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झारखंड: डायन बताकर मां-बेटी के कपड़े उतरवाए, पेशाब पिलाया
- Author, रवि प्रकाश
- पदनाम, दुलमी (रांची) से, बीबीसी हिंदी के लिए
"वो 15 फ़रवरी की सुबह थी. गुरुवार का दिन था. हम लोग अपने घर में थे. तभी मेरे भैयाद (पट्टीदारी) के लोग घर का दरवाज़ा पीटने लगे. इन लोगों ने हम माँ-बेटी पर डायन होने का आरोप लगाया. हमारे मना करने के बावजूद वे लोग हम दोनों को श्मशान घाट ले गए.
वहाँ हमारे कपड़ों पर इंसानी मल और पेशाब फेंका. फिर हमारे मुँह में भी डाल दिया. उन लोगों ने कुदाल देकर हमीं से मिट्टी कटवाई. उनके साथ नाई भी था. उससे हमारा मुंडन करा दिया. हमारे कपड़े खुलवा दिए. इसके बाद हमें पहनने के लिए सफ़ेद साड़ी दी लेकिन ब्लाउज और पेटीकोट नहीं दिया. सिर्फ साड़ी से हमने अपना शरीर ढंका.
हमें उन्हीं कपड़ों में पूरे गाँव में घुमाया गया. तब तक बहुत लोगों की भीड़ जमा हो गई, लेकिन कोई हमें बचाने नहीं आया. बाद में उनलोगों ने हमें हमारे घर छोड़ दिया."
एतवरिया देवी (बदला हुआ नाम) यह कहते हुए पसीने से तर-बतर हो जाती हैं. वे रांची से करीब 60 किलोमीटर दूर सोनाहातू थाने के बोंगादार दुलमी गांव में रहती हैं. गांव वालों ने उन्हें डायन करार देकर मैला पिलाया, इस कारण वो इन दिनों चर्चा में हैं.
'बहुत डर गए थे हम लोग'
एतवरिया देवी ने बीबीसी से कहा, "हम लोग इस घटना के बाद बुरी तरह डर गए. गाँव का कोई भी आदमी हमारी मदद के लिए तैयार नहीं था. हमने दहशत में वह रात काटी. अगली सुबह 16 फ़रवरी को मैं अपनी बेटी के साथ अपने मायके पीलित (ईचागढ़) चली गई. वहाँ भाई के बेटे को सारी बात बताई. उसने हमें हिम्मत दी. हमारे साथ थाने आया. हमलोगों ने सोनाहातू थाने में इसकी नामजद रिपोर्ट दर्ज करवाई."
वो कहती हैं, "अब पुलिस ने सभी लोगों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन अभी भी डर लगता है. मेरी बेटी शादीशुदा है. कुछ साल पहले बगल के टांगटांग गाँव में उसकी शादी की थी. अब उसके ससुराल वाले क्या बोलेंगे, यह सोचकर डर लगता है. जिस ओझा ने हमें डायन करार दिया, वो उसी गाँव का रहने वाला है."
ऐसा क्यों?
एतवरिया देवी की बेटी फूलमती (बदला हुआ नाम) ने बीबीसी से कहा, "मेरे रिश्तेदार अक्षय के घर में झरी देवी की बीते 3 फ़रवरी को मौत हो गई थी. वो लंबे समय से बीमार थीं. इसके बाद 14 फ़रवरी की रात अक्षय, उसके भाई विजय और माँ मालती देवी की भी तबीयत ख़राब हो गई. लोगों ने डॉक्टर को नहीं दिखाया. मेरे ससुराल के गाँव से मिसिया ओझा को बुला लाए. उसने मुझे और मेरी माँ को डायन करार दे दिया. ओझा ने उनकी बीमारी और झरी देवी की मौत के लिए हमें ज़िम्मेदार करार दिया. इसके बाद 15 फ़रवरी की सुबह हमारे साथ ये घटना हो गई."
गांव में दहशत
दुलमी के मुखिया तपन सिंह मुंडा ने बीबीसी को बताया कि इस बात की भनक लगने पर उन्होंने गाँव के लोगों को समझाया था, लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं मानी. अब गाँव के लोग पुलिस से डरे हुए हैं. रोज कोई न कोई उनके गांव में आ रहा है.
तपन सिंह कहते हैं, "कुछ स्वयंसेवी संस्थाओं के लोग भी आए थे. उन लोगों ने पीड़ित माँ-बेटी को सम्मानित किया है. दरअसल, शिक्षा नहीं होने के कारण गांव के लोग अंधविश्वासी हो गए हैं. इसके लिए जागरूकता अभियान चलाने की ज़रूरत है."
आरोपियों में महिलाएं भी
राँची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कुलदीप द्विवेदी ने बताया कि पुलिस ने डायन प्रताड़ना के इस मामले के सभी नामजद अभियुक्तों को गिरफ़्तार कर लिया है. मामले की जांच की जा रही है, साथ ही जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है. गांव में पुलिस की एक टीम कैंप कर रही है.
एसएसपी कुलदीप द्विवेदी ने कहा, "इस घटना की जानकारी मिलते ही हम लोगों ने तत्काल एक टीम बनाकर इसकी जाँच की. पुलिस ने कुछ ही घंटे के अंदर सभी 11 अभियुक्तों को गिरफ़्तार कर लिया. अब हमारी कोशिश होगी कि भविष्य में ऐसी कोई घटना नहीं हो. गिरफ़्तार लोगों में तीन महिलाएँ और ओझा भी शामिल है. इन लोगों ने अंधविश्वास में पड़कर ऐसी हरकत की थी."
सपना आया था
इस बीच, गिरफ्तार अभियुक्तों ने जेल जाने से पूर्व मीडिया से कहा कि उन्हें सपना आया था कि गांव में बीमारी की जड़ यही मां-बेटी हैं. इसलिए हमने उनका 'शुद्धीकरण' कराया. नहीं कराते तो गांव में और लोगों के बीमार होने का ख़तरा रहता.
झारखंड में डायन प्रताड़ना के ऐसे कई मामले पहले भी होते रहे हैं. झारखंड पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, फ़रवरी 2017 से जनवरी-2018 के बीच ऐसे मामलों में कुल 41 लोगों की हत्या हो चुकी है.