व्यंग्यः भक्तों की 'बाबा' पर मोनोपोली तोड़ते राहुल 'बाबा'

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- Author, सुधीश पचौरी
- पदनाम, वरिष्ठ लेखक, बीबीसी हिंदी के लिए
कहते हैं कि जब बाबा बुलाते हैं तभी भक्त जाता है. इस बार बाबा ने राहुल 'बाबा को बुला लिया है और वे कैलाश मानसरोवर के लिए निकल गए हैं.
बाबा 'बाबा' हैं. मूड के मालिक हैं. जहां मन आया तहां जम गए. पता नहीं कब से कैलाश में अकेले बैठे हैं और भक्तों की एप्लिकेशनों को देख-छांट कर साल में एक बार बुलाते हैं कि आ जाओ!
जिसे बाबा का बुलावा आ जाता है, वही एंट्री पाता है वरना किसी की क्या मजाल कि बाबा के तप को भंग करे?

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और बाबा की माया कि बैठे भी ऐसी जगह हैं कि किसी को दर्शन करने जाना पड़े तो उसे चीन से ओके लेना होता है, तभी जा पाता है.
लेकिन अगर बाबा बुला लें तो चीन क्या, कोई ट्रंप तक दर्शनार्थी को रोक सकता! बाबा के आदेश पर चीन भी सरेंडर कर देता है और जाने वाले को ओके कर देता है.
बाबा की कृपा
बाबा की सरकार हमारी सरकार से बडी है! दुनिया में उन्हीं की चलती है. वरना अपनी सरकार इतने दिन से चीन से प्रार्थना न करती रहती कि नाथुला पास को खोल दो प्लीज़. कुछ भक्त कैलाश जाना चाहते हैं लेकिन चीन ने लटकाए रखा और जब ओके दिया, तरसा-तरसा कर दिया.
इस बार बाबा को राहुल बाबा की भक्ति जेनुइन लगी है. बाबा राहुल की भक्ति का मर्म समझने लगे हैं. राहुल ने ओपनली कहा है कि वे परम शिवभक्त हैं और कुछ अहंकारी लोगों ने इस बात पर उनकी खिल्ली भी उडाई है. बाबा ठहरे अंतर्यामी! सब देखते, समझते हैं.
राहुल बाबा ने अपने जनेऊ को दिखाकर कहा होगा कि बाबा अब तो दर्शन करा दो और बाबा खुश हो गए होंगे कि ये नटखट भी दीवाना है, बार-बार मार खाता है फिर भी मेरा ध्यान नहीं छोडता, इसे बुला लो और बुला लिया.
ईर्ष्यालु भक्त
बाबा की कृपा हुई और देखते-देखते राहुल चीन के रास्ते कैलाश मानसरोवर के लिए निकल लिए लेकिन कलयुग की बलिहारी कि राहुल के कैलाश मानसरोवर जाने की मामूली सी बात पर भी हिंदू धर्म के कुछ स्वतः नियुक्त रक्षक जल भुन गए. एक प्रवक्ता तो राहुल की यात्रा का मज़ाक तक उड़ाने लगे कि राहुल लगता है चीनी गांधी हो गए हैं, चीनी मार्ग से गए हैं.
हाय ये कैसे भक्त हैं कि दूसरे भक्त से जले जा रहे हैं. असली भक्त वो होता है जो स्वयं तो भक्त होता ही है, दूसरों को भी प्यार से भक्त बनाता है लेकिन आज के कुछ भक्त ऐसे जलोकडे हैं कि बाबा पर अपनी 'मोनोपोली' समझते हैं.
असली भक्त मोह माया से, ईर्ष्या-द्वेष से दूर रहते हैं. हमारी नज़र में राहुल ही सच्चे भक्त ठहरते हैं. वे किसी के कहीं जाने से नहीं जलते!
और शिव जी की लीला तो देखिए कि एक ही समय में देश के सत्ता और विपक्ष के दोनों बडे नेता शिव के चरणों में नतमस्तक हो रहे हैं. इधर अपने पीएम जी पशुपतिनाथ के दर्शन कर रहे हैं तो उधर विपक्ष के नेता राहुल कैलास मानसरोवर स्थित बाबा के दर्शन करने जा रहे हैं.
सब बाबा का जलवा है! एक को नेपाल बुलाया तो दूसरे को कैलाश बुला लिया और दोनों लाइन हाजिर!
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'कृपा मिलती है शर्तों के साथ'
बाबा ठहरे अवढर दानी! जिसने भी सच्चे मन से कुछ मांगा वो तुरंत दिया! मन के मौजी हैं. भोले भंडारी हैं. जरा सी बात पर प्रसन्न हो जाते हैं. रावण जैसे अहंकारी से प्रसन्न हुए तो तीनों लोक तो दिए ही साथ में अमरता का वरदान भी दे दिया.
