You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
सुषमा स्वराज को हर दिन फ़ोन क्यों कर रहीं ये पत्नियां?
- Author, गुरप्रीत कौर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
एनआरआई से शादी करके परेशानी झेल रही और मदद मांगने वाली महिलाओं की तादाद देश में लगातार बढ़ रही है.
पिछले पांच सालों में ऐसी शिकायत करने वालों कि तादाद दोगुनी हुई है.
दिल्ली महिला आयोग के पास 2013 में जहां 361 महिलाओं ने शिकायत की थी, वहीं 2017 में उन्हें 528 शिकायतें मिली हैं.
इनमें से ज़्यादातर औरतों की दो तरह की शिकायतें हैं. कई औरतों के पति शादी कर उन्हें भारत में छोड़ कर चले गए. कई ऐसी हैं जिन्हें साथ तो ले गए, लेकिन वहां प्रताड़ित किया जा रहा है. विदेश में उनकी मदद करने वाला कोई नहीं.
पंजाब में मोहाली ज़िले की रहने वाली रमन की कहानी उनमें से एक है.
"मेरे जेठ के 16 साल के बेटे ने जेठ के सामने मेरे साथ जबर्दस्ती करने की कोशिश की. उस समय कमरे में मेरे ससुराल वाले भी मौजूद थे. मेरी ननद मुझे फ़ोन पर गालियां रिकॉर्ड करके भेजती हैं. ससुराल तक तो ठीक था, लेकिन मायके में भी मेरे ससुराल वाले जीने नहीं दे रहे."
फ़ोन पर रोते हुए रमन ने ये कहानी बीबीसी को सुनाई. उनकी शादी 4 दिसंबर 2016 को कनाडा में रहने वाले हरप्रीत से हुई थी. शादी के तकरीबन दो महीने बाद ही हरप्रीत रमन को ससुराल में छोड़ कनाडा अपने काम पर लौट गया.
जाते समय रमन से वादा किया कि वो 'जल्द' ही उसे भी कनाडा बुला लेगा. लेकिन 'जल्द' कभी नहीं आया.
क्या कहतें हैं आंकड़े
ताज़ा आंकड़ों से पता चला है कि ये इंतज़ार अकेले रमन का नहीं है. विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक एक जनवरी 2015 से 30 नवंबर 2017 के बीच मंत्रालय के एनआरआई सेल में पति से तंग आई महिलाओं के 3,328 शिकायत भरे फ़ोन कॉल आए.
यानी हर 8 घंटे कम से कम एक महिला ने मंत्रालय से फोन कर मदद मांगी.
50% से ज्यादा महिलाएं पंजाब से
विदेश मंत्रालय के मुताबिक़ परेशान पत्नियों में से सबसे ज्यादा पंजाब की हैं. दूसरे और तीसरे नंबर पर तेलंगाना और कर्नाटक की महिलाएं हैं.
रमन की कहानी ऐसी थी जिसमें पति ने शादी के बाद पत्नी को छोड़ दिया था, लेकिन पंजाब की दूसरी लड़की मनदीप का क़िस्सा थोड़ा फ़िल्मी है.
मॉल में उसको एक बार देख, लड़के वालों ने ख़ुद उससे शादी करने की इच्छा जाहिर की. लड़की वालों ने पहले तो मनदीप की पढ़ाई का बहाना बना कर मना कर दिया.
लेकिन हाथ आए एनआरआई लड़के को वो गवांना भी नहीं चाहते थे. आख़िरकार 22 मार्च 2015 को हरजोत से मनदीप की शादी करा दी गई. वो भी कनाडा में रहता है. लेकिन कहां इसका कोई अंदाज़ा मनदीप को नहीं है.
शादी के पांच महीने तक वो साथ रहे. फिर पति कनाडा चले गए, लेकिन वहां जाने पर दोनों के बीच सिर्फ़ एक बार बात हुई.
वो बताती हैं कि एक दिन उनके ससुर जो कि रिटायर्ड पुलिस कर्मी हैं, ने बंदूक की नोक पर कागज़ पर लिखवाया कि मैं अपने पति से तलाक़ लेना चाहती हूं.
ताज्जुब की बात ये है कि रमन और मनदीप दोनों ने विदेश मंत्रालय के एनआरआई सेल में शिकायत नहीं की है. दोनों ने स्थानीय पुलिस में अपना मामला दर्ज़ कराया है.
यानी विदेश मंत्रालय के आंकड़े भी पूरी तस्वीर बयां नहीं करते.
शिकायत कैसे और कहां करें?
क़ानून के मुताबिक एनआरआई शादियों से जुड़े मामलों की शिकायत कोई भी लड़की राष्ट्रीय महिला आयोग से कर सकती है.
आयोग शिकायत की एक कॉपी विदेश मंत्रालय और एक कॉपी पुलिस को भेजती है. आयोग स्थानीय पुलिस की मदद से दोनों पक्षों से बात करती है.
अगर लड़के के ख़िलाफ़ रेड अलर्ट नोटिस जारी करना है तो पुलिस का इसमें अहम रोल होता है.
विदेश मंत्रालय का क्या है किरदार?
फिर विदेश मंत्रालय उस देश से संपर्क करता है जहां लड़का रहता है.
लड़की के पास जो भी सबूत हों वो पेश कर सकती है. जैसे कि पति के पासपोर्ट की कॉपी, कोई और जानकारी.
अगर लड़के की कंपनी का पता हो तो राष्ट्रीय महिला आयोग कंपनी से भी संपर्क करता है. इस तरीके से लड़के पर ज्यादा दबाव बन सकता है. जब लड़के की नौकरी पर बात आती है तो वो मामले को सुलझाने की जल्दी कोशिश करता है.
राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयरपर्सन रेखा शर्मा बताती हैं कि कई मामले काफ़ी पेचीदा होते हैं. अगर एनआरआई पति भारत का नागरिक ना रहा हो और उसका पासपोर्ट किसी और देश का हो तो केस मुश्किल होता है, क्योंकि इसमें दो से तीन देश शामिल हो जाते हैं.
इसके आलावा ऐसी भी कई शिकायतें आती है जहां एनआरआई लड़के पत्नियों को विदेश ले जाकर वहां शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित करते हैं.
विदेश मंत्रालय के मुताबिक इन मामलों में महिलाएं उस देश में भारतीय दूतावास को संपर्क कर सकती है. जिसके बाद वहां का भारतीय दूतावास, भारत के विदेश मंत्रालय से संपर्क कर महिला की मदद करता है.
एनआरआई पतियों की ऐसी पत्नियों की विदेश मंत्रालय कुछ चुनिंदा एनजीओ के ज़रिए आर्थिक और क़ानूनी मदद भी करता है.
क्या है समाधान?
रेखा शर्मा कहती हैं कि इसके लिए अलग से सेल या टीम बनाने की जरूरत है.
उनके मुताबिक वो कोशिश कर रही हैं कि राष्ट्रीय महिला आयोग, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, विदेश मंत्रायल और गृह मंत्रालय मिलकर इन समस्याओं का समाधान करें. ना कि शिकायतें इधर से उधर फॉरवर्ड करने में उलझें.
(पहचान छुपाने के लिए नाम बदल दिए गए हैं.)
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)