खाना डिलिवर करने वाले एक शख़्स का वीडियो खूब वायरल हो रहा है. इस वीडियो में ये शख़्स डब्बा खोलकर ग्राहक का खाना खा जाता है और फिर उस डब्बे को दोबारा बंद कर देता है.

वीडियो सामने आने के बाद इस डिलिवरी मैन को नौकरी से निकाल दिया गया है. इस घटना के बाद से देश की डिलिवरी इंडस्ट्री को लेकर बहस छिड़ गई है.

ये वीडियो दक्षिण भारत के मदुरै का है. वीडियो में दिख रहे शख़्स ने लोकप्रिय फूड डिलिवरी ऐप ज़ोमैटो की टी-शर्ट पहन रखी है. वो किसी ग्राहक का ऑर्डर लेकर जा रहा है, लेकिन रास्ते में वो डिब्बा बंद खाना खोलकर खा लेता है और फिर दोबारा उस खाने को सील करके डिलिवरी बैग में रख देता है.

ज़ोमैटो

इमेज स्रोत, Twitter

इस वीडियो को अबतक हज़ारों बार देखा जा चुका है. कई लोगों ने इस पर नाराज़गी जताई तो कई लोग सोशल मीडिया पर इसे लेकर मज़ाक भी कर रहे हैं.

छोड़िए X पोस्ट, 1
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 1

छोड़िए X पोस्ट, 2
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 2

लोगों की प्रतिक्रिया को देखते हुए भारत की सबसे बड़ी फूड डिलिवरी कंपनी ज़ोमैटो ने एक बयान जारी कर कहा कि उन्होंने इस "घटना को बेहद गंभीरता से लिया है."

ज़ोमैटो ने कहा, "हमने वीडियो में दिख रहे डिलिवरी मैन से लंबी बात की है, जिससे हमें समझ आया कि ये एक इंसानी ग़लती थी. फिलहाल हमने उसे काम से हटा दिया है."

हालांकि अज्ञात डिलिवरी मैन को काम से निकाले जाने की ख़बर जैसे ही सामने आई, बहस का रुख़ बदल गया.

ज़ोमैटो

इमेज स्रोत, Thinkstock

सहानुभूति

लोगों ने उस डिलिवरी मैन के प्रति सहानुभूति जताई. साथ ही अगल-अलग सेक्टरों में काम कर रहे ऐसे लोगों के काम के घंटों, मुश्किल स्थितियों और कम तनख्वाह जैसे मसलों पर भी बात होने लगी.

जब बीबीसी ने डिलिवरी करने वाले कुछ लोगों से बात की तो उन्होंने भी ऐसी ही समस्याओं का ज़िक्र किया.

नाम ना बताने की शर्त पर एक डिलिवरी करने वाले शख़्स ने बीबीसी से कहा, "पहले हमें हर डिलिवरी के लिए 60 रुपए मिलते थे, फिर 40 रुपए मिलने लगे. लेकिन मैंने काम करना जारी रखा क्योंकि मुझे अपने बच्चों को पढ़ाना है. अब कंपनी प्रति डिलिवरी 30 रुपए देनी की योजना बना रही है. लेकिन मेरे खर्चे ज़्यादा हैं, पेट्रोल महंगा है. मुझे अपने बच्चों के खर्चे भी उठाने हैं. आप बताइए मैं क्या करूं?"

एक दूसरे डिलिवरी पर्सन ने कहा, "परिवार में मैं अकेला कमाने वाला हूं. मेरे पास कोई इंश्योरेंस पॉलिसी नहीं है. कंपनी ने भी हमें कोई इंश्योरेंस नहीं दिया है. अगर मेरे साथ कोई दुर्घटना हो जाती है तो बहुत मुश्किल हो जाएगा. कंपनी को इस बारे में सोचना चाहिए."

