भारत की दो लड़कियां स्पोर्ट्स प्लेन 'माही' से लगाएंगी दुनिया का चक्कर

लड़कियां, उड़ान

इमेज स्रोत, Social Access Communication Pvt Ltd

इमेज कैप्शन, आरोही पंडित (बाएं) और कीथियर मिस्क्विटा
    • Author, सरोज सिंह
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

"तुम पंख हो, तुम आकाश बनो, तुम उड़ चलो

तुम कल नहीं, तुम आज बनो, तुम उड़ चलो"

होठों पर यही गाना गुनगुनाते हुए दो लड़कियां, 23 साल की कीथियर मिस्क्विटा और 21 साल की आरोही पंडित निकल पड़ी हैं दुनिया की सैर पर. पंजाब के पटियाला एयर बेस से इन लड़कियों ने रविवार को उड़ान भरी.

अमूमन लोग ज़मीन से आसमान की ओर देखकर आकाशगंगा की परिकल्पना करते हैं. लेकिन 20 साल की ये दोनों लड़कियां आसमान से धरती को समझने की कोशिश पर निकली हैं, वो भी सिर्फ़ सौ दिनों में.

आरोही और कीथियर इस सफ़र को लाइट स्पोर्ट्स एयरक्राफ़्ट में पूरा करेंगी. इस दौरान कई जगहों पर वो रुकेंगी भी, जहां ग्राउंड स्टॉफ़ उनके रहने से लेकर फ़्लाइट पार्किंग और आगे के रूट भी तय करेंगें.

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सबसे ख़ास बात ये कि पूरे ग्रांउड स्टॉफ़ में सिर्फ लड़कियां ही होंगी.

अगर सब कुछ ठीक रहा - तो इनका नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज़ हो जाएगा. ऐसा इसलिए क्योंकि धरती का चक्कर लाइट स्पोर्ट्स एयरक्राफ़्ट से पूरा करने वाली ये पहली भारतीय लड़कियां होंगी.

भारत में आज तक ऐसा करने का न तो किसी ने पहले कभी सोचा और न ही कभी इसे अंजाम दिया.

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क्या है माही?

इन लड़कियों ने अपने स्पोर्ट्स एयरक्राफ़्ट को एक नाम भी दिया है - माही.

आख़िर अपने एयरक्राफ़्ट का नाम लड़कियों ने माही क्यों रखा, क्या वो क्रिकेटर धोनी से प्रभावित हैं - इस पर इस मिशन की प्रोग्राम निदेशक देवकन्या धर कहती हैं, "एयरक्राफ़्ट के नाम का महेन्द्र सिंह धोनी के नाम से कोई लेना देना नहीं है. इस शब्द का संस्कृत में मतलब होता है पृथ्वी."

एयरक्राफ़्ट 'माही' भारत का पहला रजिस्टर्ड लाइट स्पोर्ट्स एयरक्राफ़्ट है.

माही का इंजन मारुति बलेनो जितना पावरफ़ुल है और ये 215 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ़्तार से आसमान में तैर सकता है.

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इसमें एक बार में 60 लीटर ईंधन ही डलता है. इस वजह से एक बार में साढ़े चार घंटे की उड़ान ही भरी जा सकती है.

लाइट स्पोर्ट्स एयरक्राफ़्ट 'माही' के कॉकपिट में दो लोगों के बैठने की क्षमता है. यानी कॉकपिट में उतनी ही बैठने की जगह है जितनी एक ऑटो में बैठने की जगह होती है.

इसलिए भी साढ़े चार घंटे से ज़्यादा का सफ़र इस एयरक्राफ़्ट में तय करना मुश्किल होता है.

इसमें किसी अनहोनी की सूरत में पैराशूट से नीचे उतरने का भी उपाय है.

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आरोही और कीथियर की ज़िंदगी

अगर सब कुछ ठीक रहा तो आरोही और कीथियर, तीन महाद्वीप के 23 देशों का दौरा 100 दिन में पूरा कर स्वदेश वापस लौटेंगी.

पटियाला से उड़ान भरने के बाद ये लड़कियां दक्षिण-पूर्व एशिया, जापान, रूस, कनाडा, अमरीका, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, यूरोप की ओर बढ़ेंगी.

आरोही और कीथियर देश की पहली लाइट स्पोर्ट्स एयरक्राफ़्ट लाइसेंस होल्डर हैं.

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दोनों ने मुंबई फ्लाइंग क्लब से एविएशन में बैचलर्स की पढ़ाई की है.

आरोही केवल 22 साल की हैं. लेकिन जब वो केवल चार साल की थीं तभी से उनका सपना पायलट बनने का था. आरोही ने चार साल की उम्र में एक विमान में सफर किया था, जिसे महिला पायलट उड़ा रही थी. बस उसी दिन से उन्होंने ठान लिया कि वो पायलट बनेंगी. आज वो सपना उनका पूरा हो गया.

कीथियर अपने घर पर चार बहनों में सबसे बड़ी है. वो एक बिजनेस घराने से संबंध रखती है. उनके ख़ानदान में पायलट बनने वाली कीथियर पहली लड़की हैं. पायलट बन कर कीथियर ने अपने पिता के सपने को पूरा किया है.

इस मिशन के लिए दोनों ने तैयारी अप्रैल से शुरू कर दी थी.

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मिशन WE

दुनिया की सैर के इस मिशन को नाम दिया गया है, मिशन WE यानी वूमेन एंपावरमेंट. इस मिशन को भारत सरकार की महिला एंव बाल कल्याण मंत्रालय के बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ का भी समर्थन है. बीबीसी से बातचीत में इन लड़कियों के प्रोग्राम को-ऑडिनेटर देवकन्या धर ने बताया, "महिलाओं की आज़ादी और सशक्तिकरण को बताने का उड़ान से बढ़िया कोई और तरीक़ा नहीं हो सकता का. आरोही और कीथियर दोनों जिस भी देश में रुकेंगी वहां बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ के अभियान का प्रचार प्रसार भी करेंगी."

लेकिन सवाल ये उठता है कि इस पूरे मिशन से हासिल क्या होगा?

इस पर देवकन्या धर कहती हैं, "छोटी सी उम्र में इस लड़कियों की कहानी अपने आप में बहुत प्रेरणादायक है. हर कोई इनसे सीखना चाहेगा. हम इस मिशन के ज़रिए जो भी पैसा क्राउड फ़ंडिंग से जमा होगा उससे देश भर के 110 शहरों की गरीब लड़कियों को एविएशन की ट्रेनिंग दी जाएगी."

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