बाबा रावण का चरित्र जानते थे लेकिन उसकी भक्ति के आगे लाचार थे. वो एक टांग पर बरसों खड़ा रहता. बार-बार अपने सिर को काटकर चढ़ाता रहता. बाबा क्या करते? आशीर्वाद दे दिए कि जा अमर रह लेकिन कंडीशन एप्लाइड! रावण ने वरदान तो सुना लेकिन कंडीशन पर ध्यान नहीं दिया.
उस जैसे अंहकारी ने अपने को कंडीशन से उपर समझ लिया और लगा अत्याचार करने. वंचित और दरिद्र लोग त्राहि-त्राहि करने लगे. यही नहीं, वह भगवान राम की पत्नी सीता माता तक का हरण कर लाया. उसकी पत्नी मंदोदरी ने लाख समझाया कि हे कंत! जनता पर अत्याचार न करो, सीता माता को लौटा दो. तुम राम के प्रताप को नहीं जानते. वे वनवासी नहीं हैं, शिव के परमभक्त हैं. ईश्वर के साक्षात् अवतार हैं. जनता उनके साथ है, मान जाओ! लेकिन अंहकारी रावण एक न माना.
बाबा तो सब देख रहे थे. जब वो हद से गुजर गया तो बाबा ने 'कंडीशन एप्लाई' वाला बटन दबा दिया. भगवान राम आए और रावण का खेल ख़त्म हो गया.
ऐसे हैं बाबा भोलेनाथ. जब किसी अहंकारी को देख क्रोध आता है तो तांडव कर देते हैं. सब कुछ ख़त्म हो जाता है.
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प्रेम के भूखे हैं बाबा
बाबा को तो सिर्फ़ प्रेम ही प्यारा है. अहंकार घृणा मान मत्सर माया मोह कुछ भी पसंद नहीं. इसीलिए तो सारी दुनिया छोड़, कैलाश में आकर धूनी रमाए. इसीलिए उनको वही प्यारा है जिसमें अहंकार नहीं, माया मोह नहीं. जो माया मोह का त्याग कर चुका है, जो अंहकार का त्याग कर सकता है, उसी पर भोले बाबा कृपा करते हैं.
अब देखते हैं कि राहुल बाबा से बाबा क्या बात करते हैं और राहुल उनसे क्या मांगते हैं. तय मानिए, राहुल पर भाजपा के जासूस कैमरे अवश्य लगे रहेंगे कि बाबा ने क्या दिया. कान में यह तो नही कह डाला कि जा, अपनी प्रजा की देखभाल कर. बेचारी नोटबंदी और जीएसटी से परेशान है.
बाबा बाबा हैं! क्या पता किस बात पर ख़ुश होकर राहुल को क्या दे बैठें.
बाबा बाबा हैं! जो कह देते हैं, वही होता है. अगर बाबा ने ऐसा कह दिया तो वो ग़ज़ब होगा जो अब तक नहीं हुआ.
क्या पता बाबा सत्ता के अहंकार में चूर भक्तों से नाराज़ हो चुके हों और सोचते हों कि क्या इसीलिए ये मेरी भक्ति करते थे? ये इतने अंहकारी कैसे हो गए कि अब किसी की सुनते तक नहीं!
कहीं इसी बात पर कुपित हेकर वे राहुल पर कृपा न कर बैठें!
शायद इसीलिए विघ्न संतोषी अभी से राहुल बाबा के पीछे पड़ गए हैं कि वो चीनी रास्ते से क्यों गए. अरे भैया, बाबा बुलाएं तो रास्ता भी तो बाबा ही तय करते हैं. आज तुम उन्हीं की अथॉरिटी को चैलेंज कर रहे हो?
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क्या करेंगे बाबा?
मुझे तो लगता है कि चीन भी बाबा का हुकुम मानता है. सरकार इतने दिन नाथू ला पास का रास्ता मांगती रही, चीन आनाकानी करता रहा. लेकिन राहुल ने ज्यों ही दर्शन की इच्छा की, बाबा ने चीन से ओके दिलवा दिया!
ये कैसे भक्त हैं जो अपनी भक्ति पर तो इतराते हैं और राहुल भक्ति करें तो मज़ाक उडाते हैं. देखना, एक दिन डोकलाम का केस भी बाबा ही सॉल्व करेंगे और क्या पता राहुल को लाइन भी सुझा दें.
मुझे तो पूरा यकीन है कि इस बार बाबा राहुल की भक्ति से प्रसन्न है तभी रास्ता दिया है.
भादों के इस पावन महीने में देखना है कि बाबा राहुल के कान में कौन सा मंत्र फूकते हैं. उनसे जलने वाले इस पर भी इल्ज़ाम लगाएंगे कि बाबा को राहुल ने पटा लिया. कहीं इसमें भी कोई स्कैम नहीं है?
लेकिन कोई क्या कर सकता है. कहा ही है- 'जाकी रही भावना जैसी!'



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