कश्मीर मुठभेड़: 'हम आम लोग फंसे हुए हैं, घायलों की गिनती नहीं'

"हम लोग घरों में कैद हैं, बाहर फौज डेरा डालकर बैठी हुई है, कितने लोग घायल हैं, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है."

ये शब्द भारत प्रशासित कश्मीर के शोपियां ज़िले के एक गांव कचडोरा के निवासी फ़ैज मुस्तफ़ा (बदला हुआ नाम) के थे जिन्होंने स्थानीय पत्रकार माज़िद जहांगीर से अपना दर्द साझा किया.

इस गांव की आबादी तकरीबन 3000 हज़ार है और मुस्तफ़ा का दावा है कि वो जहाँ अभी हैं, उससे कुछ ही दूर पर मुठभेड़ हो रही है और गोलियों की आवाज़ें आ रही हैं.

कश्मीर के दक्षिणी हिस्से में रविवार को हुई तीन मुठभेड़ों में अब तक 11 चरमपंथियों की मौत होने की सूचना मिली है.

जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी एसपी वैद्य ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि इन मुठभेड़ों में अब तक 11 चरमपंथी मारे गए हैं. इसके अलावा सुरक्षा बल के तीन जवान और दो आम नागरिक भी मारे गए हैं.

उन्होंने बताया कि सेना को इस बारे में शनिवार की रात जानकारी मिली थी कि श्रीनगर से 50 किलोमीटर दूर शोपियां ज़िले के द्रागडा गांव में कुछ चरमपंथी छुपे हुए हैं.

उन्होंने कहा, "द्रागडा गांव में दोनों तरफ से भारी गोलीबारी में 7 चरपमंथियों की मौत हुई है. इसके साथ ही एक दूसरे ऑपरेशन में अनंतनाग ज़िले के एक गांव दायलगाम में एक चरमपंथी की मौत हुई है. हालांकि, दायलगाम में एक चरमपंथी ने सरेंडर भी किया है."

साथ ही डीजीपी एसपी वैद्य ने ट्वीट करके जानकारी दी है कि अनंतनाग में हुए ऑपरेशन में एक चरमपंथी को ज़िंदा पकड़ लिया गया है और शोपियां ज़िले के कचडोरा गांव में कुछ आम नागरिक फंसे हुए हैं और उन्हें निकालने की कोशिशें जारी हैं.

दक्षिण कश्मीर में गोलियों का आतंक

सेब के बागों से लदा दक्षिण कश्मीर शायद कश्मीर घाटी का सबसे ख़ूबसूरत हिस्सा है लेकिन एक लंबे समय से ये क्षेत्र कई मुठभेड़ों का गवाह बना है.

जम्मू-कश्मीर पुलिस के महानिदेशक एसपी वैद्य के मुताबिक़, साल 2017 में मुठभेड़ में 200 चरमपंथियों की मौत हुई है जिनमें अबु दुजाना, बशीर लश्कीर और ललहारी जैसे बड़े चरमपंथी कमांडर भी शामिल हैं.

दक्षिण कश्मीर में लगातार होते ऑपरेशनों के बावजूद स्थानीय स्तर पर चरमपंथियों के प्रति समर्थन का भाव देखा जाता है.

शोपियां ज़िले में रविवार को हुए ऑपरेशनों के दौरान भी भारी मात्रा में आम लोगों को प्रदर्शन करते देखा गया है.

डीजीपी एसपी वैद्य ने बताया है कि सेना ने पहले भीड़ को भगाने के लिए आंसू गैस और पैलेट गन्स का इस्तेमाल किया, इसके बाद गोलियां चलाई गईं जिसमें छह लोग घायल हुए हैं.

शोपियां ज़िले में रहने वाले मुस्तफ़ा बताते हैं, "उनके घर तक लोगों के प्रदर्शन की आवाज़ें आ रही हैं, लेकिन लोगों में खौफ़ का माहौल है, एनकाउंटर की साइट से काफ़ी दूर तक सुरक्षाबलों का घेरा है."

कश्मीर में अब आगे क्या?

दक्षिण कश्मीर में सेना के इस ऑपरेशन के बाद कश्मीर यूनिवर्सिटी ने 2 अप्रैल को होने वाले अपने सभी इम्तिहानों को स्थगित कर दिया है.

हुर्रियत कॉन्फ्रेंस (गिलानी गुट) के प्रवक्ता गुलज़ार अहमद ने बीबीसी को बताया है कि हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने इस घटनाक्रम के विरोध में दो दिनों के बंद का आह्वान किया है.

इसके साथ ही प्रशासन ने दक्षिण कश्मीर में इंटरनेट को बंद कर दिया गया है.

'चरमपंथियों पर सर्जिकल स्ट्राइक'

कश्मीर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक स्वयं प्रकाश पानी ने स्थानीय पत्रकार माज़िद जहांगीर को इन मुठभेड़ों के बारे में जानकारी दी है.

पानी ने कहा, "बीते दशक में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ ये सबसे बड़ी कार्रवाई हुई है. इस ऑपरेशन में ज़्यादा सुरक्षाबल शामिल नहीं हुए थे. तीनों सर्जिकल ऑपरेशन थे, पहले दोनों सर्जिकल ऑपरेशन की तरह हुए लेकिन कचडोरा वाले ऑपरेशन में थोड़ा मुश्किल सामने आई. इस मुठभेड़ में सेना के तीन जवान शहीद हुए हैं."

पुलिस के मुताबिक़, इस कार्रवाई में मारे गए चरमपंथियों ने बीते साल मई में लेफ्टिनेंट उमर फैयाज़ की हत्या को अंजाम दिया था.

प्रदेश की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने आम नागरिकों की मौत पर दुख जताया है और इस ऑपरेशन में मारे गए जवानों की अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की है.

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