ऐप आधारित सेवा

इमेज स्रोत, Reuters

ऐप आधारित डिलिवरी भारत में हाल ही में शुरू हुई है. लेकिन कुछ वक्त में ही ये इंडस्ट्री काफी फल-फूल गई है. खाने के अलावा लोग किराने का सामाना और फर्नीचर तक डिलिवरी के ज़रिए घर मंगाने लगे हैं.

अमेज़न, फ्लिपकार्ट जैसी ऑनलाइन कंपनियों के पास डिलिवरी करने वाले लाखों कर्मचारी हैं.

एक अनुमान के मुताबिक़ भारत में हर साल 60 से 80 लाख लोग काम की तलाश में निकलते हैं. लेकिन इतनी संख्या में नौकरियां नहीं होने की वजह से वो मुश्किल परिस्थितियों में काम करने के लिए भी तैयार हो जाते हैं.

छोड़िए X पोस्ट, 3
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 3

छोड़िए X पोस्ट, 4
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 4

लाखों कर्मचारी

ज़ोमैटो के मुताबिक़ उसने डिलिवरी के काम के लिए भारत में क़रीब 15 लाख लोगों को नौकरी पर रखा है.

वहीं करीब एक लाख लोग डिलिवरी ऐप स्विगी के लिए काम कर रहे हैं.

कई कंपनियां ये जानकारी सार्वजनिक नहीं करतीं कि वो हर महीने कितना खाना या सामान डिलिवर कर रही हैं. लेकिन हाल ही में ज़ोमैटो ने एक बयान जारी कर दावा किया था कि वो हर महीने क़रीब 21 मिलियन फूड ऑर्डर डिलिवर कर रही है.

ऐप आधारित सेवा

इमेज स्रोत, AFP/getty images

हालांकि इस इंस्ट्री की कमाई का कोई आंकड़ा अबतक सामने नहीं आया है.

हालांकि स्विगी और ज़ोमैटो, दोनों ने ही इस बात से इनकार किया है कि वो अपने डिलिवरी पार्टनर्स को मुश्किल डेडलाइन देते हैं और टार्गेट पूरा ना होने पर लोगों का पैसा काट लिया जाता है.

दावा

ज़ोमैटो के एक प्रतिनिधि ने बीबीसी से कहा, "हमारे सभी डिलिवरी पार्टनर स्वतंत्र कॉन्ट्रेक्टर हैं. उनके पास विकल्प है कि वो जब चाहें और जबतक चाहें लॉग-इन कर सकते हैं. इस वक्त में वो हमारे लिए काम करते हैं. वो जब चाहें ऑफ-लाइन हो सकते हैं और ब्रेक लेकर (एक घंटा, दिन या हफ्ता) वापस आ सकते हैं. हालांकि सभी पार्टनर को सलाह दी जाती है कि वो तब ही ऑफ-लाइन हों, जब उन्हें ब्रेक की ज़रूरत हो."

दोनों ही कंपनियों ने कहा कि वो अपने डिलिवरी करने वाले कर्मचारियों को इंश्योरेंस जैसे फायदे देती हैं.

एक डिलिवरी मैन दीपक ने बताया कि ब्रेक लेने की वजह से उनका पैसा कभी नहीं काटा गया, लेकिन कंपनियों ने डिलिवरी करने वाले बहुत से लोगों को काम पर रखा हुआ है, ऐसे में उनके लिए पैसा कमाना बहुत मुश्किल है और भारत के लोग उन्हें किसी तरह की टिप भी नहीं देते.

ज़ोमैटो

इमेज स्रोत, Getty Images

उन्होंने वायरल हो रहा ये वीडियो देखा है, लेकिन वो कहते हैं कि उन्हें वीडियो में दिख रहे शख़्स से ज़रा भी सहानुभूति नहीं है.

उन्होंने कहा, "उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था. ग़लत तो ग़लत होता है. इसमें सहानुभूति की बात ही नहीं आती. अगर कोई आपको जूठा खाना देगा तो क्या आप खाओगे?"

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)