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बिहार की 'पॉलिटिकल खीर' से किसका मुंह मीठा करना चाहते हैं उपेंद्र कुशवाहा
- Author, मनीष शांडिल्य
- पदनाम, पटना से, बीबीसी हिंदी के लिए
केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने शनिवार को एक पॉलिटिकल खीर बनाने का नया फॉर्मूला दिया. आज इस बयान को आगे बढ़ाते हुए राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि इस तरह की खीर की ज़रूरत है.
शनिवार को पिछड़ों के मसीहा कहे जाने वाले बीपी मंडल की जयंती थी. राजनीतिक दलों की बात करें तो सबसे बड़ा आयोजन, केंद्र और बिहार में सत्तारूढ़ एनडीए के घटक दल राष्ट्रीय लोक समता पार्टी ने किया.
पटना के एसकेएम हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने पिछड़ों की व्यापक एकता की ज़रूरत को रोचक अंदाज़ में सामने रखा.
उन्होंने कहा, ''यदुवंशियों (यादव समाज) का दूध और कुशवंशी (कुशवाहा समाज) के चावल मिल जाएं तो खीर बनने में कोई दिक्कत नहीं होगी. खीर मतलब सबसे स्वादिष्ट व्यंजन. अब इस स्वादिष्ट व्यंजन को बनने से कोई रोक नहीं सकता है. लेकिन इसमें सिर्फ़ दूध और चावल से ही काम नहीं चलने वाला है, इसमें पंचमेवा की भी ज़रूरत पड़ती है. और उस पंचमेवा के लिए बीपी मंडल के इलाके में एक प्रचलित शब्द है- पंचफोरना. इसमें अतिपिछड़ा समाज के लोग, छोटी-छोटी संख्या वाली जातियों के लोग और शोषित-पीड़ित शामिल हैं. खीर को स्वादिष्ट बनाने के लिए उनके घर का पंचमेवा आवश्यक है.''
तेजस्वी ने किया समर्थन
उपेंद्र कुशवाहा के इस बयान को उनके राजद की अगुवाई वाले महागठबंधन के साथ जाने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है. राजद पहले भी कुशवाहा को महागठबंधन में शामिल होने का न्यौता देता रहा है.
दरअसल, उपेंद्र कुशवाहा ने कल अपने बयान में जिन यदुवंशियों का जिक्र किया, एक जाति के रूप में बिहार में उनकी आबादी सबसे ज़्यादा है. पिछड़े वर्ग की जातियों में उनके बाद 'कुशवंशियों' की आबादी है.
माना जाता है कि अभी के दौर में यादव समाज का बड़ा हिस्सा राजद के साथ है जबकि उपेंद्र कुशवाहा समाज के एक बड़े नेता माने जाते हैं.
अनुमान के मुताबिक ये दोनों जातियां कुल मिलाकर बिहार की आबादी का करीब 20 फ़ीसदी हैं और इनका किसी एक गठबंधन में होना उसकी जीत की संभावनाओं को काफ़ी बढ़ा देता है.
कुशवाहा के कल के बयान का राजद नेता तेजस्वी यादव ने समर्थन किया है. उन्होंने ट्वीट किया, ''निःसंदेह उपेन्द्र जी, स्वादिष्ट और पौष्टिक खीर श्रमशील लोगों की ज़रूरत है. पंचमेवा के स्वास्थ्यवर्धक गुण ना केवल शरीर बल्कि स्वस्थ समतामूलक समाज के निर्माण में भी ऊर्जा देते हैं. प्रेमभाव से बनाई गई खीर में पौष्टिकता, स्वाद और ऊर्जा की भरपूर मात्रा होती है. यह एक अच्छा व्यंजन है.''
"दूध पर ज्यादा अधिकार अब भाजपा का"
उपेंद्र कुशवाहा और उनकी पार्टी ने पहले भी कई मौकों पर बिहार की नीतीश सरकार की आलोचना की है. इतना ही नहीं उपेंद्र ख़ुद को इशारे-इशारे में मुख्यमंत्री पद का दावेदार भी बता चुके हैं.
इसके बावजूद उपेंद्र कुशवाहा के कल के बयान पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहनवाज़ हुसैन का कहना है कि एनडीए एकजुट है.
शहनवाज़ ने बीबीसी से बातचीत में कहा, ''उपेंद्र जी ने सही तो कहा है. उपेंद्र जी को पता है कि भूपेंद्र यादव, नित्यानंद राय, रामकृपाल यादव, नंदकिशोर यादव और उपेंद्र कुशवाहा जी का चावल मिलेगा. खीर तो बनी हुई है पहले से. वही विकास की खीर है जिसे देश के लोग खा रहे हैं. दूध पर अधिकार अब किसी एक पार्टी का नहीं रह गया है. दूध पर ज़्यादा अधिकार अब भारतीय जनता पार्टी का है. बिहार में एनडीए के चारों दल मिल कर लोकसभा चुनाव लड़ेंगे.''
वहीं जानकारों का मानना है कि चुनावी साल में ऐसे बयान आते रहते हैं और अंतिम समय में कौन कहां जाएगा, यह अभी पूरे दावे के साथ नहीं कहा जा सकता. वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार कुशवाहा के बयान को एक रणनीतिक बयान की तरह देखते हैं.
उन्होंने कहा, "पहले भी ऐसे हालात सामने आए हैं जब ये लगा कि उपेंद्र महागठबंधन में जा सकते हैं. हालांकि उन्होंने बार-बार इससे इनकार किया है. अभी फिर से उनका जो बयान आया है और जिस तरह से तेजस्वी ने इसका समर्थन किया है, उससे इन कयासों को बल मिला है कि वह एनडीए छोड़ सकते हैं."
अजय कहते हैं, "उपेंद्र कुशवाहा का एनडीए में बना रहना इस पर निर्भर करेगा कि भाजपा अपने घटक दलों के साथ किस तरह से सीटों का बंटवारा कर पाती है. उनके नए साथी नीतीश कुमार की चाहत है कि उन्हें ज्यादा सीटें मिलें. ये एक मसला बना हुआ है. नीतीश कुमार ने कहा भी था कि एक महीने के भीतर भाजपा की ओर से सीट बंटवारे का प्रस्ताव आ जाएगा. लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो पाया है.''
माना जाता है कि बीते साल नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के एनडीए में शामिल होने के बाद से ही कुशवाहा इस गठबंधन में सहज नहीं हैं. कुशवाहा लोकसभा चुनावों को लेकर अपनी रणनीति धीरे-धीरे सामने रख रहे हैं. वह एनडीए और महागठबंधन पर एक साथ निशाना साध रहे हैं. साथ ही जानकार यह भी मानते हैं कि उपेंद्र जिस भी गठबंधन में रहेंगे उसकी राजनीतिक खीर ज़्यादा स्वादिष्ट और मीठी होगी.
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