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अचानक क्यों बदल दिए गए जम्मू-कश्मीर के पुलिस प्रमुख
- Author, माजिद जहांगीर
- पदनाम, श्रीनगर से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
जम्मू-कश्मीर में गुरुवार को देर रात अचानक पुलिस प्रमुख डॉक्टर शेष पॉल वैद का तबादला करके राज्य में नए डीजीपी को तैनात किया गया. राज्य के नए डीजीपी का पद दिलबाग सिंह ने संभाला है.
दिलबाग सिंह इस समय कारागार महानिदेशक के पद पर हैं और उन्हें पूर्ण रूप से जम्मू-कश्मीर पुलिस प्रमुख का पद नहीं दिया गया है.
दिलबाग सिंह जम्मू-कश्मीर में पहले भी कई अहम पदों पर रह चुके हैं. वर्ष 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी दिलबाग सिंह जम्मू-कश्मीर में इंटेलिजेंस चीफ़ के पद पर रहने के अलावा कई दूसरे अहम पदों पर भी रहे हैं.
पुलिस प्रवक्ता की ओर से जारी एक प्रेस रिलीज़ के मुताबिक़, दिलबाग सिंह ने शुक्रवार को डीजीपी का पद संभालने के फ़ौरन बाद पुलिस अधिकारियों की एक बैठक बुलाई.
उन्होंने अधिकारयों के साथ की गई बैठक में जम्मू-कश्मीर में अमन बहाल करने पर ज़ोर दिया है. उन्होंने ये भी कहा है कि वह हमेशा पुलिस जवानों के पीछे चट्टान की तरह डटे रहेंगे.
एसपी वैद ने दिसंबर 2016 में जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी का पद संभाला था. वैद वर्ष 1986 के जम्मू-कश्मीर कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं.
अपहरण की घटनाओं के कारण हटाए गए?
पूर्व डीजीपी एसपी वैद के तबादले पर विश्लेषकों का कहना है कि वैद के अचानक तबादले के साथ कई चीज़ें जुड़ी हुई हैं.
मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि हाल ही में दक्षिणी कश्मीर में पुलिसकर्मियों के रिश्तेदारों का अपहरण भी एसपी वैद के तबादले की एक वजह रही है. हालाँकि, कई हलकों में ये भी कहा जा रहा है कि वैद के तबादले के पीछे सिर्फ़ एक ही वजह नहीं है.
कुछ दिन पहले पुलिस ने चरमपंथी संगठन हिज़बुल मुजाहिदीन के कमांडर रियाज़ नाइकू के पिता और अन्य चरमपंथियों के रिश्तेदारों को हिरासत में लिया था. इन लोगों को हिरासत में लेने के बाद हिज़बुल ने क़रीब 11 पुलिसकर्मियों के रिश्तेदारों और पुलिसकर्मियों का अपहरण किया था.
पुलिस ने अपहरण की घटनाओं के फ़ौरन बाद नाइकू के पिता को हिरासत से रिहा किया था और बदले में हिज़बुल ने भी उन सभी 11 लोगों को छोड़ दिया था जिनका अपहरण किया गया था.
उस दिन के बाद से जब ये ख़बरें मीडिया में आनी शुरू हो गईं कि वैद को डीजीपी के पद से हटाया जा रहा है तब एसपी वैद ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा कि इस तरह के तबादले मामूली बात हैं.
ऐसे समय में डीजीपी को हटाना बड़ा फ़ैसला
कश्मीर के वरिष्ठ पत्रकार और विश्लेषक खुर्शीद वानी कहते हैं कि वैद को इस तरह से हटाकर किसी दूसरे को डीजीपी बनाना एक बड़ा फ़ैसला है.
उन्होंने कहा, "ये पहली बार है जब डीजी का पद किसी को अस्थाई रूप से दिया गया है. एक तरफ़ जम्मू-कश्मीर में पंचायती और नगर पालिका चुनाव की घोषणा भी हो चुकी है. कश्मीर में चरमपंथ भी काफ़ी बढ़ गया है तो ऐसे मौके पर अचानक डीजीपी को बदलने का फ़ैसला एक बड़ा फ़ैसला है."
जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल से लेकर प्रशासन और पुलिस में लगातार तब्दीलियां हो रही हैं. विश्लेषक इन तब्दीलियों को एक साधारण तरीके से देखने को तैयार नहीं हैं.
