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तन्वी-अनस मामला: पासपोर्ट में पते को लेकर कहां-कहां फंस सकता है पेंच
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पासपोर्ट सेवा केंद्र में एक दंपती के उनके अलग-अलग धर्म के होने के कारण पासपोर्ट अधीक्षक पर पासपोर्ट जारी ना करने और अपमानित करने का आरोप लगा.
दंपती ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को टैग कर अपनी समस्या सार्वजनिक की. विदेश मंत्री के संज्ञान में मामले को लाने के बाद आनन-फ़ानन में दंपती को पासपोर्ट जारी कर दिया गया और साथ ही पासपोर्ट अधिकारी का तबादला कर दिया गया.
लेकिन जब मामले की पुलिस जांच हुई तो पत्नी तन्वी सेठ के दस्तावेज़ ग़लत पाए गए और अब तन्वी सेठ उर्फ़ सादिया अनस पर कार्रवाई होने की संभावना है.
तन्वी ने पासपोर्ट आवेदन की जांच के समय पासपोर्ट अधिकारी पर धार्मिक टिप्पणी करने का आरोप लगाया था.
पुलिस और स्थानीय जांच अधिकारियों की टीम तन्वी के ससुराल, लखनऊ गई थी. तन्वी के पास वहां पिछले एक साल के दौरान रहने का कोई भी साक्ष्य या दस्तावेज़ नहीं मिल पाया, जिसके बाद ये कार्रवाई की गई है.
पुलिस का कहना है कि पासपोर्ट में बीते एक साल से रहने का जो पता दिया गया था वो ग़लत पाया गया है और जांच में पता चला है कि वो बीते एक साल से अधिक समय से नोएडा में रह रही थीं.
इस ख़बर ने पासपोर्ट बनवाने की कोशिश में लगे उन सभी लोगों के बीच इससे जुड़े नियमों को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है. पिछले कुछ दिनों से ये ख़बर चर्चा का विषय बनी हुई है.
तो तन्वी सेठ के मसले में कहां-कहां पेंच फंसा है और अगर विदेश यात्रा के लिए आप पासपोर्ट बनवा रहे हैं या पहले से बने पासपोर्ट में अपने नाम का बदलाव रहे हैं तो जानें वो तमाम बातें जो इसके नियम क़ानून से जुड़ी हैं और आपके लिए जानना ज़रूरी है.
आपके दिए पते पर ही भेजा जाएगा पासपोर्ट
तन्वी सेठ के मामले में पासपोर्ट पर सुषमा स्वराज के दख़ल के कारण पासपोर्ट उनके हाथों में थमाया गया था. तन्वी को पासपोर्ट जारी करने के बाद सबसे पहला सवाल यही उठा था कि पासपोर्ट उनके हाथों में कैसे दिया गया क्योंकि नियमों के मुताबिक़ आवेदन में दिए गए पते पर आप हैं या नहीं ये जानने के लिए पुलिस पहुंचेगी और पासपोर्ट भी सीधे उसी पते पर भेजा जाएगा.
तन्वी सेठ के पासपोर्ट को लेकर सुषमा स्वराज और विदेश मंत्रालय की काफ़ी आलोचना की गई. सुषमा स्वराज को ट्विटर पर ट्रोल भी किया गया और उनको बुरा-भला कहा गया.
लखनऊ पासपार्ट ऑफ़िस के अधिकारी का तबादला कर दिया गया था जिसका अभी भी विरोध किया जा रहा है. पासपोर्ट अधिकारी ने उनसे आधिकारिक दस्तावेज़ की मांग की थी क्योंकि शादी के बाद उन्होंने अपना नाम बदल लिया था.
पासपोर्ट अधिकारी विकास मिश्र ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने वही किया जो नियमों के तहत किया जाना था. उन्होंने कहा, "मैंने उनसे यही कहा कि आपने यदि अपने निकाहनामे में नाम बदला है तो इसकी सूचना इस फ़ॉर्म में ज़रूर दी जानी चाहिए. इसके अलावा तन्वी सेठ नोएडा में रहती हैं जबकि वो पासपोर्ट लखनऊ से बनवा रही थीं, ये ग़लत है."
नाम परिवर्तन की स्थिति में क्या हैं नियम?
