सोज़ के कश्मीर की आज़ादी वाले बयान पर घमासान

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जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री रह चुके सैफुद्दीन सोज़ के एक बयान से विवाद खड़ा हो गया है.
उन्होंने पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ के उस बयान पर सहमति जताई है जिसमें उन्होंने कहा था कि आज़ादी कश्मीरियों की पहली पसंद है.
सैफुद्दीन सोज़ का कहना है कश्मीर के लोग तब भी आज़ादी चाहते थे और आज भी आज़ादी चाहते हैं. हालांकि उन्होंने माना कि ये मुमकिन नहीं है.
उन्होंने आज़ादी का एक दूसरा तरीका भी सुझाया. सैफुद्दीन सोज़ ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच एक समझौता होना चाहिए जिसके तहत दोनों देशों के कब्ज़े वाले कश्मीर की सरहदें ना बदली जाएं, लेकिन वहां के लोगों को स्वायत्ता दे दी जाए.
उन्होंने कहा कि इससे कश्मीर की जनता शांति और सुकून की ज़िंदगी बसर कर सकेगी.
सैफुद्दीन सोज़ के मुताबिक कश्मीर में सरकार की फौजकशी की नीति से कोई फायदा नहीं होने वाला है.

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गुलामनबी के बयान पर भी हंगामा
कश्मीर को लेकर कांग्रेस के एक और वरिष्ठ नेता के बयान पर भी काफी हंगामा हो रहा है. कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद ने जम्मू-कश्मीर में हाल ही में टूटे भाजपा और पीडीपी गठबंधन पर टिप्पणी की है.
उन्होंने कहा, "इन दोनों सरकारों के चलते सबसे ज़्यादा फौज के लोग मारे गए, सैंकड़ों बच्चों की आंखें चली गई. इन्होंने आर्थिक तौर पर स्टेट को कंकाल कर दिया, पर्यटन को ठप कर दिया. इन सब चीज़ो के लिए भाजपा और पीडीपी दोनों बराबर ज़िम्मेदार हैं."

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भाजपा की ओर से आलोचना
कांग्रेस नेताओं के इन बयानों की भाजपा ने आलोचना की है. भाजपा नेता रवि शंकर प्रसाद ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेताओं के बयान लश्कर समर्थित हैं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी देश को तोड़ने वालों के साथ खड़ी है.
सत्ता पक्ष के इन आरोपों का जवाब देने के लिए कांग्रेस की ओर से प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला सामने आए.
उन्होंने कहा, "पूरा देश सैनिकों के साथ खड़ा है और नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आज़ाद ने भी यही बात दोहराई थी. लेकिन किसी भी सैन्य कार्रवाई के वक्त ये ध्यान रखा जाना चाहिए कि आम नागरिकों को कम से कम नुकसान पहुंचे."
सैफुद्दीन सोज़ भी कह चुके हैं कि उन्होंने जो कुछ भी कहा वो उनके निजी विचार थे और इसका कांग्रेस पार्टी से कोई लेना देना नहीं है.
कश्मीर के मुद्दे पर सैफुद्दीन सोज़ की एक किताब भी मार्केट में आने वाली है. इस किताब में कश्मीर के इतिहास और संघर्ष का ज़िक्र किया गया है. सैफुद्दीन सोज़ ने भारत और कश्मीर के बीच राजनीतिक संवाद पर ज़ोर दिया है.
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