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BBC EXCLUSIVE: 'नीतीश ख़ुद ही मुख्यमंत्री पद का दावा छोड़ देंगे'
- Author, प्रदीप कुमार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
नरेंद्र मोदी सरकार में मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की राजनीति को लेकर इन दिनों चर्चाओं का बाज़ार गर्म है.
उनके बारे में कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार के एनडीए खेमे में वापसी से वे नाराज़ हैं और 2019 से पहले एनडीए का साथ छोड़ सकते हैं.
लेकिन उपेंद्र कुशवाहा ने बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में इन कयासों को बेबुनियाद बताते हुए नीतीश कुमार से किसी कठिनाई के नहीं होने की बात कही है.
पिछले दिनों ये चर्चा होती रही है कि आप मौजूदा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में असहज महसूस कर रहे हैं?
कयास लगाने वाले लगाते थे, हमारी ओर से ऐसी कोई बात नहीं है. कयासों पर हमारी क्या टिप्पणी हो सकती है. हम एनडीए में हैं, हमने हमेशा यही कहा है और एनडीए में आगे भी रहेंगे.
ऐसे में 2019 के चुनाव में बिहार में सीटों का बंटवारा किस तरह से होगा और आपकी दावेदारी कितनी सीटों की होगी.
देखिए सीटों के बंटवारा कैसे होगा, ये एनडीए के नेता आपस में बैठकर तय करेंगे, कितनी सीटों की दावेदारी होगी, इस पर उस बैठक में चर्चा होगी, मीडिया में अभी इसकी बात नहीं हो सकती है.
लेकिन नीतीश जी के एनडीए खेमे में वापस आने के बाद ये माना जा रहा है कि सहयोगी दलों को कुछ समझौता करना पड़ सकता है, यानी कम सीटों पर चुनाव लड़ना पड़ सकता है, आपके एक सांसद भी साथ छोड़ गए हैं. ऐसे में आप बहुत मज़बूती से अपनी बात नहीं रख पाएंगे.
एनडीए नेताओं की मीटिंग में जब बात होगी, उसमें हम अपनी बात रखेंगे. किस रूप में अपनी बात रखेंगे, ये उस वक्त की बात होगी. जब बात होगी, ये तबकी बात है. इसलिए बाहर से ये कहना कि हम मज़बूती से बात नहीं रख पाएंगे, ये सही नहीं है.
नीतीश जी को लेकर आपका स्टैंड क्या है, उनसे आपको कोई मुश्किल है या आप असहज हैं उनसे. हालांकि उनसे आप मिलते भी रहे हैं, तो उनसे आपकी केमिस्ट्री कैसी है.
देखिए नीतीश कुमार जी और लालू यादव जी एक साथ हो सकते हैं, ये किसी ने सोचा भी नहीं था. जब हमलोग नीतीश जी के नेतृत्व में समता पार्टी चला रहे थे, तब नीतीश कुमार के नेतृत्व में पूरी की पूरी राजनीति लालू जी की राजनीति के ख़िलाफ़ वाली राजनीति थी. लेकिन दोनों एक हो गए या नहीं.
इसलिए राजनीति में किसी अंदाज़ के आधार पर कह देना कि कोई दो व्यक्ति एक साथ नहीं हो सकते, ठीक नहीं है. मेरे बारे में ये कहना कि नीतीश जी के साथ मैं सहज नहीं हूं, ये बिलकुल ग़लत है. मैं बिलकुल सहज हूं. कहीं कोई कठिनाई नहीं है.
इसका मतलब ये है कि लालू जी की पार्टी से आपको आए दिन जो ऑफ़र मिल रहे हैं, तेजस्वी बार बार कह रहे हैं कि आपको साथ आना है, आ जाएंगे, इसका कोई भविष्य नहीं है.
बिलकुल कोई भविष्य नहीं है. विपक्ष के लोग जो भी बात बोल रहे हैं, उनका मेरे लिए कोई राजनीतिक महत्व नहीं है.
लेकिन लालू जी जब एम्स में आए तो उनसे सबसे पहले मिलने वाले एनडीए नेताओं में आप थे. आपकी उनसे बात भी होती रहती है, तो राजनीतिक बात नहीं होती?
नीतीश कुमार जी ने भी उनको फ़ोन किया है, तबियत के बारे में उन्होंने जानकारी ली. एम्स में इलाज के लिए वे आए थे, हम दिल्ली में थे, तो स्वास्थ्य के बारे में जानकारी लेने के लिए शिष्टता के चलते मैं गया था, उसमें कोई राजनीतिक बात नहीं थी.
आपने हाल ही में कहा कि 2020 में बिहार विधानसभा चुनाव तक नीतीश जी को मुख्यमंत्री पद की दावेदारी छोड़ देनी चाहिए.
हमने कहा ज़रूर है, लेकिन किसी दूसरे अर्थ में कहा है. नीतीश जी मुख्यमंत्री के तौर पर कार्यकाल पूरा होने पर 15 साल पूरा करेंगे. उनका जो खुद का व्यक्तित्व है, जिसे हम नज़दीक से जानते हैं, उसके आधार पर हमने कहा कि मुझे लगता है कि नीतीश जी खुद ही मुख्यमंत्री पद का दावा छोड़ देंगे.
इसमें राजनीति की बात नहीं है, ये जितना मैं उन्हें जानता हूं, उसके आधार पर मेरा मानना है.
अगर नीतीश मुख्यमंत्री पद का दावा छोड़ देते हैं तो बिहार में मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा.
कोई भी हो सकता है. कौन होगा, ये तय करने वाली एजेंसी तो हम हैं नहीं. ये बिहार की जनता तय करेगी या गठबंधन दल के नेता आपस में मिलकर तय करेंगे.
आप भी हो सकते हैं?
मैं कह रहा हूं कोई भी हो सकता है.
तेजस्वी यादव भी हो सकते हैं?
कोई होगा लेकिन वो तो एनडीए की ओर से होगा ना. उनकी कहां कोई गुंजाइश है.
यानी एनडीए 2020 में बिहार में जीत हासिल करेगी?
बिलकुल करेगी.
(मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा से बातचीत की दूसरी कड़ी में पढ़िए आरक्षण और एससी-एसटी एक्ट में हुए बदलाव की कोशिश और साथ में बात होगी प्रधानमंत्री की चिंताओं पर.)
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