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सवर्णों के 'भारत बंद' के दौरान बिहार में हिंसा
ये तस्वीर आरा की है. जाति आधारित आरक्षण के ख़िलाफ़ मंगलवार को बुलाए गए सवर्णों के भारत बंद में बिहार में कई जगहों पर हिंसा हुई है.
ख़बरें हैं कि बिहार के आरा, भोजपुर, मुज़्ज़्फ़रपुर ज़िलों में सड़कों पर आगजनी और हिंसक झड़पें हुई हैं.
बिहार से सीटू तिवारी की रिपोर्ट
- जातिगत आरक्षण के खिलाफ मंगलवार को हुए भारत बंद का असर बिहार में सबसे ज्यादा आरा और गया में दिखा.
- आरा शहर के कलेक्टेरियट और पुलिस अधीक्षक कार्यालय के पास धारा 144 लागू है. शहर के बस स्टैंड पर बंद सर्मथकों और बंद विरोधियों के बीच जमकर रोड़ेबाज़ी हुई.
- भोजपुर एसपी अवकाश कुमार ने बीबीसी को बताया, "फिलहाल स्थिति सामान्य है. कुल 56 लोगों की गिरफ्तारी हुई है, किसी के घायल होने की सूचना नहीं है. बंद समर्थकों की एंटी पार्टी ने कथित तौर पर फायरिंग की है. 6 राउंड फायरिंग हुई है इसकी पुष्टि हुई है. बाकी शहर में पेट्रोलिंग की जा रही है और यातायात सामान्य हो गया है."
- आरा शहर में सुबह से ही रेल और यातायात बाधित कर दिया था. एनएच 84 आरा बक्सर मुख्य मार्ग पर बंद समर्थकों ने जमकर बवाल काटा तो पटना बक्सर पैसेंजर ट्रेन को रोका गया. इसके अलावा रेलवे ट्रैक पर स्लैब रखकर भी रेल परिचालन को बाधित करने की कोशिश की गई.
- उधर, गया के मानपुर ब्लॉक में बंद समर्थकों की पुलिस के साथ भिड़त हुई है जिसमें पुलिस दल के 2 लोग घायल हो गए है. यहां 6 लोगों को हिरासत में लिया गया है जिसमें एक लड़की भी शामिल है. गया के एएसपी बलिराम चौधरी ने बीबीसी को बताया, "सब कुछ सामान्य हो गया है."
- आरा और गया के अलावा बिहार के ज़्यादातर ज़िलों में बंद का मिला जुला असर ही देखने को मिला. ज़्यादातर जगह बीते 2 अप्रैल को हुए बंद की हिंसा से सबक लेते हुए बाजार बंद रहे. हालांकि यहां ये दावा भी किया जा रहा है कि बंद स्वत:स्फूर्त है.
- रोहतास के स्थानीय पत्रकार ब्रजेश के मुताबिक, "सासाराम में बाजार बंद रहा और बस सेवा बाधित रही. लेकिन बंद शांतिपूर्ण रहा और किसी तरह की हिंसा की खबर नहीं है.
भारत बंद को लेकर हिंसा की आशंका को देखते हुए राजस्थान के जयपुर और मध्य प्रदेश के भोपाल में धारा 144 लगा दी गई है.
राजस्थान के झालावाड़ ज़िले में बाज़ार बंद होने की रिपोर्ट है. आरक्षण का विरोध कर रहे लोगों ने बाइक रैली का आयोजन किया.
भारत बंद के मद्देनज़र राजस्थान, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में प्रशासन को सतर्क रहने के लिए पहले ही कह दिया गया था.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार गृह मंत्रालय ने कहा है कि किसी भी तरह की हिंसा के लिए ज़िले के डीएम और एसपी को ज़िम्मेदार माना जाएगा.
इससे पहले एससी/एसटी क़ानून में छेड़छाड़ का आरोप लगाकर दलित और आदिवासी समाज के लोगों ने दो अप्रैल को भारत बंद कराया था.
इस समूह का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट के एक फ़ैसले से दलितों और आदिवासियों के होने वाले शोषण के ख़िलाफ़ क़ानून को कमज़ोर बनाया गया है.
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