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इस बार भी गर्मी में क्यों उबल रही है कश्मीर घाटी
- Author, रियाज़ मसरूर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर
सेब के बागों से लदा दक्षिण कश्मीर शायद कश्मीर घाटी का सबसे ख़ूबसूरत हिस्सा है लेकिन एक लंबे समय से ये क्षेत्र कई मुठभेड़ों का गवाह बन चुका है.
रविवार दो अप्रैल को भारत प्रशासित कश्मीर के दक्षिणी हिस्से में तीन मुठभेड़ों में 13 चरमपंथियों के अलावा तीन सैनिकों और चार आम नागरिकों की भी मौत हो गई.
बीते दशक में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ ये अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई हुई है. इस ऑपरेशन में ज़्यादा सुरक्षाबल शामिल नहीं हुए थे. तीनों सर्जिकल ऑपरेशन थे.
इस ऑपरेशन में 200 से ज़्यादा लोग घायल भी हुए हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि सेना ने प्रदर्शन कर रहे लोगों पर गोली बरसानी शुरू कर दी जिसके चलते चार लोगों की मौत हो गई और 200 से ज़्यादा घायल हो गए.
इस हिंसा ने सरकार की ओर से कश्मीर में बदलाव की बातों को बेमानी साबित कर दिया है.
'अशांत कश्मीर'
पिछले हफ़्ते कश्मीर में अब तक का सबसे बड़ा टूरिज़्म कॉन्क्लेव आयोजित किया गया था. देशभर के टूर ऑपरेटरों ने इसमें हिस्सा लिया था और कश्मीरी पर्यटन को देशभर में प्रचारित करने की बात कही थी.
डीजीपी एसपी वैद्य ने अलगावदी नेताओं सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज़ उमर और यासीन मलिक के घर का घेराव हटाने के आदेश दिए थे. बाद में तीनों नेताओं ने अलग-अलग मस्जिदों में लोगों को संबोधित किया.
इस बीच कश्मीर के लिए भारत सरकार के विशेष प्रतिनिधि दिनेश्वर शर्मा ने बुरहान वानी के गृह-नगर का दौरा किया था और वहां के युवाओं से बात की थी. यहां के ज़्यादातर युवा बुरहान को आज भी आदर्श मानते हैं.
इन सारे घटनाक्रमों से ये उम्मीद की जा रही थी कि अशांत कश्मीर में हालात कुछ बेहतर होंगे.
भारतीय सेना के विक्टर फ़ोर्स के प्रमुख और दक्षिण कश्मीर में चरमपंथियों पर नज़र रखने वाले मेजर जनरल बीएस राजू का कहना है कि मारे गए दो चरमपंथी कश्मीरी सेना के उमर फ़याज़ की हत्या में शामिल थे.
उन्होंने कहा, ''हम हथियार नहीं डालेंगे, हम आख़िरी सांस तक उनसे मुक़ाबला करेंगे. आतंकवाद के लिए यहां कोई जगह है.''
कश्मीर मुद्दों के जानकारों का मानना है कि सेना के ऑपरेशन में आम लोगों की मौत से दिनेश्वर शर्मा की राह मुश्किल हो सकती है.
दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के शोधकर्ता जुनैद दर का मानना है कि दिनेश्वर शर्मा अलगाववादी नेताओं से जुड़ने में बहुत पहले ही नाक़ाम हो गए थे लेकिन वो अलग-अलग इलक़ों में लोगों से संपर्क कर रहे थे. लेकिन ऑपरेशन में आम लोगों की मौत और सैकड़ों लोगों का घायल होना उनके सारे किए-कराए पर पानी फेरने का काम करेगा.
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आम लोगों को होने वाला नुक़सान उनकी ही लापरवाही की वजह से है. एक वरिष्ठ आर्मी अधिकारी ने कहा कि 'हमनें पहले ही सूचना जारी कर दी थी कि लोग एनकाउंटर वाली जगह से दूर रहें लेकिन उनका आना जारी रहा.'
जुलाई साल 2016 में बुरहान वानी की एक मुठभेड़ में मौत के बाद कश्मीर भड़क उठा था. बुरहान वानी सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय थे और इलाक़े के ज़्यादातर युवाओं के लिए आदर्श भी. इसमें 100 लोगों की मौत हो गई और पैलेट गन ने 15 हज़ार से ज्यादा लोगों को ज़ख़्मी कर दिया था. जिसके बाद घाटी छह महीने के लिए बंद रही.
इसके बाद पिछले साल भी सरकार और अलगाववादियों के बीच तनाव से घाटी अशांत रही.
पिछले दो सालों से गर्मी के मौसम में घाटी उबल पड़ रही है. लोगों में इस साल भी यही डर है लेकिन इससे सिर्फ़ लोग प्रभावित नहीं होंगे बल्कि व्यापार और शिक्षा का भी बंटाधार हो जाएगा.