बुराड़ी की 11 मौतों का रहस्य और 11 अनसुलझे सवाल

    • Author, मोहम्मद शाहिद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

उत्तरी दिल्ली के संत नगर बुराड़ी इलाक़े में रविवार को 11 लोगों के संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए जाने का मामला बेहद पेचीदा होता जा रहा है.

पुलिस इस मामले में हत्या और आत्महत्या दोनों ही एंगल से जांच कर रही है. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सोमवार को शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर बताया कि यह आत्महत्या का मामला हो सकता है, लेकिन क्राइम ब्रांच के संयुक्त पुलिस आयुक्त आलोक कुमार ने साफ़ किया कि अभी से किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता है.

सोमवार को मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज में सभी 11 शवों का पोस्टमॉर्टम हो गया. इस परिवार के सभी लोगों ने नेत्रदान का संकल्प लिया था, लेकिन सिर्फ़ छह शवों की ही आंखें दान के लिए ली जा सकीं.

इस घटना के दो दिन बीत जाने के बाद मामले को लेकर सवाल गहराते जा रहे हैं. आइए नज़र डालते हैं ऐसे ही 11 सवालों पर.

पहला सवाल

भाटिया परिवार के नाम से मशहूर इस परिवार में सबसे वृद्ध नारायण देवी (77) थीं जो एक दूसरे कमरे में फ़र्श पर मृत पाई गईं. इसके अलावा उनके बड़े बेटे भवनेश उर्फ़ भुप्पी (50), दूसरा बेटा ललित (45) और उन दोनों की पत्नियां सविता (48) और टीना (42) भी फंदे से लटके थे. भुप्पी की दो युवा बेटियां और एक नाबालिग बेटा साथ ही ललित का एक 15 वर्षीय बेटा भी मृत पाए गए.

रविवार सुबह जब पहले चश्मदीद गुरचरण सिंह घर में घुसे तो 10 लोग फंदे से लटके पाए गए थे. वह बताते हैं कि सारे दरवाज़े खुले थे. सवाल यह उठता है कि पुलिस आत्महत्या की भी बात कह रही है तो अगर यह आत्महत्या थी तो इस घर के दरवाज़े कैसे खुले थे?

दूसरा सवाल

हत्या के एंगल को भी ध्यान में रखकर जांच कर रही पुलिस को रविवार को घर से दो रजिस्टर मिले जिनमें आध्यात्मिक और मोक्ष से संबंधित बातें लिखी थीं.

दिल्ली पुलिस का कहना है कि इसमें जिस तरह से हाथ, मुंह और आंखों पर पट्टियां बांधने की बात थी, कुछ लाशों पर वैसी ही पट्टियां बंधी हुई थीं. सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या परिवार इस रजिस्टर के हिसाब से ही सामूहिक रूप से आत्महत्या कर रहा था?

तीसरा सवाल

सबसे बुज़ुर्ग महिला नारायण देवी एक दूसरे कमरे में ज़मीन पर मृत मिलीं जबकि सभी लोग एक जगह फंदे से लटके थे. इनमें से कुछ के हाथ खुले थे.

क्या जिनके हाथ खुले थे उन्होंने पहले इस वारदात को अंजाम दिया और फिर आत्महत्या की?

चौथा सवाल

अगर परिवार सामूहिक रूप से आत्महत्या कर रहा था तो किसी ने विरोध क्यों नहीं किया. पुलिस के अनुसार, किसी भी शव पर हाथापाई या चोट के निशान नहीं पाए गए हैं.

हाल ही में 17 जून को नारायण की नातिन प्रियंका (33) की सगाई हुई थी और जल्द शादी होनी थी. इतने बड़े मौक़े से पहले क्या परिवार सामूहिक रूप से आत्महत्या कर सकता है?

पांचवां सवाल

पड़ोसियों का कहना था कि यह परिवार बेहद धार्मिक था. एक पड़ोसी सीमा ने बीबीसी को बताया था कि ये लोग सत्संग और पूजा-पाठ में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे. उन्होंने बताया था कि ये लोग अपनी किराने की दुकान के बाहर 'अच्छे-अच्छे विचार' लिखा करते थे.

