मोदी फ़लस्तीन में, हेलीकॉप्टर जॉर्डन का, सुरक्षा इसराइल की

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भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीन देशों की यात्रा के तहत शनिवार को फ़लस्तीन के रामल्लाह पहुंचे. इसके लिए उन्हें इसराइली वायुसेना ने सुरक्षा प्रदान की और जॉर्डन ने अपना हेलीकॉप्टर दिया.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्विटर पर लिखा, "आज इतिहास लिख गया, पहली बार कोई भारतीय प्रधानमंत्री फ़लस्तीन पहुंचे. रामल्लाह जाने के लिए उन्हें जॉर्डन की सरकार ने हेलीकॉप्टर दिया तो उनकी सुरक्षा इसराइली वायुसेना ने की."
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भारतीय प्रधानमंत्री 9 फरवरी से फ़लस्तीन, ज़ॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात के अपने चार दिवसीय दौरे पर हैं. शनिवार को वो फ़लस्तीन क्षेत्र में गज़ा पट्टी पर स्थित रामल्लाह पहुंचे.
हाल में अमरीकी रष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने येरूशलम को इसराइल की राजधानी के रूप में स्वीकार किया था. इसके बाद इस जगह को पवित्र मानने वाले और इस पर अपना दावा करने वाले फ़लस्तीन और इसराइल के बीत तनाव और गहरा गया था.
हाल में इसराइल के प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने भारत का दौरा किया था और मोदी और उनकी मुलाक़ात हुई थी. जिसके बाद फ़लस्तीन की उनकी यात्रा को बेहद अहम माना जा रहा है.

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फ़लस्तीन जाने वाले मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं. उनके पहले पूर्व 1960 में भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने गज़ा पट्टी का दौरा किया था लेकिन उस दौरान फ़लस्तीन क्षेत्र अस्तित्व में नहीं आया था.
रामल्लाह पहुंच कर मोदी फ़लस्तीन के पूर्व राष्ट्रपति यासिर अराफ़ात की कब्र पर गए और फूल चढ़ा कर उनके प्रति सम्मान प्रकट किया.
यासिर अरफ़ात पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री इंदिया गांधी के बेहद करीबी माने जाते हैं. वो इंदिरा को अपनी बड़ी बहन कहा करते थे.

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सोशल मीडिया पर हो रही है चर्चा
सोशल मीडिया पर उनके फ़लस्तीन दौरे के बारे में लोग कई तरह की बातें कर रहे हैं.
हितेन पारिख लिखते हैं, "राम और अल्लाह उन्हें शक्ति देंगे ताकि विश्व में शांति और समृद्धि की स्थापना की जा सके."
आशीष पृष्टि ने लिखा, "ये प्रधानमंत्री के व्यक्तित्व और सभी देशों के साथ उनके संबंधों को दर्शाता है. ये बढ़िया कूटनीति का उदाहरण है."
पंकज भालेराव ने लिखा, "इसे कहते हैं स्वैग." गौरव सिंह ने लिखा, "ये है जलवा."

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नीवन मलिक लिखते हैं, "इसराइली सीक्रेट सर्विस मोसाद मोदी की रक्षा में जुटी है."
नीतू सिंह लिखती हैं, "येरुशलम मामले में मोदी जी को ज्ञान झाड़ने वाले लोग जरा बारीकी से मोदीजी की वैश्विक व्यवहार कुशलता समझें."
के सिंघानिया ने लिखा, "इसराइल और फ़लस्तीन के बीच संबंध अच्छे नहीं हैं ऐसे में इस बारे में सोच पाना भी मुश्किल है."

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विनायक राव लिखते हैं, "ये थोड़ा अटपटा है लेकिन दिलचस्प है कि एक तीसरे क्षेत्र की यात्रा के लिए दो देशों ने साथ मिल कर व्यवस्था की."
एनके राव नाम के एक ट्विटर हैंडल ने लिखा, "क्या? एक मुसलमान बहुल देश के हेलीकॉप्टर में? ये क्या है."
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