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पत्नी से ख़फ़ा पति ने बुत से रचा ली शादी
- Author, नारायण बारेठ
- पदनाम, जयपुर से बीबीसी हिंदी के लिए
मोहब्बत के अफ़सानों में जब हमसफ़र नज़र फेर ले तो टूटा दिल उसे पत्थर के सनम कह कर दर्द बयां करता है, मगर कोटा के राजाराम जैन 'कर्मयोगी' ने पत्थर की प्रतिमा से शादी कर अपनी शरीके ज़िंदगी और पत्नी अलका से रिश्ता तोड़ लिया.
अपने पति के इस कदम पर अलका हैरान और परेशान हैं. अलका कहती हैं, ''मुझे समझ नहीं आ रहा कि उन्होंने ऐसा क्यों किया. वे मेरे पति हैं, परमेश्वर हैं.''
न कोई बैंड बाजे, न शादी के गीत और न नाचते गाते बाराती. न कोई सकुचाती हुई दुल्हन वहां थी, लेकिन वर का भाव लिए राजाराम जैन कुछ साधु संतों के साथ कोटा के मंगल भवन पहुंचे और स्त्री की आदमकद पाषाण प्रतिमा को थोड़ी देर तक निहारा.
फिर साधु संतों के आशीर्वचनों के बीच उस पत्थर की प्रतिमा को जयमाला पहना दी.
सोलह हज़ार रुपये में बनी मूर्ति
राजाराम जैन ने यह प्रतिमा तक़रीबन सोलह हजार रुपये में तैयार करवाई. वे कहते हैं, ''अब यही मेरी पत्नी है. मैं आजीवन शादी समारोह में भाग नहीं लूंगा.''
राजाराम जैन का कहना है कि उन्होंने 'पत्नी अलका से वैचारिक मतभेद होने के बाद अलग होने का फ़ैसला किया है.'
प्रतिमा को पार्वती नाम दिया गया है.
राजाराम जैन ने अलका दुलारी से भी ऐसे ही अनूठे ढंग से शादी की थी. पांच साल पहले 12 दिसंबर 2012 को बारह मन लकड़ी की चिता सजा कर अंतरजातीय विवाह रचाया था.
पिछली शादी भी काफ़ी अनूठी थी
खुद को सामाजिक कार्यकर्ता कहने वाले राजाराम कहते हैं कि, ''उस वक्त हमने बारह संकल्प लिए थे. इसमें देहदान, संतान पैदा न करने और दीन दुखियों की ख़िदमत जैसे संकल्प शामिल थे. इसमें लावारिस शवों के दाह संस्कार का संकल्प भी शामिल था.''
राजाराम जैन ने यह सब जिस दिन किया, उस दिन उनके विवाह की पांचवीं वर्षगांठ थी.
उनके इस फ़ैसले ने अलका को भावुक कर दिया.
बीबीसी से बात करते हुए अलका ने कहा कि ''मुझे पता भी नहीं चला जब ये सब हुआ. मैं तो घर पर पकवान बना रही थी. मुझे ये तो पता था कि ये हर बार बारह तारीख़ को कुछ-कुछ करते हैं पर ऐसा करेंगे इसका अंदाज़ा नहीं था.''
अलका कहती हैं कि अगर उनसे कोई ग़लती हुई है तो वो माफ़ी मांगने को तैयार हैं.
अलका एक लोक कलाकार हैं और उनका कहना है कि वो भारत के बाहर भी अपनी नृत्य कला का प्रदर्शन कर चुकी हैं.
दोनों अब भी एक ही छत के नीचे रहते हैं, लेकिन सहसा एक छत के नीचे दुनिया अलग-अलग हो गई है.
राजाराम जैन कहते हैं, ''मैं अलका का पूरा ध्यान रखता हूँ, ज़रूरतें भी पूरी करता हूँ, मगर मुझे लगा हमने जो संकल्प साथ-साथ लिए थे, उसमें अलका ने मेरा साथ नहीं दिया.''
'पत्नी ने वादे नहीं निभाए'
राजाराम जैन ने बताया कि कोटा की वैवाहिक अदालत में अलग होने के लिए याचिका दायर कर दी गई है. उसमें भी यही दलीलें दी गई हैं कि पत्नी ने विवाह बंधन के वक़्त व्यक्त संकल्पों में उनका साथ नहीं दिया.
उधर अलका कहती हैं कि ''पांच साल के वैवाहिक जीवन में मैंने हर कदम पर उनका साथ दिया है. अब भी साथ हूँ और सब कुछ ठीक हो जाएगा.''
शायर कहते हैं कि मोहब्बत से किसी पत्थर दिल में भी प्यार का झरना बहने लगता है. राजाराम कर्मयोगी ज़रूर जानते होंगे कि वो पाषाण प्रतिमा तो बेजान है. किसी बुतसाज़ ने उस पत्थर को मूर्ति बना तो दिया लेकिन उसमें इंसान का धड़कता दिल नहीं है.
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