जम्मूः बलात्कार के अभियुक्त के समर्थन में लहराए गए तिरंगे
- Author, माजिद जहांगीर
- पदनाम, श्रीनगर से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
जम्मू के कठुआ ज़िले में आठ साल की आसिफ़ा की कहानी उस समय शुरू हुई, जब उनका अचानक अपहरण हो गया था.

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ये बीते दस जनवरी की बात है. आसिफ़ा के गायब होने के एक दिन बाद घरवालों ने पुलिस में गुम होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी.
ठीक सात दिनों के बाद आसिफ़ा की लाश कठुआ के बसाना गांव में मिली थी.
जिस दिन आसिफ़ा का अपहरण हुआ था, उस दिन वो पास के एक जंगल में अपनी भेड़-बकरियां चराने गई थीं. आसिफ़ा गुज्जर समुदाय से थीं.
आसिफ़ा की लाश मिलने के बाद परिजनों ने इलाके में प्रदर्शन किया और आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग की. बदले में उन्हें पुलिस की लाठियां खानी पड़ी थी.
पुलिस अधिकारियों का निलंबन
जम्मू और कश्मीर विधानसभा में आसिफ़ा की हत्या और बलात्कार की गूंज कई दिनों तक सुनाई देती रही.
विपक्ष के हंगामे के बाद सरकार ने सदन में बताया कि इस सिलसिले में पंद्रह साल के एक किशोर को गिरफ्तार किया गया है.
सदन में सरकार के बयान और पंद्रह वर्ष के किशोर की गिरफ़्तारी के दावे के बावजूद आसिफ़ा के असल गुनहगार की गिरफ़्तारी का मामला ज़ोर पकड़ता गया.
दबाव में सरकार ने इलाके के पुलिस अधिकारी को निलंबित किया और मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है.
जम्मू कश्मीर पुलिस ने 10 फरवरी को मामले में एक पुलिसकर्मी को गिरफ्तार किया है.
गिरफ्तार पुलिसकर्मी का नाम दीपक खजूरिया है और उनकी उम्र 28 साल है. तीन दिन पहले भी एक और पुलिसकर्मी को गिरफ्तार किए गया है.
दीपक खजूरिया हीरा नगर पुलिस स्टेशन में तैनात थे. वो उस टीम में शामिल थे जो आसिफा को तलाशने जंगल गई थी.

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सीबीआई जांच की मांग
पुलिस के हवाले से छपी ख़बरों में बताया गया है कि अभियुक्त ने आसिफ़ा को एक हफ्ते तक अपने साथ रखा था.
इस दौरान उन्होंने आसिफ़ा को नशे की गोलियां भी खिलाई थी.
दीपक खजूरिया की गिरफ्तारी के ठीक सात दिन बाद कठुआ में हिंदू एकता मोर्चा ने उनके समर्थन में रैली का आयोजन किया.
प्रदर्शन में कथित तौर पर बीजेपी के कुछ लोग भी शामिल थे. प्रदर्शनकारी हाथों में तिरंगा लेकर आरोपी की रिहाई की मांग कर रहे थे.
बीजेपी के महासचिव अशोक कौल ने बीबीसी को बताया, "क्षेत्र के विधायक लोगों के बीच रहते हैं. यही कारण है कि वो उस सभा में गए थे."
क्या बीजेपी रैली निकालने वालों पर कार्रवाई करेगी, इस सवाल पर अशोक कौल ने कहा, "बीजेपी घटना की निंदा करती है. हम मामले में सीबीआई जांच की मांग करते हैं. जो भी दोषी हो, उसे सजा मिलनी चाहिए."

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'गुज्जरों का बहिष्कार'
इलाके के सामाजिक कार्यकर्ता और वकील तालिब हुस्सियन कहते हैं कि गुज्जरों के खिलाफ न सिर्फ रैली निकाली गई बल्कि अब उनका बहिष्कार भी किया जाने लगा है.
उन्होंने कहा, "उन्हें यह धमकी दी गई है कि बुधवार तक वे अपना घर खाली कर यहां से चले जाएं. उनके पानी की सप्लाई रोक दी गई है. लोगों से ये भी अपील की जा रही है कि वे गुज्जरों से दूध न खरीदें."
वो आगे बताते हैं कि यह सबकुछ पहली बार नहीं हो रहा है. ये सब कई दिनों से चल रहा है. तालिब ने कहा कि रैली में कांग्रेस के लोग भी शामिल थे. अब कांग्रेस और भाजपा के बीच टक्कर है कि कौन ज्यादा कट्टर हिंदू है.
कुठवा में रैली के बाद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने ट्वीट किया, "मुझे इस बात का दुख है कि पकड़े गए आरोपी के समर्थन में कठुआ में एक रैली निकाली गई. रैली में तिरंगे भी लहराए गए. यह तिरंगे का अपमान है. कानून अपना काम करेगा."
वहीं, विपक्षी नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर फ़ारूक़ अब्दुल्लाह ने भी इस तरह की रैली और तिरंगे लहराने को खतरनाक बताया है.
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अलगाववादी की धमकी
कश्मीर के अलगाववादियों ने धमकी दी है कि अगर आसिफ़ा को इंसाफ नहीं मिला वो वे राज्य में आंदोलन शुरू करेंगे.
आसिफ़ा के परिजनों ने बीते दिन कश्मीर के अनंतनाग में प्रदर्शन करते हुए कहा था कि अगर उन्हें इंसाफ नहीं मिला तो वे एक बड़ा आंदोलन छेड़ेंगे.
आसिफ़ा के परिवार खानाबदोश है जो छह महीने जम्मू में रहता है और छह महीने कश्मीर में.
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