खुर्शीद वानी मानते हैं कि ये सब बदलाव केंद्र सरकार के कहने पर हो रहे हैं.
वह कहते हैं, "चूँकि जम्मू-कश्मीर में सिविल सरकार नहीं है और ज़ाहिर है कि इन सब तब्दीलियों का फ़रमान दिल्ली से जारी किया जा रहा है. इसका मक़सद क्या है उसकी तस्वीर साफ़ नहीं है."
कहा ये भी जा रहा है कि एसपी वैद ने कई मामलों पर राज्यपाल हाउस और केंद्रीय गृह मंत्रालय के सामने अपना विरोध दर्ज किया था जिस विरोध को शायद पसंद न किया गया हो.
वानी कहते हैं कि एसपी वैद ने कई मुद्दों पर हाल ही में अपनी राय ज़ाहिर की थी जो राय राज्यपाल हाउस और दिल्ली में गृह मंत्रालय में पसंद नहीं की गई हो.
वह कहते हैं, "दरअसल हाल ही में जो आर्टिकल 35-ए के हवाले से उन्होंने बयान देकर कहा था कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को राज्य के विशेष दर्जे के हवाले से अपने-अपने विचार हैं. और जब विरोध प्रदर्शन हुए थे तो उन्होंने कहा था कि प्रदर्शन करना हर एक का हक़ है. यह भी हो सकता है कि एसपी वैद ने कुछ चीज़ें राज्यपाल हाउस और गृह मंत्रालय के साथ क़ानून के हवाले से उभारी हों. मुझे लगता है कि इस तबादले का सम्बन्ध इस बात से भी है कि राज्यपाल आवास तेज़ी के साथ चुनाव कराने का काम कर रहा है और चरमपंथ बढ़ने से भी हो सकता है."
"कश्मीर में बीते एक दशक में पहली बार 300 चरमपंथी सक्रिय हैं. मुझे लगता है कि ऐसे मामलों पर डीजीपी को वो क़ामयाबी हासिल नहीं हुई थी जो केंद्र सरकार चाहती थी. लेकिन ये सही है कि बीते दो वर्षों में वैद की चरमपंथ के ख़िलाफ़ अभियानों में काफी भूमिका रही है. लेकिन हाल ही में जो दक्षिणी कश्मीर में पुलिसकर्मियों के रिश्तेदारों का अपहरण हुआ और जिस तरीक़े से वैद ने उसको हैंडल किया, मुमकिन है कि वो पसंद न किया गया हो."
कठुआ मामले में क्राइम ब्रांच को था समर्थन
एसपी वैद के तबादले और उनके कार्यकाल पर वानी कहते हैं, "वैद के तबादले के हवाले से कई विवादित बातें कही जा रही हैं. पहली बात तो ये कि चरमपंथियों के रिश्तेदारों को छोड़ दिया गया, जो स्थिति डीजीपी के हक़ में नहीं गई. ये भी कहा जा रहा है कि कठुआ घटना पर क्राइम ब्रांच को वैद का काफ़ी समर्थन रहा. ये कहा जा सकता है कि वैद का कार्यकाल मिली-जुली गतिविधियों से भरा रहा लेकिन डीजीपी का अचानक तबादला कहीं न कहीं यहां के हालात के साथ ज़रूर जुड़ा हुआ है. ऐसे में अब, जब चुनाव की बातें राज्य में की जा रही हैं, उस हवाले से इस फ़ैसले का उसमें बड़ा दख़ल होगा."
विश्लेषक और पत्रकार अहमद अली फ़याज़ कहते हैं कि जब सरकारें बदलती हैं तो अधिकारी भी बदल जाते हैं.
वह कहते हैं कि बीजेपी और पीडीपी का गठबंधन टूटने के बाद जम्मू-कश्मीर में बहुत ही अहम पदों पर नए चेहरे लाए गए हैं.
