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कौन हैं जसपाल अटवाल, जिनके साथ डिनर नहीं करेंगे ट्रूडो
कनाडा ने 'खालिस्तान समर्थक' जसपाल अटवाल को प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की डिनर पार्टी के लिए दी गई दावत रद्द कर दी है.
'खालिस्तान समर्थक' जसपाल अटवाल की कनाडा के प्रधानमंत्री की पत्नी सोफ़ी ट्रूडो के साथ एक तस्वीर के सामने आने के बाद ये फ़ैसला लिया गया है.
मंगलवार को मुंबई के इस इवेंट में जसपाल अटवाल सोफ़ी ट्रूडो के अलावा कनाडा के एक मंत्री अमरजीत सोही के साथ देखे गए.
मुंबई और दिल्ली दोनों ही जगहों पर जस्टिन ट्रूडो के कार्यक्रम में जसपाल अटवाल को न्योता दिया गया था.
डैमैज कंट्रोल
भारत में कनाडा के उच्चायुक्त नादिर पटेल ने डैमैज कंट्रोल के तहत दिल्ली में ट्रूडो के कार्यक्रम के लिए अटवाल का निमंत्रण रद्द कर दिया.
इस सिलसिले में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की तरफ़ से एक बयान भी जारी किया गया है.
ट्रूडो ने कहा, "हमने डिनर रिसेप्शन के लिए जसपाल अटवाल को दिया न्योता रोक लिया है. जिस सांसद ने ये निमंत्रण दिया था, वे इसके लिए पूरी ज़िम्मेदारी लेंगे."
"सिख और कनाडा के भारतवंशी समाज ने देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. ये दौरा दोनों देशों के रिश्तों को आगे ले जाने के लिए है.
कौन हैं जसपाल अटवाल
राजनेता, 'खालिस्तान समर्थक', कारोबारी, कोर्ट में क़त्ल की कोशिश के लिए कसूरवार ठहराया गया शख़्स - ये सारी बातें जसपाल अटवाल के लिए कही जा रही हैं.
जसपाल अटवाल एक सिख अलगाववादी थे और प्रतिबंधित संगठन इंटरनेशनल सिख यूथ फ़ेडरेशन से जुड़े रहे हैं.
साल 1986 में वैंकूवर (कनाडा) में पंजाब के मंत्री मलकियत सिंह सिद्धू की हत्या की कोशिश के लिए अटवाल को कोर्ट ने कसूरवार ठहराया था.
मलकियत सिंह सिद्धू को दो गोली मारी गई थी, लेकिन वे बच गए थे, हालांकि बाद में भारत में उनकी हत्या कर दी गई.
कनाडा की एक कोर्ट ने जसपाल अटवाल को इस अपराध के लिए 20 साल जेल की सज़ा सुनाई थी. माना जाता है कि अटवाल कनाडा की राजनीति में सक्रिय हैं.
अटवाल को भारत का वीज़ा
'खालिस्तान समर्थक' जसपाल अटवाल को भारत का वीज़ा कैसे मिला? इस पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि वो इस बात की जानकारी जुटा रहे हैं.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्त रवीश कुमार ने कहा, 'जहां तक वीज़ा की बात है, हमें नहीं मालूम कि ये कैसे हुआ, लेकिन हम ये पता करने की कोशिश कर रहे हैं.'
भारत में जस्टिन ट्रूडो की सरकार को लेकर ये आरोप लगता रहा है कि वे 'खालिस्तान समर्थकों' के प्रति सहानुभूति रखते हैं.
कनाडा के प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में जसपाल अटवाल को दिए गए न्योते को इसी से जोड़ कर देखा जा रहा है.
हालांकि इन आरोपों के जवाब में जस्टिन ट्रूडो की तरफ़ से कहा गया कि वे भारत या दुनिया में कहीं भी अलगाववाद का समर्थन नहीं करते हैं.
कनाडा में खालिस्तान की गूंज
जिस तरह ऑपरेशन ब्लू स्टार, 1984 के सिख दंगे भारत समेत पूरी दुनिया में सिखों के लिए मुद्दे हैं उसी तरह कनाडा में रह रहे सिखों के लिए भी ये बड़े मुद्दे हैं.
कनिष्क विमान दुर्घटना, इतिहास का एक काला पन्ना जिसमें मांट्रिएल से नई दिल्ली जा रहे एयर इंडिया के विमान कनिष्क 23 जून 1985 को हवा में ही बम से उड़ा दिया गया था.
हमले में 329 लोग मारे गए थे, जिनमें से अधिकांश भारतीय मूल के कनाडाई नागरिक थे.
बताया जाता है कि 1984 में स्वर्ण मंदिर से भिंडरावाले के समर्थक चरमपंथियों को निकालने के लिए ऑपरेशन ब्लू स्टार के विरोध में इसे अंजाम दिया गया था.
सिख अलगाववादी गुट बब्बर खालसा के सदस्य इस हमले के मुख्य संदिग्धों में शामिल थे.
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