SSC परीक्षा पास कराने वाला गिरोह ऐसे करता है काम

- Author, अनंत प्रकाश
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
SSC पेपर लीक मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने चार लोगों को गिरफ़्तार किया है.
दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर उन्होंने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो एग़्जाम पास कराने के लिए लाखों रुपए लेता था.
पुलिस ने इन चारों को दिल्ली के तीमारपुर इलाक़े से देर रात गिरफ़्तार किया है. ये लोग दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं.
शुरुआती जांच में पुलिस को पता चला है कि ये लोग एग्जाम पास कराने के बदले उम्मीदवारों से 10 से 15 लाख रुपए लिया करते थे.
इस रेड में पुलिस ने 50 लाख रुपए, तीन लग्ज़री गाड़ियां, मोबाइल, पेन ड्राइव और हार्ड डिस्क ज़ब्त की है.
कैसे होता है SSC स्कैम?
दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान तमाम छात्रों ने एसएससी स्कैम में कंप्यूटरों के दूर से नियंत्रित होने की बात कही थी.

उत्तर प्रदेश पुलिस के मुताबिक़, एसएससी स्कैम में कंप्यूटरों के रिमोट एक्सेस होने का मामला सामने आया है.
यूपी की एसटीएफ़ टीम के आईजी अमिताभ यश ने बीबीसी को बताया कि आजकल SSC की परीक्षा ऑनलाइन हो रही है और इसलिए नक़ल के नए तरीक़े भी सामने आ रहे हैं.
नक़ल के तरीक़े को आगे विस्तार से समझाते हुए अमिताभ कहते हैं, "ऐसे ऑनलाइन एक्जाम में नक़ल का एक तरीक़ा ये होता है कि जिस भी सेंटर में एग्जाम हो रहा होता है, उस सेंटर के कंप्यूटर में 'मालवेयर' वायरस डाल दिया जाता है."
"ऐसा करने पर उस कंप्यूटर को रिमोट एक्सेस टूल से दूसरी जगह से इस्तेमाल कर सकते हैं. इस तरह आप उस कंप्यूटर की स्क्रीन पर जो भी हो रहा है, उसे आप बिना सेंटर पर मौजूद रहे नियंत्रित भी कर सकते हैं. इस तरह एक दूसरा आदमी एसएससी का पेपर दे सकता है. इसमें 'टीम व्यूवर' जैसे सॉफ्टवेयरों का इस्तेमाल किया जाता है."

रिमोट एक्सेस दरअसल एक ऐसी प्रक्रिया होती है जिसकी मदद से इंटरनेट के सहारे आपके सामने रखे कंप्यूटर को मीलों दूर बैठा शख़्स ऑपरेट कर सकता है. वह आपके कंप्यूटर पर टाइप कर सकता है और कंप्यूटर को बंद तक कर सकता है.
लेकिन क्या SSC का भी पेपर इसी तरह लीक हुआ?
इस पर अमिताभ कहते हैं कि SSC पेपर लीक में रिमोट एक्सेस वाले तरीक़े से घोटाला किया गया. लेकिन ऑनलाइन एग्जाम में नक़ल के कई और तरीक़े भी हैं.
उनके मुताबिक "धांधली का एक और तरीक़ा भी देखने में आ रहा है जिसमें कुछ संस्थाएं फौरी तौर पर एक कंप्यूटर लैब बना लेती हैं. इसमें एक संस्था बिल्डिंग किराए पर लेती है. फिर कंप्यूटर सिस्टम लगाकर लैब बना लेती है. और जहां भी ऑनलाइन परीक्षा हो रही है.''
''वह वहां जाकर सेंटर बन जाती है. इस स्थिति में सब कुछ लैब मालिक का होता है और वह मनचाहा फेरबदल कर सकता है. ये ज़िम्मेदारी पेपर कराने वालों की है कि ये देखा जाए कि लैब का पुराना रिकॉर्ड क्या है. लेकिन ये कोई करता नहीं है. इसमें किसी कंपनी को ठेका दे दिया जाता है"

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तीसरे तरीक़े पर बात करते हुए अमिताभ ने कहा, "एक तरीक़ा ये भी है कि एग्जाम सेंटर पर समय से पहले पेपर डाउनलोड होकर डिक्रिप्ट कर लिया जाता है. सामान्य तौर पर ऐसा पेपर से कुछ समय पहले होता है. इसमें अगर 'इनक्रिप्शन की' स्ट्रॉन्ग नहीं होगी तो बड़ी आसानी से पेपर को डिक्रिप्ट करके लीक किया जा सकेगा."
लेकिन तीनों में से कौन से तरीक़े से इस गिरोह ने पेपर लीक को अंजाम दिया वो जांच का विषय है.
आख़िर क्या है मामला?
SSC यानी कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र महीने भर से देश के अलग अलग हिस्सों में प्रदर्शन कर रहे थे.
उनकी मांग थी कि केवल 21 फ़रवरी को हुए SSC के पेपर लीक की सीबीआई जांच न हो, बल्कि पहले हुईं सभी परीक्षाओं की जांच सीबीआई से हो.
इसके बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में उनकी मांग स्वीकार करते हुए कहा था कि छात्र अब अपना प्रदर्शन रोक दे और जांच रिपोर्ट का इंतजार करें.

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इसी बीच दिल्ली और यूपी की पुलिस को ये कामयाबी हासिल हुई है.
कैसे होती है SSC परीक्षा?
एसएससी में चार चरणों में पेपर होता है जिसमें पहला चरण- कंप्यूटर आधारित परीक्षा (ऑनलाइन), दूसरा चरण - कंप्यूटर आधारित परीक्षा (ऑनलाइन), तीसरा चरण- लिखित परीक्षा (विस्तृत परीक्षा) और चौथा चरण- कंप्यूटर दक्षता/स्किल टेस्ट (सर्टिफ़िकेट जाँच) का होता है.
लेकिन इनमें से पहले दो चरण काफी अहम होते हैं जिनमें एक बड़ी संख्या में परीक्षार्थी बाहर हो जाते हैं. और इन दोनों चरणों की परीक्षा ऑनलाइन ही हो रहे हैं.

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एसएससी स्कैम के लिए कौन ज़िम्मेदार?
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में आगे की जांच शुरू कर दी है. इसके बाद ही इस घोटाले के लिए ज़िम्मेदारी किसी पर तय की जा सकेगी.
आईजी अमिताभ यश बताते हैं कि पेपर कराने का ठेका लेने वाली कंपनियां एग्जाम सेंटरों की जांच कैसे कर सकती हैं. ये उनकी क्षमता से बाहर की बात है और ये काम पेपर कराने वालों को करना चाहिए.
उन्होंने बताया कि अगर एसएससी ने उचित मानकों का पालन किया होता तो ये स्कैम होता ही नहीं.