अगर आप पासपोर्ट पहली बार बनवा रहे हैं तो आपके जन्म प्रमाण पत्र की प्रति, स्कूल प्रमाणपत्र, सर्विस रिकॉर्ड (सरकारी, पीएसयू कर्मचारियों के लिए) स्वीकार किए जाते हैं.
शादी के बाद पासपोर्ट में नाम बदलने के लिए आपको अपने जीवनसाथी के दस्तावेज़ देने होते हैं. अन्य कारणों से नाम बदला गया है तो दस्तावेज़ के रूप में ज़रूरी हलफ़नामे और इससे जुड़े प्रमाणपत्र देने होते हैं.
अगर आपके पास इनमें से कोई दस्तावेज़ नहीं हैं तो हलफ़नामे के साथ ही उन दो अख़बारों की कटिंग जिसमें नाम बदलवाने की घोषणा की सूचना छपवाई गई हो अथवा सरकारी गजट अधिसूचना का प्रमाण देना अनिवार्य होता था. इसे अब और भी आसान कर दिया गया है.
पासपोर्ट बनवाने वालों को सबसे अधिक समस्या जन्मतिथि को लेकर आती थी. इसके लिए जन्मतिथि प्रमाणपत्र मांगा जाता था. लेकिन अब इसके लिए 7-8 ऐसे दस्तावेज़ों को शामिल कर दिया गया है जिससे यह प्रक्रिया और आसान हो गई है.
पासपोर्ट बनवाने के लिए जन्म प्रमाणपत्र की बाध्यता को आसान करते हुए आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस जैसे सरकार द्वारा मान्यताप्राप्त दस्तावेज़ भी पेश किए जा सकते हैं.
अगर आपके नाम में बहुत छोटा-सा बदलाव हो, जैसे- उपनाम (सरनेम) में बदलाव या उपनाम जोड़ना हो तो इसके लिए दोबारा पुलिस वेरीफ़िकेशन की ज़रूरत नहीं होती. स्पेलिंग की ग़लती को छोटी ग़लती के तौर पर देखा जाता है.
तलाक़शुदा को नहीं भरना होगा पूर्व पति का नाम
पासपोर्ट बनवाने के लिए आवश्यक काग़ज़ातों में शादी या तलाक़ के दस्तावेज़ की अनिवार्यता को ख़त्म कर दिया गया है.
पहले पासपोर्ट फ़ॉर्म पर तलाक़शुदा महिलाओं से उनके पूर्व-पति का नाम भरने के लिए कहा जाता था. इसके अलावा जो बच्चा तलाक़ के बाद पूर्व पति के पास है उसका नाम भी भरने के लिए कहा जाता था.
लेकिन अब इसकी अनिवार्यता भी ख़त्म कर दी गई है. अब पासपोर्ट फ़ॉर्म में तलाक़शुदा महिलाओं को अपने पूर्व पति का नाम नहीं भरना होगा.
पते के लिए दस्तावेज़
आपका वर्तमान पता क्या है, इसके लिए टेलीफ़ोन बिल, बिजली बिल, मतदाता पहचान पत्र, गैस कनेक्शन, कंपनी के लेटर हेड पर प्रमाणपत्र, पति/पत्नी के पासपोर्ट की कॉपी, अगर नाबालिग हैं तो माता-पिता के पासपोर्ट की कॉपी (पहला और अंतिम पन्ना), आधार कार्ड, रेंट एग्रीमेंट, बैंक के पासबुक में से कोई एक दस्तावेज़ देने होते हैं.
आवेदक को अपना वर्तमान पता बताने के साथ ही यह भी बताना है कि आवेदन की तिथि से एक साल पहले तक वो किन-किन पतों पर रह चुके हैं.
उम्मीद है इन बातों को जानने के बाद पासपोर्ट में नाम और पते को लेकर पाठकों में असमंजस की स्थिति सुलझ पाएगी.
भारत में पासपोर्ट की शुरुआत
अंत में यह बता दें कि पहले विश्व युद्ध के पहले भारतीय पासपोर्ट जारी करने का प्रावधान नहीं था.
उसी युद्ध के दौरान तब की सरकार ने भारत के रक्षा अधिनियम 1915 को अमल में लाते हुए देश से बाहर जाने और भारत में आने के लिए पासपोर्ट अनिवार्य कर दिया था.
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