भीमा-कोरेगांव मामला: पुणे पुलिस ने वरवर राव को हिरासत में लिया

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सामाजिक कार्यकर्ता वरवर राव को पुणे पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. वरवर राव के परिवार ने हैदराबार में उनके घर से उन्हें हिरासत में लिए जाने की पुष्टि की है.
वरवर राव के परिवार ने बीबीसी संवाददाता दिप्ती बत्तिनी को बताया कि पुलिस ने उन्हें जानकारी दी है कि वरवर राव को रात 11.00 बजे की उड़ान से पुणे ले जाया जाएगा जहां उन्हें मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा.
इस साल 29 अगस्त से ही वरवर राव को उनके घर पर नज़रबंद कर रखा गया था.
वरवर राव के वकील ने हैदराबाद हाई कोर्ट में पुणे पुलिस द्वारा पेश की गई ट्रांज़िट वारंट को चुनौती दी थी. वकील का कहना था कि ये वारंट मराठी में था और इस कारण इसे निरस्त कर दिया जाना चाहिए.
कोर्ट ने वरवर राव के वकील की दलील को सुनने से इनकार कर दिया था जिसके बाद पुलिस ने शनिवार शाम उन्हें उनके घर से हिरासत में लिया.
वरवर राव के भतीजे वेणुगोपाल का कहना है, "ये ग़ैरक़ानूनी कदम है. शुक्रवार को कोर्ट ने इस ट्रांज़िट वारंट पर ग़ौर नहीं किया था क्योंकि इसकी अवधि ख़त्म हो गई थी. जब वारंट की अवधि ही ख़त्म हो चुकी थी तो उसके आधार पर हिरासत में कैसे लिया जा सकता है?"
"शनिवार शाम को पुणे पुलिस आई थी. ना तो उनके पास नया वारंट था ना ही हाई कोर्ट का आदेश था. उनका कहना था कि इसके लिए किसी दस्तावेज़ की ज़रूरत नहीं है. ये ग़ैरक़ानूनी काम है जो पुलिस ने किया है."

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भीमा-कोरेगांव हिंसा से जुड़ा मामला
इस साल जनवरी में महाराष्ट्र के भीमा-कोरेगांव में हुई हिंसा के मामले में पांच सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किया गया था जिनमें से एक वरवर राव भी थे.
उनके साथ सुधा भारद्वाज, गौतम नवलखा, वरनॉन गोंज़ाल्विस और अरुण फ़रेरा को देश के अलग-अलग शहरों से गिरफ़्तार किया गया था.
उनकी गिरफ्तारी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी जिसके बाद कोर्ट ने इन्हें नज़रबंद रखने का फ़ैसला सुनाया था.
जातीय अत्याचार के ख़िलाफ़ दलितों के ऐतिहासिक संघर्ष की याद में भीमा-कोरेगांव में रैली का आयोजन किया गया था.
इस रैली के आयोजन का दक्षिणपंथी धड़ा विरोध कर रहा था और बाद में दोनों समुदायों के बीच हिंसक झड़प हो गई, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी.
पुलिस ने रैली के आयोजकों के ख़िलाफ़ जांच की और कहा कि रैली में भड़काऊ भाषण के कारण हिंसा भड़की.
पुलिस का कहना था कि इनके ख़िलाफ़ संदिग्ध पत्र, ईमेल्स और दस्तावेज़ मिले जिनमें इन लोगों के माओवादियों से संबंध होने के सबूत हैं. हालांकि दूसरे पक्ष ने इन आरोपों को सिरे से ख़ारिज किया था.

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कौन हैं वरवर राव?
78 साल के वरवर पेंड्याला राव वामपंथ की तरफ़ झुकाव रखने वाले तेलुगू भाषा के कवि और लेखक हैं और 'रेवोल्यूशनरी राइटर्स असोसिएशन' के संस्थापक भी हैं.
वरवर वारंगल जिले के चिन्ना पेंड्याला गांव से ताल्लुक रखते हैं.
उन्हें आपातकाल के दौरान भी साज़िश के कई आरोपों में गिरफ़्तार किया गया था, बाद में उन्हें आरोपमुक्त करके रिहा कर दिया था.
वरवर की रामनगर और सिंकदराबाद षड्यंत्र जैसे 20 से ज़्यादा मामलों में जांच की गई थी.
उन्होंने राज्य में माओवादी हिंसा ख़त्म करने के लिए चंद्रबाबू नायडू सरकार और माओवादी नेता गुम्माडी विट्ठल राव के मिलकर मध्यस्थता की थी.
जब वाईएस राजशेखर रेड्डी सरकार ने माओवादियों ने बातचीत की, तब भी उन्होंने मध्यस्थ की भूमिका भी निभाई थी.
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