अंडर-19 विश्व कप में शानदार जीत के दो धुरंधर, मनजोत कालरा और इशान पोरेल

    • Author, सूर्यांशी पांडे
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ अंडर-19 विश्वकप फ़ाइनल में शतक बनाकर मनजोत कालरा ने भारत के माथे पर शगुन का टीका लगा दिया.

उन्होंने 102 गेंदों पर 101 रन बनाए. अंडर-19 क्रिकेट करियर का उनका पहला शतक भारत को विश्व कप जिताने के काम आया.

उनके बड़े भाई हितेश कालरा ने दिल्ली के इस खिलाड़ी को क्रिकेट की दुनिया से रूबरू कराया.

मनजोत कालरा के चचेरे भाई चेतन मेहता बताते हैं कि मनजोत के बड़े भाई हितेश कालरा को बचपन से क्रिकेट देखने और खेलने का शौक था. लेकिन वक़्त के साथ बड़े भाई का शौक छोटे भाई का जुनून बन गया.

इसके बाद मनजोत के माता-पिता ने उनको दिल्ली की तरफ से खिलाने का लक्ष्य बना लिया और दिल्ली क्लब, एल बी शास्त्री में दाखिला करवा दिया.

मनजोत कालरा के पिता, प्रवीण कालरा पेशे से फलों के होलसेल व्यापारी हैं.

प्रवीण कालरा ने बीबीसी को बताया कि अपने काम के बाद वह ख़ुद एकेडमी में अपने बेटे के लिए लंच लेकर जाते थे और चार घंटे खड़े होकर प्रैक्टिस कराते थे.

दिल्ली क्लब, एल बी शास्त्री के कोच संजय भारद्वाज बताते हैं कि मनजोत कालरा के खेल को तीन शब्दों में समेटकर बताया जाए तो यह खिलाड़ी 'कूल, काम और कंसिस्टेंट' है यानी शांत, अनुशासित और लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाला खिलाड़ी है.

2012 में तीसरा U-19 विश्वकप जीतने वाले टीम के कप्तान रहे उन्मुक्त चंद का कहना है कि इस टीम का हर खिलाड़ी राहुल द्रविड़ की बेहतरीन कोचिंग की बानगी पेश करता है और मनजोत कालरा उनमें से एक हैं.

बाएं हाथ के बल्लेबाज़ मनजोत कालरा के शतक के बाद अब आईपीएल के आगामी सीज़न में भी उन पर निगाहें होंगी. दिल्ली के इस खिलाड़ी को दिल्ली डेयर डेविल्स ने ही 20 लाख रुपये में ख़रीदा है.

बल्लेबाज़ बनना चाहते थे इशान पोरेल

मनजोत कालरा अपनी पारी से टीम को जीत की ओर ले गए, लेकिन इसकी नींव नौजवान भारतीय गेंदबाज़ों ने ही रखी. इशान पोरेल, शिवा सिंह और केएल नागरकोटी की पेस तिकड़ी ने दो-दो विकेट लेकर ऑस्ट्रेलियाई टीम की कमर तोड़ दी. खब्बू स्पिनर अनुकूल रॉय ने भी दो विकेट लिए.

इशान पोरेल के पिता चंद्रनाथ से बीबीसी ने बात की. उन्होंने बताया कि इशान की मां भले ही अपने बेटे का साथ देने के लिए मैदान पर नहीं जा पाती लेकिन उसके सारे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मैच वह घर में कमरा बंद करके देखती हैं.

वह बताते हैं, "कमरा बंद कर लेती हैं और बेटे का हर मैच देखती हैं. और जबतक नतीजा नहीं आता वहीं बैठीं रहतीं हैं."

इशान ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ हुए सेमीफ़ाइनल में भी चार विकेट लिए थे.

अपने बेटे के बारे में भावुक होते हुए इशान के पिता, चंद्रनाथ ने बताया, "इशान पहले बल्लेबाज़ बनना चाहता था लेकिन बंगाल क्लब के कोच प्रदीप मंडल ने उसके लंबे कद को देखते हुए कहा कि उसको तेज़ गेंदबाज़ी करनी चाहिए."

अपने कोच की बात मानते हुए पश्चिम बंगाल के इस खिलाड़ी ने रफ़्तार पर काम करना शुरू किया.

इशान पोरेल के पिता चंद्रनाथ पेशे से ईस्टर्न रेलवे के कर्मचारी हैं. चंद्रनाथ बताते हैं कि वह ख़ुद भी पहले कबड्डी के खिलाड़ी थे और इशान जब दस साल की उम्र से ही क्रिकेट के लिए रुझान दिखाने लगा तो उन्होंने और उनकी पत्नी ने उसको क्रिकेट में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया.

वह कहते हैं, "इशान पोरेल द. अफ्रीका के तेज़ गेंदबाज़ डेल स्टेन और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ ब्रेट ली को अपना आदर्श मानते हैं."

चोट से उबरकर लौटे

इशान पोरेल के जुनून की एक मिसाल तो U-19 विश्वकप में ही देखने को मिल गई थी.

विश्वकप में जब ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ भारतीय टीम अपना पहला मैच खेलने उतरी थी तो पहले चार ओवर फ़ेंकने के बाद इशान पोरेल चोटिल हो गए थे.

जिसके बाद उनकी जगह आदित्य ठाकरे आए लेकिन केवल तीन मैच के बाद वह चोट से उबर कर मैदान पर लौटे और फिर आज के इतिहास का हिस्सा बन सके.

अनूठे गेंदबाज़ी एक्शन वाले इस तेज़ गेंदबाज़ ने न्यूज़ीलैंड की पिचों का मिजाज़ बख़ूबी भांपा, लेकिन आईपीएल की किसी भी टीम ने उन पर दांव नहीं लगाया. शायद इसका उन्हें अफ़सोस रहेगा.

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