इस परिवार के बड़े बेटे भवनेश यह किराने की दुकान चलाते थे. पड़ोसियों का कहना है कि यह परिवार बिना पूजा-पाठ किए नहीं सोता था. क्या अधिक धार्मिक होने की वजह से इस परिवार के लोगों की जान गई?

छठा सवाल

घर से मोक्ष और विभिन्न क्रिया-कर्म लिखे रजिस्टर मिलने से इस परिवार के तांत्रिक क्रियाओं में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन पड़ोसियों का कहना है कि उन्होंने कभी घर में किसी पुजारी या तांत्रिक जैसे शख़्स को आते-जाते नहीं देखा.

फिर सवाल उठता है कि क्या इस मामले की जांच भटकाने के लिए यह प्लॉट बिछाए गए हैं.

सातवां सवाल

इस परिवार के किसी तांत्रिक या पंडित से जुड़े होने की बात अब तक सामने नहीं आई है, लेकिन पड़ोसियों का कहना है कि इस घर के छोटे बेटे ललित की आवाज़ किसी बीमारी की वजह से चली गई थी.

फिर उन्होंने कई धार्मिक क्रियाओं का सहारा लिया था जिसके बाद से उनकी आवाज़ वापस आ गई थी. तो क्या इस घटना के बाद यह परिवार काफ़ी धार्मिक हो गया था और किसी से प्रेरित होकर या किसी के प्रभाव में आकर परिवार से सामूहिक रूप से ये क़दम उठाया?

आठवां सवाल

रजिस्टर में लिखी हैंड राइटिंग को ललित भाटिया की हैंड राइटिंग बताया जा रहा है, तो क्या केवल वही इन तंत्र-मंत्र की क्रियाओं में विश्वास रखते थे?

असल में संत नगर बुराड़ी की गली नंबर 4ए के इस मकान की दीवार के बाहरी हिस्से में 11 पाइप बाहर निकले हुए हैं जिनका कोई इस्तेमाल नहीं दिखाई देता है.

इस घर को बनाने वाले एक ठेकेदार ने पहचान न ज़ाहिर करने की शर्त पर कहा है कि ललित भाटिया के कहने पर वह पाइप उसने दीवार के बाहर निकाले थे. ललित ने ठेकेदार से कहा था कि इससे बाहर की हवा घर में आएगी.

यह 11 पाइप किसलिए लगाए गए थे, इनमें से सात पाइप मुड़े हुए और 4 सीधे थे और सभी एक खाली प्लॉट की तरफ़ निकले हुए थे.

नौवां सवाल

दिल्ली पुलिस ने इस रजिस्टर में तंत्र-मंत्र की क्रियाओं के आधार पर इसे आत्महत्या से जोड़ा है जबकि इसके दूसरे एंगल अभी तक सामने लाने की कोशिश होती नहीं दिखती.

क्या पुलिस इसको केवल अंधविश्वास के एंगल से ही सुलझाने में विश्वास रख रही है और उसे हत्या से जुड़े कोई सुराग नहीं मिले हैं?

दसवां सवाल

भाटिया परिवार के रिश्तेदारों का मानना है कि वह संपन्न परिवार था. वहीं, पड़ोसियों का कहना है कि उनके किराने की दुकान से सामान लाने पर अगर किसी के पास पैसे नहीं होते थे तो वह बाद में लाने के लिए कह देते थे.

रिश्तेदार दावे से कहते हैं कि ये लोग आत्महत्या नहीं कर सकते हैं, तो फिर क्या रिश्तेदारों के हिसाब से इसे हत्या माना जाए. यह भी एक सवाल है.

ग्यारहवां सवाल

पूरा परिवार बीते 20 साल से बुराड़ी में रहता था. नारायण देवी की एक बेटी सुजाता पानीपत में और एक बेटा राजस्थान में रहते थे. इसके अलावा इस परिवार की किसी बड़ी संपत्ति का पता भी नहीं चला है.

यह एक संयुक्त परिवार था तो फिर अगर यह हत्या है तो इसके कारण क्या थे, इसका जवाब पुलिस को तलाशना होगा.

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच हर दृष्टिकोण से इस मामले की जांच कर रही है. इस घटना की जो भी वजहें रही हों, वो जब सामने आएंगी तभी सच का पता लग पाएगा.

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