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हरजीत सिंह सज्जन: होशियारपुर से कनाडा के रक्षा मंत्री तक का सफर
- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पंजाब के होशियारपुर ज़िले में जन्मे हरजीत सिंह सज्जन के पिता कुंदन सिंह सज्जन पंजाब पुलिस में हवालदार थे.
साल 1976 में उनका परिवार 'ब्रिटिश कोलंबिया' चला गया था. उस वक़्त हरजीत सिंह सिर्फ पांच साल के थे.
कनाडा प्रवास के शुरुआती दौर में सज्जन के परिवार को काफी संघर्ष करना पड़ा.
जहाँ कुंदन सिंह सज्जन एक आरा मिल में काम करने लगे, वहीं हरजीत की माँ पास के खेतों में मज़दूरी करती थीं.
दक्षिण वैंकूवर से वर्ष 1989 में पढ़ाई पूरी करने के बाद हरजीत 'द ब्रिटिश कोलंबिया रेजिमेंट' में भर्ती हो गए.
पहला सिख
वर्ष 1991 में फ़ौज में कमीशन अफ़सर बनने के बाद वो लेफ्टिनेंट कर्नल के पद तक पहुंचे. वो पहले सिख थे जिनके हाथों में कनाडा की फ़ौज की किसी रेजिमेंट की कमान सौंपी गई थी.
फ़ौज में भी उनका करियर काफी सराहा गया. ख़ास तौर पर अफ़ग़ानिस्तान में अपनी तैनाती के दौरान उन्होंने कई मेडल भी जीते.
फिर वो पुलिस विभाग में शामिल हो गए. फ़ौज में अपने कार्यकाल के दौरान उनकी पोस्टिंग बोस्निया और अफ़ग़ानिस्तान में रही.
नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने कनाडा में अपनी कंसल्टेंसी शुरू की जिसके तहत वो कनाडा की पुलिस और फ़ौज को गुप्तचर के तौर तरीकों की ट्रेनिंग देते थे.
वर्ष 2014 में उन्होंने अपने जीवन की नई पारी तब शुरू की जब उन्होंने लिबरल पार्टी से आम चुनाव लड़ा.
खलिस्तान समर्थक?
वो दक्षिण वैंकूवर सीट से पार्टी के प्रत्याशी बनाए गए और उन्होंने 'कंज़र्वेटिव पार्टी' के वाय यांग को पांच हज़ार से भी ज़्यादा वोटों से हराया.
मगर 'वर्ल्ड सिख ऑर्गेनाईजेशन' से जुड़ने के बाद उनकी काफी आलोचना हुई. इस संगठन के कई सदस्य ख़ालिस्तान के समर्थक माने जाते हैं.
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के मंत्रिमंडल में कुल चार सिख मंत्री हैं और हरजीत सिंह सज्जन को सबसे महत्वपूर्ण विभाग यानी रक्षा मंत्रालय सौंपा गया है.
ट्रूडो के मंत्रिमंडल में हरजीत के अलावा नवदीप बैंस, बर्दिश चग्गर और अमरजीत शाही शामिल हैं.
हाल ही में हरजीत सिंह सज्जन भारत के दौरे पर आए तो विवाद तब शुरू हुआ जब पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने उनसे मिलने से इंकार कर दिया था.
कैप्टेन अमरिंदर ने सज्जन पर ख़ालिस्तान समर्थक होने का आरोप लगाया लेकिन उनकी ओर से इसका खंडन किया गया है.