गोवा में बीजेपी के लिए मनोहर पर्रिकर कितने ज़रूरी?

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गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर इन दिनों बीमार चल रहे हैं. कुछ दिनों के अंतराल पर अभी तक वो दो बार अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं और अब इलाज के लिए मुंबई गए हैं.
मनोहर पर्रिकर को 15 फरवरी को मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इसके बाद अस्पताल से छुट्टी मिलने पर उन्होंने 22 फरवरी को राज्य का बजट पेश किया था.
लेकिन, पेट में दर्द और बेचैनी की शिकायत के कारण उन्हें 25 फरवरी को एक बार फिर गोवा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया था. तब उन्हें एक मार्च को छुट्टी मिल गई थी.

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अब फिर से पर्रिकर इलाज के लिए मुंबई जा रहे हैं और आगे उनके विदेश जाने की भी संभावना है. मुंबई जाने से पहले पर्रिकर ने एक कैबिनेट सलाहकार समिति का गठन किया है जो उनकी अनुपस्थिति में प्रशासनिक फ़ैसले लेगी.
लेकिन, इसके तुरंत बाद ही कांग्रेस ने बीजेपी से पर्रिकर के जगह किसी और को मुख्यमंत्री बनाने की मांग की है. कांग्रेस का कहना है कि पर्रिकर के न होने से राज्य का कामकाज प्रभावित होगा.
मनोहर पर्रिकर की बीमारी और कांग्रेस की मांग से बीजेपी की चिंताएं बढ़ना लाजमी है. गठबंधन की सरकार के साथ गोवा में आगे बढ़ रही बीजेपी के लिए पर्रिकर हमेशा एक अहम नेता रहे हैं. गोवा में भाजपा में उनके कद का कोई और नेता नहीं दिखता है.

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ऐसे में गोवा में बीजेपी के लिए पर्रिकर कितने अहम हैं और उनके न होने के क्या मायने हो सकते हैं? इस संबंध में वरिष्ठ पत्रकार संदेश प्रभुदेसाई से बात की बीबीसी संवाददाता मोहम्मद शाहिद ने. आगे पढ़ें उन्होंने क्या कहा.
गोवा की राजनीति में पर्रिकर की भूमिका
2017 के विधानसभ चुनाव में जब किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था तो अन्य दलों ने भाजपा की गठबंधन सरकार को तभी समर्थन दिया था जब मनोहर पर्रिकर मुख्यमंत्री रहे. समर्थन पर्रिकर को था भाजपा को नहीं.
अगर पर्रिकर यहां से हट गए तो सरकार गिर भी सकती है. दूसरी सरकार बन सकती है. कांग्रेस की सरकार भी बन सकती है. समर्थन देने वाले पक्ष बीजेपी को समर्थन देंगे या नहीं सब इसी पर निर्भर करता है. हालांकि, अभी ऐसी स्थिति नहीं है.

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पर्रिकर का न होना कांग्रेस के लिए मौक़ा?
ये कांग्रेस के लिए एक मौका हो सकता है. 40 सीटों की विधानसभा है में बीजेपी के 14 विधायक हैं, 3 महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी के, 3 गोवा फॉरवर्ड के और दो निर्दलीय हैं यानी 22 लोगों की गठबंधन सरकार है.
वहीं, कांग्रेस के 16 विधायक हैं जिनमें एक राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से और एक निर्दलीय है जो सरकार में नहीं है. इन 18 विधायकों के साथ बीजेपी से कोई तीन भी आ गये तो कांग्रेस की सरकार बना सकती है.
पर्रिकर इलाज के लिए छह हफ्तों के लिए गोवा से बाहर गए हैं इसलिए उन्होंने तीनों पक्षों बीजेपी, गोमंतक पार्टी और गोवा फॉरवर्ड के नेताओं की एक समिति बनाई है और ये समिति सरकार के कामकाज करेगी.

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गोवा में पर्रिकर बीजेपी की राजनीति की धुरी
पहली बात यह है कि मनोहर पर्रिकर बहुत कार्यकुशल मुख्यमंत्री रहे हैं. वो गठबंधन के सभी पक्षों को साथ लेकर चल सकते हैं.
गोवा में भाजपा के पास कोई बड़ा नेता नहीं है यानी अगर मनोहर पर्रिकर गोवा की राजनीति में नहीं रहे तो दूसरा मुख्यमंत्री कौन होगा इसके लिए बीजेपी के पास फिलहाल कोई उम्मीदवार नहीं है.












