You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
राजनाथ के कश्मीर दौरे पर सबकी नज़र, क्या और बढ़ेगा सीज़फायर
- Author, माजिद जहांगीर
- पदनाम, श्रीनगर से, बीबीसी हिंदी के लिए
राजनाथ सिंह ऐसे समय कश्मीर आ रहे हैं जब भारत सरकार ने रमज़ान के महीने के लिए कश्मीर में एकतरफा सीज़फायर की घोषणा की हुई है.
सीज़फायर की घोषणा के बाद कश्मीर घाटी में अभी तक कई चरमपंथी हमले हो चुके हैं जिन में कई सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए हैं जबकि सेना के एक जवान की मौत हुई है.
चरमपंथी संगठनों ने भारत सरकार के द्वारा किए सीज़फायर को पहले की रद्द कर दिया था.
इस बीच बीते शुक्रवार श्रीनगर के नौहट्टा में कथित तौर पर सीआरपीएफ की एक गाड़ी की चपेट में आए तीन लोगों में से एक व्यक्ति की मौत हो गई.
इस घटना के बाद से कश्मीर में तनाव बढ़ गया है.
पीडीपी-भाजपा की गठबंधन सरकार
माना जा रहा है कि गृहमंत्री कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था का जायज़ा लेने के साथ-साथ रमज़ान के दौरान लागू किए सीज़फायर को बढ़ाने या ना बढ़ाने पर भी फ़ैसला ले सकते हैं.
कश्मीर घाटी में साल 2016 में एक मुठभेड़ में हिज़्बुल कमांडर बुरहान वानी की मौत हो गई थी. जिसके बाद से वहां पर हालत अशांत हैं.
राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने राजनाथ सिंह के दौरे से एक दिन पहले बुधवार को कहा चरमपंथी सीज़फायर को नाकाम करने की कोशिश कर रहे हैं.
उन्होनें अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, "सीज़फायर की वजह से जम्मू-कश्मीर के लोगों ने राहत की सांस ली लेकिन चरमपंथी अपने हिंसक काम को जारी रखकर इस प्रयास को नुक़सान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं."
"मुझे आशंका है कि उन्हें जल्द ही इस बात का अहसास हो जाएगा कि इन हरकतों से कुछ हासिल होने वाला नहीं है."
जम्मू और कश्मीर में इस समय पीडीपी-भाजपा की गठबंधन सरकार है.
नाज़ुक हालात के दौरान
गृहमंत्री के जम्मू और कश्मीर के दौरे पर विपक्षी नेशनल कॉन्फ्रेंस का कहना है कि इससे पहले भी भारत के गृहमंत्री जम्मू और कश्मीर आ चुके हैं लेकिन कश्मीर के हालात में कोई बदलाव नहीं आया है.
पार्टी के वरिष्ठ नेता अली मोहम्मद सागर ने बीबीसी को बताया, "इससे पहले भी नाज़ुक हालात के दौरान वो यहां आए. उस दौरान उन्होंने कुछ वायदे भी किए और कई राजनीतिक दलों से भी मिले. वो उमर अब्दुल्ला साहब से भी मिले."
"उन्होंने ये भी कहा था कि पेलेट गन नहीं चलेंगे और जेलों से राजनीतिक क़ैदियों को जेलों से छोड़े जाने के लिए हम बात करेंगे. लेकिन अभी तक कुछ भी नहीं हुआ."
"आज भी वह बहुत कुछ कह रहे हैं. वो ये भी कह रहे हैं कि हम बातचीत के हक़ में हैं. अगर वो सच में बातचीत का रास्ता अपनाएंगे और हुर्रियत के साथ बात करेंगे, नाराज़ नौजवानों से बात करेंगे और उनको मनाएंगे तो मेरे ख्याल से बहुत अच्छी शुरुआत होगी. लेकिन वह होगी या नहीं ये अल्लाह ही बेहतर जानता है."
कश्मीर दौरे से उम्मीदें
अली मोहम्मद सागर कहते हैं, "अगर वह गुरुवार को आ रहे हैं तो उससे कोई फ़र्क़ पड़ना चाहिए. यहां बेगुनाह लोग मारे जाते हैं, क़त्लो-ग़ारत होती है, बच्चे मारे जाते हैं. यहां चरमपंथी मरता है, फौजी मरता है, पुलिस का जवान मरता है- मरते तो लोग ही हैं."
"यहां माहौल इतना ख़राब हो गया है कि हमारे बच्चे सड़कों पर निकल रहे हैं और उनके हाथों में पत्थर हैं. इन चीज़ों को बंद करने लिए ज़रूरी है कि साफ़ दिल से रास्ता तलाश किया जाए और बातचीत की जाए. लेकिन सिर्फ सैर के लिए या पब्लिसिटी के लिए मंत्री आएंगे तो उससे कुछ हासिल नहीं होगा."