वह कहते हैं, "महबूबा मुफ़्ती की सरकार गिरने के बाद कुछ समय तक एनएन वोहरा राज्यपाल रहे. उस दौरान राज्य में जो चीफ़ सेक्रेटरी बीबी व्यास थे उनको एडवाइजर बनाया गया और उनकी जगह ख़ाली हो गई. उनको हटाकर छत्तीसगढ़ के एक आईएएस अधिकारी को लाया गया. उन्होंने अपने हिसाब से एक नई टीम का गठन करना शुरू किया. अब जो डीजीपी का तबादला हुआ ये एक अहम पद होता है और इस सारे मामले में जो बहुत ही अहम बात है वह ये कि एसपी वैद जम्मू-कश्मीर के नागरिक हैं."
"इससे पहले भी जम्मू के प्रंचराज शर्मा चीफ़ सेक्रेटरी थे तो उनको भी हटाया गया और दिल्ली भेजा गया. अब एसपी वैद को भी बीजेपी सरकार में ही डीजीपी पद से हटाकर ट्रांसपोर्ट कमिश्नर बनाया गया. इस बात को लेकर जम्मू के कई हलकों में खासकर जो कांग्रेस के लोग हैं, वे लोगों को ये बताने की कोशिश कर रहे हैं कि बीजेपी जम्मू के हित की सुरक्षा के खोखले दावे कर रही है. इसमें भारतीय जनता पार्टी के अंदर भी रस्साकशी चल रही है. अब जो नए डीजीपी लाए गए हैं, वो भी जम्मू-कश्मीर के नागरिक नहीं हैं."
अली फ़याज़ का ये भी कहना है कि कठुआ घटना में वैद महबूबा मुफ़्ती की लाइन पर चलकर दोषियों को सख़्त सज़ा देने के हक़ में थे.
नई टीम बनाने की कोशिश?
अहमद फ़याज़ का कहना था कि महबूबा मुफ़्ती की सरकार ख़त्म होने के बाद ही राज्य में नए टीम को बनाने का सिलसिला शुरू हो चुका है.
वह कहते हैं, "इस बात में कोई शक नहीं है कि राज्यपाल सत्यपाल मालिक एक नई टीम बनाना चाहते हैं लेकिन उनके आने से पहले ही एक नया नेतृत्व बनाने का सिलसिला शुरू हुआ था. आप देख रहे हैं कि 20 जून के बाद जो हालात कश्मीर में पैदा हुए हैं, वे ये हैं कि आप के सामने नए राज्यपाल हैं, नए चीफ़ सेक्रेटरी हैं. जम्मू और कश्मीर हाईकोर्ट की नई चीफ़ जस्टिस हैं, नया चीफ़ कन्सर्वेटर ऑफ़ फॉरेस्ट लया गया है. अभी तक बीजेपी-पीडीपी की जो पॉलिसी थी उसमें कोई नई तब्दीली नहीं आई है. अब ये देखना होगा कि आगे कौन-सी तब्दीली लाई जा रही है."
एसपी वैद का चरमपंथ के खिलाफ सक्रिय रहने पर फ़याज़ कहते हैं, "एसपी वैद चरमपंथ के ख़िलाफ़ अभियानों में हमेशा आगे रहे हैं. डीजीपी बनने से पहले वह दो बार चरमपंथी हमलों में ज़ख़्मी भी हो चुके हैं. चाहे कश्मीर हो या जम्मू, वह हमेशा चरमपंथ के ख़िलाफ़ अभियानों में सक्रिय रहे हैं. चरमपंथ के ख़िलाफ़ अभियानों में उनकी जो भूमिका रही है वह बहुत ही महत्पूर्ण रही है. वो कभी चरमपंथियों के ख़िलाफ़ नरम नज़र नहीं आए हैं."
एसपी वैद ने अपने तबादले के हवाले से शुक्रवार को अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा है, "मैं ईश्वर का शुक्रिया अदा करता हूँ कि मुझे अपने लोगों और अपने देश की सेवा करने का मौक़ा दिया गया. मैं जम्मू-कश्मीर पुलिस, सुरक्षा एजेंसियों और जम्मू-कश्मीर के लोगों का शुक्रगुज़ार हूँ जिन्होंने मुझमें अपना विश्वास रखा. नए डीजीपी को मेरी तरफ से शुभकामनाएं."
जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एसपी वैद के तबादले को लेकर अपने एक ट्वीट में लिखा है, "एसपी वैद के तबादले में जल्दबाज़ी से काम नहीं लेना चाहिए था. उनकी जगह तभी किसी को लाया जा सकता था जब स्थायी तौर पर किसी को लाया जाता."
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