आंधी-तूफानः 125 से ज़्यादा की मौत और तूफ़ान आने का अंदेशा

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उत्तर भारत में आई भीषण आंधी की वजह से अब तक कम से कम 125 लोगों की मौत हो गई है.
अधिकारियों ने और आंधी आने की चेतावनी भी जारी की है.
तेज़ हवाओं और बिजली गिरने की वजह से कई गांव बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. दीवारें गिरने से सौ से अधिक लोग घायल भी हुए हैं.
उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय के एक प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा है कि बीते बीस सालों में इस तरह के तूफ़ान से यूपी में सबसे ज़्यादा मौतें हुई हैं.
अधिकारियों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में मरने वालों की तादाद बढ़ भी सकती है.
वहीं मौसम विभाग ने चेतावनी देते हुए कहा है कि सप्ताहांत के दौरान और तूफ़ान भी आ सकते हैं.
राहत आयुक्त कार्यालय की ओर से लोगों से सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है.
उत्तर प्रदेश के अलावा राजस्थान भी आंधी-तूफ़ान से बुरी तरह प्रभावित रहा है.
बिजली के खंभे और पेड़ उखड़ गए हैं और दर्जनों घरों की दीवारें गिर गई हैं.
सिर्फ़ इंसान ही नहीं बल्कि बड़ी तादाद में जानवर भी मारे गए हैं.
सबसे बुरी तरह से प्रभावित ताजमहल के लिए मशहूर आगरा ज़िला रहा है जहां चालीस से अधिक लोगों की मौत हुई है.
इसके अलावा राजस्थान के भरतपुर, अलवर और धौलपुर ज़िले भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं.
मारे गए अधिकतर लोग अपने घरों के भीतर सो रहे थे जब या तो तेज़ हवाओं से दीवारें गिर गईं या घरों पर बिजली गिर गई.

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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंधी से लोगों की मौत पर अफ़सोस ज़ाहिर किया है.
वहीं उत्तर प्रदेश सरकार ने मारे गए लोगों के परिजनों के लिए चार लाख रुपए की आर्थिक सहायता की घोषणा की है.
दूसरी ओर दक्षिणी प्रांत आंध्र प्रदेश में बुधवार को आए तूफ़ान में दस से अधिक लोगों की मौत हो गई है.
अधिकारियों का कहना है कि वो हवाओं की तेज़ गति से हतप्रभ हैं.

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राजस्थान के एक अधिकारी हेमंत गेरा ने बीबीसी से कहा, "मैं बीस सालों से राहत और आपदा विभाग में कार्यरत हूं और मैंने कभी इतनी बुरा तूफ़ान नहीं देखा."
गेरा ने कहा, 11 अप्रैल को भी तेज़ हवाओं के साथ धूल भरी आंधी आई थी. उस दिन 19 लोग मारे गए थे. लेकिन इस बार जब आंधी आई तो लोग अपने घरों के भीतर सो रहे थे जब मिट्टी की दीवारें गिर गईं.
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