GROUND REPORT: भरथुआ में छेड़खानी और कपड़े फाड़ने के वीडियो के बाद शर्मिंदगी में जी रहा गांव

- Author, रवि प्रकाश
- पदनाम, भरथुआ (जहानाबाद) से बीबीसी हिंदी के लिए
नहर वाली सड़क पर अब सन्नाटा पसरा है. यह सड़क बुरी तरह टूटी हुई है. इस पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं.
जहानाबाद- इस्लामपुर हाइवे के एक किनारे से शुरू इस अप्रोच रोड पर क़रीब 500 मीटर चलने के बाद बिजली का वह पाया (पोल) नंबर-31 मिलता है, जहां पिछले 25 अप्रैल को भरथुआ गांव के लड़कों ने एक लड़की के साथ छेड़खानी कर उसके कपड़े फाड़ दिए थे. जब वह वीडियो वायरल हुआ तो पुलिस ने इसी पाया नंबर-31 से घटनास्थल की पहचान की थी.

इमेज स्रोत, Ravi Prakash/BBC
इसके समानांतर एक सूखी नहर है. इसकी दूसरी तरफ़ ताड़ के कुछ पेड़ हैं और दूर दिखती झोपड़ियां भी. वे भरथुआ गांव में बनी हैं. जहानाबाद वायरल वीडियो कांड के कुल 13 आरोपियों में से 11 इसी गांव के हैं और इनमें अधिकतर नाबालिग हैं. एक लड़के की उम्र तो सिर्फ आठ साल है.
यादवों का गांव
भरथुआ की अधिकतर आबादी यादवों की है. साल 2011 की जनगणना के मुताबिक 162 हेक्टेयर में बसे इस गांव में 253 घर हैं. काको थाना की डेढ़सैया पंचायत के इस गांव के अधिकतर लोग खेती और मजदूरी में लगे हैं.
गांव में सिर्फ़ एक स्कूल है. इसमें पांचवीं तक की पढ़ाई होती है, लेकिन इसके लिए सिर्फ़ दो शिक्षक नियुक्त हैं.

इमेज स्रोत, Ravi Prakash/BBC
ज़ाहिर है यहां पढ़ने-पढ़ाने का माहौल ज़्यादा अच्छा नहीं है. इस कारण यहां की साक्षरता दर सिर्फ़ 50.51 फ़ीसदी है, जो बिहार की औसत साक्षरता दर 61.80 प्रतिशत से कम है. 2011 की जनगणना के मुताबिक गांव में महिलाओं का लिटरेसी रेट सिर्फ 38.28 प्रतिशत है. गांव में घूमते वक्त बरतन मांजती (साफ करती) लड़कियों को देखकर इन आंकड़ों की तस्दीक होती है.
गांव के लोग शर्मिंदा हैं
यहां मेरी मुलाकात महेश यादव से होती है. जब मैंने उनसे पूछा कि 25 अप्रैल वाली घटना पर क्या कहेंगे.

इमेज स्रोत, Getty Images
उन्होंने बीबीसी से कहा, ''क्या कहेंगे सर. हमलोग का नाम डूबा दिया बच्चा सब. हमारे गांव में कभी ऐसी घटना नहीं हुई थी. थाना-पुलिस का भी आना-जाना नहीं के बराबर था.''
वो आगे कहते हैं, '' लेकिन अब ऐसे गंदे काम में गांव के लड़के पकड़े गए हैं कि सर उठाकर चलने में भी दिक्कत हो रही है. हमारे मुंह पर कालिख पोत दिया है. हमलोग शर्मिंदा हैं और पुलिस से निष्पक्ष जांच की गुज़ारिश करते हैं.''
गांववालों ने ही पकड़ा अभियुक्तों को
हमारी बातचीत के दौरान गांव के कई लोग वहा पहुंच जाते हैं. वहां मौजूद कुणाल कुमार ने बीबीसी को बताया कि 'गांव के लोगों को पुलिस के आने पर इस घटना का पता चला. पुलिस ने जब हमें वह वीडियो दिखाया तो हम लोगों ने ही लड़कों की पहचान की. इसके बाद गांव के लोगों ने अभियुक्त लड़कों को पकड़ कर पुलिस के हवाले किया.'
बकौल कुणाल, 'यह घटना मानवता के नाम पर कलंक है इसलिए हमलोग अभियुक्तों का समर्थन किसी क़ीमत पर नहीं करेंगे, लेकिन इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए क्योंकि, बाद में पुलिस ने कुछ वैसे बच्चों को भी गिरफ्तार कर लिया जिनका फ़ोटो वीडियो में नहीं है. इनमें एक आठ साल का बच्चा भी है.'

