रफ़ाल मामलाः सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी, फ़ैसला सुरक्षित

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फ्रांस के साथ रफ़ाल विमान सौदे में हुए कथित भ्रष्टाचार की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग को लेकर दायर याचिकाओं पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में लंबी सुनवाई हुई.
जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में तीन जजों की बैंच ने सुनवाई पूरी करके अपना फ़ैसला सुरक्षित कर लिया है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक अदालत ने कहा, "हमें फ़ैसला लेना है कि क्या क़ीमत से जुड़े तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए या नहीं."
साढ़े तीन घंटे से अधिक चली सुनवाई में याचिकाकर्ताओं और सरकार की ओर से भारत के महाधिवक्ता केके वेणुगोपाल ने पक्ष रखा.
सौदे से जुड़े तकनीकी सवालों पर जवाब देने के लिए भारतीय वायुसेना और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को भी बुलाया गया.
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से महाधिवक्ता केके वेणुगोपाल ने कहा, "क्या अदालत इसकी न्यायिक समीक्षा करने में सक्षम है?"
उन्होंने कहा, "ये विशेषज्ञों का काम है... हम कहते रहे हैं कि संसद को भी विमानों की पूरी क़ीमत के बारे में नहीं बताया गया है."
गोपनीयता का समझौता
वेणुगोपाल ने बैंच से ये भी कहा कि अगर विमानों में लैस किए जाने वाले हथियारों और अन्य तकनीकी चीज़ों के बारे में जानकारियां सार्वजनिक की गईं तो दुश्मन इसका फ़ायदा उठा सकते हैं.
सरकार की ओर से अदालत में ये भी कहा गया कि वो क़ीमतें सार्वजनिक करके फ़्रांस के साथ हुए समझौते का उल्लंघन नहीं करना चाहती है.
वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता और याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार गोपनीय समझौते के पीछे छुप रही है.
वहीं डिप्टी चीफ़ ऑफ़ एयर स्टाफ़ एयर मार्शल वीआर चौधरी और दो अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने अदालत को बताया कि भारतीय वायुसेना में साल 1985 के बाद से नए लड़ाकू विमान शामिल नहीं किए गए हैं.
भारत सरकार ने सोमवार को सीलबंद लिफ़ाफों में रफ़ाल विमानों के दाम से जुड़ी जानकारियां अदालत को दी थीं.
हल्के पुल्के पल
अदालत में सुनवाई के दौरान कई हल्के फुल्के पल भी आए.
महाधिवक्ता ने अदालत से कहा, "कारगिल युद्ध में हमारे सैनिक मारे गए. अगर तब हमारे पास रफ़ाल विमान होते तो हमने कुछ ज़िंदग़ियां बचा ली होतीं. उन्होंने 60 किलोमीटर तक मार की होती."
इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "श्रीमान महाधिवक्ता, कारगिल युद्ध 1999-2000 में हुआ था और रफ़ाल विमान का अस्तित्व में 2014 में आए हैं."
इस पर महाधिवक्ता ने मुस्कुराते हुए कहा कि मैं परिकल्पना कर रहा था.
कोई नोटिस नहीं
पत्रकार सुचित्रा मोहंती के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने आज सुनवाई के दौरान कोई नोटिस किसी पक्ष को नहीं दिया है. मोहंती के मुताबिक याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण ने अदालत से कहा कि ये सौदा करने में सरकार ने विशेषज्ञों की सलाह नहीं ली है और डीएससी यानी डिफ़ेंस सलेक्ट कमिटि की राय भी नहीं ली गई है.

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भारत ने फ़्रांस के साथ 36 रफ़ाल विमानों की ख़रीद का सौदा किया है. रफ़ाल विमान निर्माता कंपनी दासो एविएशन ने भारतीय कंपनी रिलायंस डिफ़ेंस को इस समझौते में ऑफ़शोर पार्टनर चुना है.
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का आरोप है कि भारत सरकार ने रक्षा निर्माण के क्षेत्र में कोई अनुभव न रखने वाली रिलायंस कंपनी को फ़ायदा पहुंचाया है.
वहीं दासो के सीईओ एरिक ट्रेपियर ने भ्रष्टाचार के सभी आरोपों को नकारा है. भारत सरकार भी सभी आरोपों को नकारती रही है और कहती रही है कि इन विमानों की ख़रीद से भारत की सुरक्षा व्यवस्था मज़बूत हुई है.
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