"हम भी इस हक़ में हैं कि सीज़फायर आगे बढ़ाया जाए और सरहद पर शांति हमेशा के लिए क़ायम रखी जाए. भारत और पाकिस्तान को भी बातचीत करनी चाहिए."
पीडीपी को भी राजनाथ सिंह के कल के कश्मीर दौरे से काफ़ी उम्मीदें हैं.
पीडीपी का कहना है कि भारत सरकार ने रमज़ान के महीने के लिए युद्धविराम की जो घोषणा की उसे आगे बढ़ाया जाए.
हुर्रियत से बातचीत
पीडीपी के वरिष्ठ नेता सरताज मदनी कहते हैं, "हम चाहते हैं कि रमज़ान के महीने के लिए भारत सरकार ने जो घोषणा की थी उसे रमज़ान के बाद भी जारी रखा जाए. इस एक महीने में लोगों ने बड़ी राहत की सांस ली है."
"क़रीब अठारह-उन्नीस साल के बाद दोबारा सीज़फायर हुआ. हम तो चाहेंगे कि जिसकी वजह से लोगों को राहत मिली उसको आगे बढ़ाया जाए. गृहमंत्री आ रहे हैं. वो हमेशा चाहते हैं कि ये मसला हल हो और बातचीत से हल हो."
ये पूछने पर कि क्या राजनाथ सिंह को हुर्रियत से बातचीत करने के लिए दावत देनी चाहिए, सरताज मदनी का कहना था कि, "देखिए दावत तो सब को आ गई है. राम माधव ने बुधवार को कहा है कि वो हुर्रियत से बात करना चाहते हैं."
"गृहमंत्री ने भी कहा कि वो हुर्रियत से बात करना चाहते हैं, पाकिस्तान से बात करना चाहते हैं. मुझे तो लगता है कि इस मौक़े को नहीं गंवाया जाना चाहिए. अगर कश्मीर के लोगों के लिए किसी के दिल में दर्द है तो उसे इस मौक़े को हाथ से नहीं जाने देना चाहिए."
कश्मीर में शांति बनाने के लिए...
बीते एक महीने से कश्मीर मे हालात के बारे में मदनी कहते हैं कि जो क़दम भारत सरकार ने उठाया है उसका सही जवाब मिलना चाहिए था. उनका कहना था कि ये हमारी बदक़िस्मती है कि हालात थोड़े से ख़राब हो गए.
इधर भाजपा का कहना है कि उनकी पार्टी ने कश्मीर में शांति बनाने के लिए क़दम तो उठाया लेकिन पाकिस्तान यहां शांति कायम नहीं होने देना चाहता. हालांकि भाजपा ने सीज़फायर को बढ़ाने से संबंध में अब तक अपना पक्ष साफ़ नहीं किया है.
जम्मू-कश्मीर भाजपा के अध्यक्ष रविंद्र रैना ने बीबीसी को बताया, "पाकिस्तान कभी नहीं चाहता है कि कश्मीर में शांति हो, लोग आराम की ज़िन्दगी बसर करें. ये ऐसा मुल्क है जिसका अपना घर भी बर्बाद है और वो कश्मीर को भी बर्बाद करने पर तुला हुआ है."
सीज़फायर की घोषणा
रमज़ान पर लागू हुए सीज़फायर को बढ़ाए जाने की चर्चा पर रैना कहते हैं, "गृहमंत्री कश्मीर आकर पहले सुरक्षा अधिकारियों से मिलेंगे, सुरक्षा एजेंसियों से जानकारी लेंगे."
"इसके बाद को कुपवाड़ा जाएंगे और आठ तारीख़ को जम्मू के आरएसपूरा के सभी सेक्टर्स में जाकर पाकिस्तान की तरफ से हुई गोलाबारी से हुए नुक़सान का जायज़ा लेंगे. वो खुद ज़मीनी हालात देखेंगे."
कश्मीर के राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि जब तक पाकिस्तान और हुर्रियत से बात नहीं होगी तब तक कुछ भी नहीं हो सकता है.
राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार ताहिर मोहिउद्दीन कहते हैं, "राजनाथ सिंह का कश्मीर दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत ने सीज़फायर की घोषणा की है. लेकिन चरमपंथी संगठनों ने अपने हमले जारी रखे."
"मुझे लगता है कि जब तक पाकिस्तान और हुर्रियत के साथ बात ना हो, ये गुत्थी सुलझने वाली नहीं है. राम माधव ने बयान तो दिया है लेकिन मुझे लगता है कि उसके लिए कोई होमवर्क नहीं किया गया है. उनको बातचीत के लिए दावत देनी चाहिए."
वो कहते हैं, "लेकिन ये बात ज़रूर है कि सीज़फायर के कारण लोगों को राहत मिली है."
हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने भारत सरकार की बातचीत को लेकर कुछ दिन पहले बताया था कि बातचीत तब होगी जब भारत सरकार बातचीत के मुद्दे पर साफ़-साफ़ सामने आए.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)