आठ की क्षमता, बिठाए 40, समंदर में डूबी नाव

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''मैंने देखा इतने सारे लोग छोटी सी नाव पर बैठे हैं. मैं हैरान था. तभी मेरी आंखों के सामने वो नाव हिचकोले खाने लगी और देखते ही देखते समुद्र में पलट गई.''
ये शब्द हैं सनत तन्ना के. सनत ने जिस मंज़र को बयान किया वो शनिवार को महाराष्ट्र के पालघर जिले में डहाणु परनका तट पर हुई एक दुर्घटना का है.
हादसे का शिकार हुई नाव में करीब 35 से 40 छात्र सवार थे. समुद्र में पलटी नाव में बैठे 32 छात्रों को बचा लिया गया जबकि तीन के शव बरामद किए गए हैं.
जिन तीन छात्राओं के शव बरामद हुए हैं उनकी पहचान जान्हवी सुरती, सोनल सुरती और संस्कृति सुरती के रूप में हुई है. तीनों की उम्र तकरीबन 17 साल बताई गई है.

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'सिंगल बोट को बना दिया था डबल डेकर'
पेशे से फोटोग्राफ़र सनत शनिवार को नाव में घूमने का मन बनाकर ही घर से निकले थे. उनके साथ उनका परिवार भी था.
उन्होंने बीबीसी संवाददाता नवीन नेगी को फोन पर बताया, ''आज मेरी छुट्टी रहती है. मैं सुबह करीब 11 बजे नाव में घूमने के लिए अपने परिवार के साथ घर से निकला.''
सनत का घर समुद्र तट के नज़दीक ही है.
वे बताते हैं, ''मैंने देखा कि कुछ स्कूली छात्र घूमने के लिए आए थे. वे लगभग 35 की संख्या में रहे होंगे जिसमें लड़के और लड़कियां सभी थे. तीन नाव चलाने वाले और एक स्थानीय फोटोग्राफ़र भी नाव में सवार थे.''
नाव के आकार के बारे में सनत बताया कि ये बहुत ही छोटी सी नाव थी और उसे डबल डेकर की तरह बना दिया गया था.
उन्होंने आगे बताया, '' उस सिंगल बोट की क्षमता लगभग 8 से 10 लोगों को बिठाने की थी जबकि उसमें 35 से 40 लोग सवार थे. ये अपने-आप में हैरानी भरा था.''
'देखते-देखते डूबी नाव'
सनत बताते हैं, ''सुबह 11.30 बजे बोट की राइड शुरू हुई, अभी वह मुश्किल से पांच मिनट ही आगे गई होगी, बोट में बैठे छात्र सेल्फी क्लिक कर रहे थे. मैंने भी उनकी कुछ तस्वीरें खींची थीं.''
''बच्चों के साथ मौजूद फोटोग्राफ़र उनकी तस्वीरें खींचने की कोशिश कर रहा था लेकिन नाव में ज़्यादा जगह नहीं थी, तभी अचानक नाव का भार एकतरफ़ा होने लगा और वो हिचकोले खाने लगी, सैकेंडों के भीतर ही पूरी बोट पलट गई.''
सनत बताते हैं, ''नाव पूरी तरह से उलट चुकी थी, उसमें सवार सभी लोग नाव के नीचे दब गए. आस-पास मौज़ूद लोगों को उस दुर्घटना को पूरी तरह समझने में ही लगभग 10 मिनट लग गए.''

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'बचावकार्य में भी लग गया वक्त'
सनत बताते हैं कि सबसे पहले तट पर मौजूद मछुआरे मदद के लिए दौड़े. वे अपनी छोटी नाव लेकर वहां पहुंचे जिससे लोगों को बचाया जा सके.
''मैंने भी अपनी तरफ़ से तुरंत पुलिस और प्रशासन को फोन किया. साथ ही मैंने सोशल मीडिया का सहारा भी लिया और तस्वीरें खींचकर फ़ेसबुक पर अपलोड करना शुरू कर दिया.''
प्रशासन की तरफ़ से मदद पहुंचने लगभग घंटे भर का समय लग गया. सनत बताते हैं, ''कुछ वक्त बाद कोस्ट गार्ड के लोग यहां पहुंचे लेकिन उनके पास स्पीड बोट नहीं थी जिस वजह से वे जल्दी-जल्दी रेसक्यू नहीं कर पा रहे थे.''
'हाल ही शुरू हुई थी यह बोट सर्विस'
दुर्घटना के शिकार सभी छात्र एक ही स्कूल से हैं. स्कूल का नाम बाबूभाई पोंडा जूनियर कॉलेज है. हालांकि ये स्कूल का टूर नहीं था और सभी स्कूल ख़त्म होने के बाद अपनी मर्जी से तट पर घूमने आए थे.
सनत बताते हैं कि कुछ दिन पहले ही डहाणु में यह बोट सर्विस शुरू हुई थी.
सनत आगे बताते हैं, ''डहाणु में इस तरह की फ़ेरी सर्विस नहीं थी और यह अचानक ही पिछले तीन दिन से शुरू हुई थी. इस सेवा को किसने शुरू किया यह भी कोई नहीं जानता.''
सनत यह भी कहते हैं कि डहाणु में शुरू होने वाली इस फ़ेरी सर्विस के बारे में वहां के प्रशासन को भी अभी तक जानकारी नहीं है लेकिन आस पास के लोगों के बीच यह आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं. वे खुद भी शनिवार को उस फ़ेरी में बैठने जाने वाले थे लेकिन भीड़ को देखकर वे पीछे हट गए और अगली बार जाने का निश्चय किया, तभी यह दुर्घटना उनके सामने हो गई.












