पहला लक्ष्य 2019 में बीजेपी को सत्ता से हटाना है: सीताराम येचुरी

सीताराम येचुरी

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    • Author, आदर्श राठौर
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

तेलंगाना के हैदराबाद में चल रहे कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी (सीपीआईएम) के 22वें अधिवेशन में पार्टी के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी को दोबारा अपना महासचिव चुन लिया है.

अधिवेशन में पार्टी की 17 सदस्यीय पोलित ब्यूरो और 95 सदस्यीय ई केंद्रीय कमिटी का गठन कर लिया गया है.

66 साल के सीताराम येचुरी के 2015 में पहली बार महासचिव बनने से पहले नौ साल तक प्रकाश करात इस पद पर बने रहे थे.

देश में पार्टी की मौजूदा स्थिति बेहद अच्छी नहीं है, त्रिपुरा में पार्टी की सरकार अब नहीं रही और भी कई राज्यों में पार्टी को चुनौती क सामना करना पड़ रहा है.

प्रकाश करात

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येचुरी कहते हैं, "सिर्फ पार्टी के सामने ही नहीं बल्कि देश के सामने भी बड़ी चुनौतियां हैं. हाल के दिनों में जो हमारी हार हुई है उसके सुधारने के लिए हमें जनाधार सुधारने की ज़रूरत है."

"हमें पार्टी को स्वतंत्र रूप से और मज़बूत करना होगा यहीं हमारी प्राथमिकता होगी. हमें इसके आधार पर जनआंदोलन छेड़ते हुए जनता के साथ जुड़ाव को और मज़बूत करना है."

सीपीआईएम-कांग्रेस के साथ गठबंधन करने के मूड में है?

सीताराम येचुरी कहते हैं कि "देश के अलग-अलग प्रांतों में हालात समान नहीं हैं ना ही मुद्दे समान हैं. इसीलिए अलग-अलग प्रांतों में अलग-अलग गठबंधन की गुंजाइश है."

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वो कहते हैं "गठबंधन पार्टियां चुनाव जीत कर आने के बाद चुनाव के बाद मोर्चे बने हैं. 2004 में चुनाव के बाद यूपीए बना, 1996 में यूनाइटेड फ्रंट मोर्चा चुनाव के बाद बना. इस बार भी हम समझते हैं कि वही प्रक्रिया होगी."

"ऐसा नहीं है कि एक ही पार्टी के साथ गठबंधन होगा और ये राज्यों और देश की परिस्थिति पर निर्भर करेगा. उत्तर प्रदेश जैसे कई प्रांतों में जहां कांग्रेस का आधार अधिक नहीं हैं वहां उनके साथ गठबंधन करने का कोई मतलब नहीं है."

येचुरी कहते हैं, "2019 के चुनावों में हमारा पहला लक्ष्य है कि आरएसएस और भाजपा की सत्ता को हटाना है हम समझते हैं देश की जनता और एकता और अखंडता के लिए ये अनिवार्य है."

सीताराम येचुरी

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येचुरी का अब तक का सफ़र

चेन्नई में जन्मे येचुरी का बचपन हैदराबाद में बीता है. साल 1974 में उन्होंने राजनीति में क़दम रखा और स्टूडेंट फेडेरेशन ऑफ़ इंडिया के सदस्य बने.

1975 में वो सीपीआईएम के साथ जुड़े गए थे. आपातकाल के दौरान गिरफ्तार किए गए अनेक नेताओं में उनका भी नाम शामिल है.

1984 में येचुरी पार्टी की केंद्रीय कमिटी में चुन लिए गए. इसके बाद पार्टी के 14वें अधिवेशन में वो पार्टी के पोलित ब्युरो के सदस्य चुने गए.

विशाखापत्तनम में 2015 में हुए पार्टी के 21वें अधिवेशन में येचुरी को निर्विरोध पार्टी का पांचवां महासचिव चुना गया था.

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