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जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने के लिए PDP, NC और कांग्रेस आएंगे साथ?
- Author, रियाज़ मसरूर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पीपल्स डेमोक्रैटिक पार्टी यानी पीडीपी के संस्थापक और सांसद मुज़फ़्फ़र हुसैन बेग की चेतावनी के एक दिन बाद पीडीपी, नेशनल कांफ़्रेंस और कांग्रेस ने पुष्टी कर दी है कि वो तीनों मिलकर जम्मू-कश्मीर में गठबंधन सरकार बनाने की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं.
दरअसल पीडीपी के नाराज़ नेता बेग ने मंगलवार को चेताया था कि अगर ये तीनों दल गठबंधन सरकार बनाते हैं तो जम्मू-कश्मीर के तीन टुकड़े हो जाएंगे.
नेशनल कांफ़्रेंस ने बेग के इस बयान की निंदा की और कहा कि कांग्रेस, पीडीपी और नेशनल कांफ़्रेंस ने जम्मू-कश्मीर पर शासन किया है और तीनों क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं.
'बेग का बयान तर्कविहीन'
नेशनल कांफ़्रेंस के वरिष्ठ नेता और पार्टी अध्यक्ष नासिर असलम वानी ने पत्रकारों से कहा, "मुझे बेग का बयान हास्यास्पद और तर्कविहीन लगा. हमारी पार्टी पूरे जम्मू-कश्मीर का नेतृत्व करती है. कांग्रेस और दूसरी पार्टियां भी करती हैं. बेग सांप्रदायिक राजनीति का खेल खेल रहे हैं और जम्मू-कश्मीर के तीन टुकड़े होने का डर दिखा रहे हैं."
वानी ने कहा कि वो इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि 'समान सोच वाली पार्टियां' जम्मू-कश्मीर को इस मुश्किल दौर से निकालने के लिए बातचीत कर रही हैं, 'हालांकि बातचीत का अबतक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है.'
तीनों पार्टियों के गठबंधन सरकार बनाने की अटकलों के बीच वानी ने कहा, "हम कहते रहे हैं कि भारत और पाकिस्तान को बातचीत बहाल करनी चाहिए. हम ये भी कहते रहे हैं कि सरकार को अलगाववादियों से बातचीत करनी चाहिए. अगर मुख्यधारा की तीन क्षेत्रीय पार्टियां आपस में बातचीत कर रही हैं, तो इसमें नुकसान क्या है."
इस साल जून में पीडीपी और बीजेपी के गठबंधन से चल रही सरकारी गिर गई थी. उसके बाद से असेंबली को कोई दूसरी सरकार बनने की उम्मीद में भंग नहीं किया गया था. तबसे सरकार बनाने की लिए चर्चाओं का दौर जारी है.
सरकार के गठन के लिए एक विकल्प सज्जाद गनी लोन के नेतृत्व में, पीडीपी-बीजेपी के विद्रोही विधायकों के समर्थन से तीसरा मोर्चा बनाने को दिया जा रहा है.
सज्जाद लोन की पार्टी पीपल्स कांफ्रेंस राज्य के विद्रोही विधायकों से समर्थन की उम्मीद कर रही है.
लेकिन एक संभावना पीडीपी-एनसी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की भी है.
बहुमत का 44 का आकड़ा
पीडीपी के पास 28 और कांग्रेस के पास 12 विधायक हैं. पीपल्स कांन्फ़्रेंस के पास दो और बीजेपी के 25 एमएलए हैं. सज्जाद लोन को बहुमत का 44 का आकड़ा पार करने के लिए एनसी, पीडीपी और कांग्रेस से विद्रोही विधायकों की मदद की ज़रूरत पड़ेगी.
पीडीपी के चार एमएलए पहले ही लोन की पार्टी से मिल चुके हैं.
मुजफ़्फ़र बेग भी जल्द ही पीपल्स कांफ़्रेंस में शामिल हो रहे हैं. बेग ने कहा, "मैं गंभीरता से तीसरे मोर्चे में शामिल होने पर विचार करूंगा. पीपल्स कांफ़्रेंस मेरे लिए घर की तरह है और सजाद लोन मेरे बेटे जैसे हैं."
दो महीने पहले पीडीपी के वरिष्ठ नेता अल्ताफ़ बुख़ारी ने कहा था कि एनसी, पीडीपी और कांग्रेस राज्य में सरकार बनाने के लिए एक साथ आ सकती हैं.
नेश्नल कांफ़्रेंस ने पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती से सीधे प्रस्ताव भी मांगा था.
मंगलवार को बेग ने पत्रकारों को बताया था कि पीडीपी-बीजेपी गठबंधन इसलिए नाकाम हुआ क्योंकि दोनों दलों में कोई एकरूपता नहीं थी.
मुजफ़्फ़र बेग ने पीडीपी, नेशनल कांफ़्रेंस और कांग्रेस के बीच होने वाले किसी भी गठबंधन को ख़तरनाक बताया. उन्होंने कहा कि इससे जम्मू और कश्मीर राज्य की तीन टुकड़े हो जाएंगे क्योंकि जम्मू और लद्दाख के लोग ऐसे किसी गठबंधन को स्वीकार नहीं करेंगे.
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