अटल बिहारी वाजपेयी की श्रद्धांजलि सभा में ग़ुलाम नबी आज़ाद और नरेंद्र मोदी के मीठे वार

ग़ुलाम नबी आज़ाद

इमेज स्रोत, Getty Images

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के चार दिन बाद सोमवार को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया.

इस सभा में कई दलों के नेता जुटे. श्रद्धांजलि सभा की शुरुआत पीएम मोदी ने की और अटल बिहारी वाजपेयी के साथ की अपनी यादों को साझा किया. इसके साथ ही राज्यसभा में विपक्ष के नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने भी अपनी यादों का ज़िक्र किया. मोदी और ग़ुलाम नबी आज़ाद ने बातों ही बातों में अटल के बहाने एक दूसरे पर निशाना भी साधा.

मोदी ने कहा कि देश की राजनीति के लंबे कालखंड में राजनीतिक छुआछूत का माहौल रहा है और उसकी चपेट में अटल बिहारी वाजपेयी भी आए. श्रद्धांजलि सभा में जब ग़ुलाम नबी आज़ाद बोलने गए तो उन्होंने भी मौक़ा नहीं चुका और कहा कि अटल बिहारी के वक़्त में विपक्ष और सत्ता पक्ष में इतनी दूरियां नहीं थीं.

ग़ुलाम नबी आज़ाद ने अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि 'अटल बिहारी वाजपेयी तीखी बात भी इस सलीके से कहते थे कि बुरा नहीं लगता था.' आज़ाद ने पीएम मोदी की मौजूदगी में कहा कि पहले विपक्ष और सत्ता पक्ष में ऐसी दूरियां नहीं थीं.

छोड़िए X पोस्ट, 1
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 1

ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि यह श्रद्धांजलि सभा ऐसी है जिसमें सभी दलों के लोग हैं. आज़ाद ने कहा, ''अटल जैसे सबको साथ लेकर चलते थे उसी तरह मरने के बाद भी सबको साथ लाने में सक्षम रहे. बहुत कम लोग होते हैं जो मरने के बाद भी दूरियों को कम करते हैं. जब मैं स्टूडेंट था तो अटल और आडवाणी साल में एक दो सभा जम्मू में ज़रूर करते थे. अपनी पार्टी से अलग अगर किसी का भाषण सुनता था तो अटल जी का ज़रूर सुनता था.''

उन्होंने कहा, ''उनका अंदाज़ अलग था. ग़ालिब ने अपने एक शेर में कहा था- होंठ इतने मीठे हैं कि उससे गालियां भी निकलती हैं को मीठी लगती हैं. अटल बिहारी वाजपेयी ऐसे ही थे. वो संसद के भीतर और बाहर भी ऐसा ही करते थे. पार्टियां अलग, विचारधारा अलग पर आज जो दूरियां हैं वो पहले नहीं थीं. जितना मैं उन्हें समझता हूं उतना उनकी पार्टी के लोग भी नहीं समझते होंगे. इस देश में कई महापुरुष पैदा हुए पर अटल बिहारी वाजपेयी का भी नाम हमेशा याद रहेगा.''

छोड़िए X पोस्ट, 2
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 2

परमाणु परीक्षण का साहस

आज़ाद से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने अटल बिहारी को याद करते हुए कहा था, ''जीवन सच्चे अर्थ में वो ही जी सकता है जो पल को जीना जानता है. अटल जी ने पल-पल को जिया और पूरे जीवन को खपा दिया. वो सामान्य लोगों की अरमानों के लिए ज़िंदा रहे. देश की राजनीति का एक लंबा कालखंड छुआछूत का रहा है. अपमानित करने के प्रयास होते थे. उपेक्षा, उपहास और अपमान को झेलते हुए अटल जी ने अपनी सेवा दी.''

