You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
लखनऊ पासपोर्ट मामले में बैकफ़ुट पर पासपोर्ट विभाग
- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, लखनऊ से, बीबीसी हिंदी के लिए
अनस सिद्दीक़ी और तन्वी सेठ के पासपोर्ट मामले में अब पासपोर्ट विभाग बैक फ़ुट पर आ गया है तो वहीं इसे लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा जारी है.
पिछले हफ़्ते ट्विटर पर तन्वी सेठ की ओर से शिकायत किए जाने के बाद अगले ही दिन पासपोर्ट बनाकर उन्हें सौंप देने वाले लखनऊ के क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी अब किसी भी सवाल का जवाब देने से बच रहे हैं.
बताया जा रहा है कि सोमवार को मामले में स्पष्टीकरण के लिए लखनऊ के क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी पीयूष वर्मा को दिल्ली तलब किया गया. वहीं इस मामले में दंडस्वरूप ट्रांसफ़र किए गए अधिकारी विकास मिश्र के समर्थन में सोशल मीडिया पर अभियान भी देखने को मिल रहा है.
विकास मिश्र ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने वही किया जो नियमों के तहत किया जाना था. विकास मिश्र का कहना है, "मैंने उनसे यही कहा कि आपने यदि अपने निकाहनामे में नाम बदला है तो इसकी सूचना इस फ़ॉर्म में ज़रूर दी जानी चाहिए. इसके अलावा तन्वी सेठ नोएडा में रहती हैं जबकि वो पासपोर्ट लखनऊ से बनवा रही थीं जो कि ग़लत है."
पिछले हफ़्ते तन्वी सेठ ने ट्विटर पर शिकायत की थी कि उनके मुस्लिम पति को पासपोर्ट अधिकारी ने धर्म बदलने की सलाह दी थी अन्यथा पासपोर्ट नहीं बनने की बात कही थी.
तन्वी सेठ ने ट्विटर पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को भी टैग किया था और माना जा रहा है कि इसी वजह से आनन-फ़ानन में तन्वी सेठ और उनके पति को पासपोर्ट बनाकर दे दिया गया. लेकिन जानकारों के मुताबिक ऐसा करना नियमों को विपरीत है.
तन्वी सेठ जहां अपना पासपोर्ट बनवाने के लिए लखनऊ के क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय गईं थीं, वहीं उनके पति अनस सिद्दीक़ी अपने पासपोर्ट का नवीनीकरण कराने के लिए आए थे. तन्वी सेठ का आरोप है कि दो काउंटर से उन्हें क्लियरेंस मिल गया लेकिन तीसरे काउंटर पर बैठे अधिकारी ने उनसे सवाल किया कि 'अनस सिद्दीक़ी की पत्नी का नाम तन्वी सेठ कैसे हो सकता है ?'
दरअसल, तन्वी सेठ की शादी एक दशक पहले अनस सिद्दीक़ी के साथ हुई थी. उनके निकाहनामे में तन्वी सेठ का नाम सादिया अनस लिखा हुआ है लेकिन अन्य कागज़ात में उनका नाम तन्वी सेठ है.
पासपोर्ट अधिकारी विकास मिश्र का कहना है, "यदि आपने एक बार भी अपना नाम बदला है तो इसकी सूचना फॉर्म में देनी होती है. ऐसा न करने पर पासपोर्ट नहीं बन सकता क्योंकि इस तरह से एक व्यक्ति दो अलग-अलग नाम से भी पासपोर्ट बनवा सकता है."
हालांकि साल 2016 के बाद नए नियमों के मुताबिक पासपोर्ट के लिए निकाहनामे या विवाह प्रमाणपत्र की ज़रूरत नहीं होती है लेकिन चूंकि तन्वी सेठ का नाम निकाहनामे में सादिया अनस लिखा है, इसलिए विकास मिश्र ने इसकी सही जानकारी देने की बात उनसे की थी क्योंकि तन्वी सेठ अपने इसी नाम से पासपोर्ट बनवा रही थीं.
बात करने से कतरा रहे हैं तन्वी-अनस
माना जा रहा है कि शिकायतर्ताओं के दबाव में पासपोर्ट अधिकारियों ने नियमों को भी धता बता दिया और इस मामले में जब विदेश मंत्री सुषमा स्वराज सोशल मीडिया पर ट्रोल होने लगीं यानी आलोचनाओं का शिकार होने लगीं और ख़ुद बीजेपी में दबी ज़ुबान उनकी आलोचना होने लगी तो अब इस मामले की नए सिरे से जांच की मांग हो रही है.
लखनऊ में बीजेपी के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी कहते हैं कि यदि पासपोर्ट बनाने में किसी तरीके से नियमों के साथ समझौता किया गया है तो ये ग़लत है और इसकी पूरी जांच की जानी चाहिए.
इस बीच, मामले की गंभीरता को देखते हुए लखनऊ स्थित पासपोर्ट दफ़्तर के पास सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है. इस बारे में पुलिस अधीक्षक (उत्तरी) अनुराग वत्स का कहना है, "मीडिया के अलावा भी बड़ी संख्या में लोग घटना की पूछताछ के लिए पासपोर्ट केंद्र में आ रहे हैं. जिसके चलते वहां काफ़ी अव्यवस्था का माहौल है. इसे देखते हुए रीजनल पासपोर्ट ऑफ़िसर पीयूष वर्मा ने सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए शुक्रवार को एक दरोगा और एक कांस्टेबल को पासपोर्ट सेवा केंद्र में तैनात किया गया है."
वहीं तन्वी सेठ और अनस सिद्दीक़ी भी अब इस मामले में बातचीत से कतरा रहे हैं. हालांकि जिस दिन उन्हें पासपोर्ट मिला था, उस दिन तक वो लोग इसी बात पर क़ायम थे कि उन्हें विभाग के अधिकारी ने परेशान किया है.
लखनऊ के क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी पीयूष वर्मा ने शिकायत आने के तत्काल बाद गत 21 जून को प्रेस कांफ्रेंस में अनस सिद्दीक़ी और तन्वी सेठ दोनों को पासपोर्ट उनके हाथ में सौंपे थे.
यही नहीं, घटना के बाद विभाग ने फ़ौरी कार्रवाई करते हुए न सिर्फ़ अनस और तन्वी को पासपोर्ट बनाकर दे दिए थे बल्कि विकास मिश्र का लखनऊ से गोरखपुर तबादला भी कर दिया गया था. पासपोर्ट हाथ में सौंपे जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं. जानकारों के मुताबिक पासपोर्ट सिर्फ़ रजिस्टर्ड डाक से ही आवेदन में दर्ज पते पर भेजे जाते हैं, हाथ में नहीं दिए जाते.
हालांकि प्रेस कांफ्रेंस में उस वक़्त जब क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी पीयूष वर्मा से सवाल किया गया कि क्या सभी कागज़ात की जांच की गई है तो उन्होंने दावा किया कि पासपोर्ट सारी जांच-पड़ताल के बाद उन्हें सौंपा गया है. लेकिन जानकारों के मुताबिक जिस तरह की जांच पासपोर्ट बनवाने के लिए ज़रूरी होती है, वो महज़ कुछ घंटों में पूरी नहीं हो सकती.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)