इमेज स्रोत, Ravi Prakash/BBC
मैं अब गांव के उन घरों में पहुंचा, जिनके लड़कों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. इस दौरान मुझे फुलवा देवी मिलीं. सूती साड़ी, माथे पर बिंदी और आंखों में आंसू. 'क्यों रो रही हैं' - मेरे इस सवाल पर उन्होंने बताया कि उनके आठ साल के बेटे को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है.
फुलवा देवी ने बीबीसी से कहा, ''हम नैहर गेल रहली सर. हमरा कुछो पता ना रहे. लोग फ़ोन कैलक कि हमर बेटा के पुलिस पकड़ के ले गेल. त हम दउड़ल अइली अपन गांव. हमर बेटा के त पइंट पहिने के लुरे नइखे. उ का गलती करी. ओकरा के छोड़ा दा हे बाबू.
(मैं मायके गई थी. मुझे कुछ भी नहीं पता था. तब गांव से लोगों ने फ़ोन करके बताया कि मेरे बेटे को पुलिस पकड़ कर ले गई है. तब हम आपाधापी में यहां आए. मेरे बेटे को तो ठीक से पैंट पहनने का ढंग नहीं है, वह क्या ग़लती करेगा. उसको छुड़वा दीजिए.)
'हमारे बच्चे बेकसूर हैं'

इमेज स्रोत, Ravi Prakash/BBC
भरथुआ की कांति देवी, सविता देवी और नन्हें यादव के नाबालिग बेटों को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है. ये लोग ग़रीब हैं और अपनी ग़रीबी का हवाला देते हुए अपने-अपने बच्चों के निर्दोष होने का दावा करते हैं. इनका कहना है कि उनके बेटों को दूसरे बड़े लड़को ने बुला लिया. ये लोग तो उसे बचा रहे थे.
नन्हें यादव ने बीबीसी से कहा, ''अगर आप वीडियो ठीक से देखेंगे तो आपको वह आवाजें भी सुनाई देंगी जिनमें बच्चे उस लड़की को छोड़ देने की अपील कर रहे हैं. हमारे बच्चों ने ही उसे कपड़ा दिया. कुछ बालिग और गुंडे लड़कों के कारण हमारे नाबालिग बच्चे इसमें फंस गए.''
एक अभियुक्त की शादी टूटी

इमेज स्रोत, Ravi Prakash/BBC
इस मामले में गिरफ्तार एक लड़के की शादी 11 मई को होनी थी. इसके लिए सारी तैयारियां की जा चुकी थीं. अब वह शादी टूट गई है.
उस लड़के के पिता जद्दू यादव ने मुझे बताया कि लड़की वालों ने शादी तोड़ दी है. उन्होंने बताया कि जब पुलिस ने मुझे मेरे बेटे के कुकृत्य के बारे में बताया तो मैंने अपनी गाछी (आम का बगीचा ) से उसे पकड़ कर पुलिस को सौंप दिया. अब उसके लिए मेरे घर और दिल में कोई जगह नहीं है.
'यह सामाजिक मुद्दा है, आपराधिक नहीं'
वरिष्ठ स्थानीय पत्रकार और 'दैनिक जागरण' (गया) के संपादकीय प्रभारी अश्विनी सिंह ने बीबीसी से कहा कि आप इसे आपराधिक घटना की तरह से मत देखिए. वह तो हुआ ही है अपराध.
लेकिन, यह दरअसल एक सोशल इश्यू है. इसे हमारी शिक्षा व्यवस्था, नैतिक शिक्षा, भरथुआ गांव की सामाजिक दशा और मुफ्त में मिल रहे इंटरनेट के डेटा प्लान से जोड़िए. तब जाकर आप इसकी जड़ तक पहुंचेंगे.
गांवों में 500 रुपए मे बिक रहे चाइनीज़ स्मार्ट फ़ोन और सोशल मीडिया के कारण यह सब हो रहा है.
किसी निर्दोष को नहीं पकड़ा

इमेज स्रोत, RAVI PRAKASH/BBC
जहानाबाद के एसपी ने दावा किया कि 'प्राथमिक तौर पर गिरफ्तार लड़कों से पूछताछ के बाद ही बाकी गिरफ्तारियां की गईं. वीडियो बनाना, उसे देखना और वायरल करना भी तो अपराध है.
इस कारण हमलोगों ने 13 अभियुक्तों की पहचान की और तब गिरफ्तारियां की गई हैं.'
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)