मोदी ने कहा, ''शून्य से सृष्टि का निर्माण कैसे होता है इसे अटल जी ने साबित किया. इतने लंबे समय तक विपक्ष में रहते हुए विचारधारा की राजनीति की. उनके व्यवहार में भी अटल भाव नज़र आता है. सारी दुनिया के लिए भारत का परमाणु परीक्षण चौंकाने वाला था. इसकी तैयारी दशकों से थी, लेकिन निर्णय अटल जी ने लिया. परमाणु परीक्षण के बाद पूरी दुनिया ख़िलाफ़ हो गई, लेकिन ये अटल जी ही थे जिन्होंने हिम्मत दिखाई.''

छोड़िए X पोस्ट, 3
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 3

प्रधानमंत्री ने कहा, ''आज उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ या झारखंड इस बात के गवाह हैं कि राज्य का विभाजन कैसे होता है. इसे उन्होंने साबित किया. छुआछूत के शिकार अटल जी ने पहली बार सरकार बनाई. 13 दिन तक ही चली. कोई साथ आने को तैयार नहीं था. उन्हें अपने आप पर भरोसा था. वे अटके नहीं, रुके नहीं. भारत जैसे देश में छोटे दलों को साथ लेकर चलाने का सफल प्रयोग अटल जी ने ही किया. विदेशी संबंधों के मुद्दे पर उन्होंने पूरी बहस को बदल दिया.''

अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा, ''10 साल तक जो महापुरुष गुमनाम ज़िंदगी जी रहा था उसकी विदाई में देशवासियों ने जैसी श्रद्धा दिखाई वो अपने आप में उनकी महानता के सबूत हैं. मैं शब्दों को ज़रिए कोई श्रद्धांजलि नहीं दे पाऊंगा. एशियाई खेल में बजरंग पुनिया को गोल्ड मेडल मिला तो उसने कहा कि उसका ये गोल्ड मेडल अटल जी को समर्पित है. मैं समझता हूं कि इससे बड़ी ज़िंदगी की ऊंचाई और सफलता नहीं हो सकती.

छोड़िए X पोस्ट, 4
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 4

अटल के सहयात्री रहे आडवाणी का दुख

इस सभा को अटल जी के सबसे क़रीबी और लंबे समय तक सहयोगी रहे लालकृषण आडवाणी ने भी संबोधित किया. आडवाणी ने भावुक आवाज़ में अपनी कई यादों को साझा किया. उन्होंने कहा, ''जीवन में बड़ी सभाएं संबोधित की हैं, लेकिन मैंने कल्पना नहीं की थी कि आज जैसी सभा भी संबोधित करनी पड़ेगी. बिना अटल की मौजूदगी वाली सभा को संबोधित करना मेरे लिए हमेशा से कष्टकारी रहा है.''

आडवाणी ने कहा, ''अटल जी कहते थे कि वो कितने दिन ज़िंदा रहेंगे. जब वो ऐसा कहते थे तो तकलीफ़ होती थी. मैंने अपनी आत्मकथा लिखी तो उसमें अटल जी का भी उल्लेख था. किताब के विमोचन में अटल जी नहीं आए तो दुख हुआ. मुझे मन में बहुत कष्ट हुआ था. आज स्वयं अटल जी मौजूद नहीं है. आज की सभा में अटल जी के साथ काम करने वाले ही लोग नहीं हैं बल्कि दूसरे दल के नेता भी मौजूद हैं और मैं इससे बहुत ख़ुश हूं.''

छोड़िए X पोस्ट, 5
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 5

आडवाणी ने कहा, ''मेरी मित्रता अटल जी से 65 सालों से रही है. इतने सालों तक मैंने उन्हें नज़दीक से देखा है. उनके साथ मेरे कई अनुभव हैं. सिनेमा साथ देखते थे. किताबें साथ पढ़ते थे. अटल जी की विशेषताओं में ये भी थी कि वो बढ़िया भोजन बनाते थे. उनके साथ रहने का यह अनुभव है. वो खिचड़ी भी अच्छी बनाते थे.''

आडवाणी के बाद राजनाथ सिंह, सतीश मिश्रा, राम विलास पासवान, डी राजा जैसे नेताओं ने भी अटल बिहारी वाजपेयी के साथ अपने अनुभव याद किए.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)