मोदी समर्थक व्यापारी ने क्यों की आत्महत्या

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- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
"मेरे बच्चों की छह महीने से फ़ीस नहीं गई है. सारा कारोबार ख़त्म हो गया. अब तो वो भी चले गए, आगे हम कैसे जिएंगे. क्या होगा हमारा आप ही बताओ अब?"
बीते शनिवार को देहरादून में बीजेपी के कार्यालय में जन सुनवाई के दौरान प्रकाश पांडे पहुंचे और कहा कि उन्होंने ज़हर खा लिया है. बाद में मंगलवार को अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ दिया.
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट के मुताबिक सरकार ने मौत की मजिस्ट्रेट से जांच का ऐलान किया है और परिवार की मदद के लिए विकल्प तलाशे जा रहे हैं.
प्रकाश पांडे के परिवार में उनके बाद उनकी पत्नी, एक लड़का और एक लड़की हैं. प्रकाश की पत्नी कमला पांडे का रो रोकर बुरा हाल है. बीबीसी से फ़ोन पर बात करते हुए वो कहती हैं, "कारोबार पर ताला लग गया, वो चले गए, हम तो बर्बाद ही हो गए. काश कोई उनकी परेशानी सुनता."

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वायरल हुआ वीडियो
कमला कहती हैं, "अच्छा काम करने वालों के लिए ये जगह नहीं है. बुरा काम करो और अपने बच्चों के साथ सुख से रहो, मैं तो यही कहूंगी."
पति की मौत से ग़मज़दा कमला को अफ़सोस है कि उनके पति ने कभी ये अहसास नहीं होने दिया कि इस तरह एक दिन वो उन्हें छोड़ कर चले जाएंगे.
तमाम आर्थिक दिक्कतों के बाद वो घर में सबसे हंसकर बात करते, किसी को अहसास नहीं होने देते कि कारोबार में मंदी और बढ़ते क़र्ज़ की वजह से वो बुरी तरह टूट गए हैं.
अपने एक वीडियो में प्रकाश पांडे नोटबंदी और जीएसटी को अपने कारोबार में मंदी की वजह बताया है. ये वीडियो सोशल मीडिया पर काफ़ी शेयर किया जा रहा है

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नोटबंदी और जीएसटी
बीते शनिवार को प्रकाश पांडे देहरादून के बीजेपी कार्यालय में कृषि मंत्री सुबोध उनियाल की जनसुनवाई में पहुंच गए थे.
उन्होंने मंत्री को भी नोटबंदी और जीएसटी से परेशान होकर ज़हर खाने की बात बताई थी जहां से उन्हें अस्पताल ले जाया गया था.
हलद्वानी के रहने वाले प्रकाश पांडे ने करीब आठ-नौ साल पहले ट्रांस्पोर्ट का कारोबार शुरू किया था.
धीरे-धीरे कारोबार बढ़ता गया और उनके पास एक से चार गाड़ियां हो गईं. ज़्यादातर ट्रांसपोर्ट कारोबारी कर्ज़े पर गाड़ियां ख़रीदते हैं, प्रकाश पांडे ने भी ऐसा ही किया था.
कमला बताती हैं कि डेढ़ साल पहले तक सब ठीक चल रहा था. समय पर किश्ते जा रहीं थी, कोई तनाव नहीं था.
मोदी के भक्त थे प्रकाश पांडे
फिर नोटबंदी हुई और काम कम हो गया. अपने पति की तरह ही कमला भी कारोबार में आई गिरावट की वजह नोटबंदी और जीएसटी को ही मानती हैं.
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर 2016 की शाम आठ बजे अचानक किए एक ऐलान में पांच सौ और हज़ार रुपये के नोटों को बंद कर दिया था.
वहीं केंद्र सरकार ने पूरे देश में एक कर व्यवस्था लागू करने के लिए एक अप्रैल 2017 को जीएसटी (सेवा एवं वस्तुकर) लागू किया था.
प्रकाश पांडे फ़ेसबुक पर भी काफ़ी सक्रिय थे. उनकी पोस्टों से पता चलता है कि वो प्रधानमंत्री मोदी की राजनीति को पसंद करते थे.
जेटली को चिट्ठी
नरेंद्र मोदी ने जब नोटबंदी का ऐलान किया था तब प्रकाश पांडे ने फ़ेसबुक पर लिखा था कि कारोबार में होने वाली दिक्कतों के बावजूद वो प्रधानमंत्री के साथ हैं.
12 दिसंबर 2016 को किए एक फ़ेसबुक पोस्ट में प्रकाश पांडे ने कहा था, "आदरणीय मोदी जी, नोटबंदी में हम आपके साथ हैं."
प्रकाश पांडे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीति और उनके फ़ैसलों में भरोसा था. उन्होंने फ़ेसबुक पर ऐसे कई पोस्ट किए हैं जिनमें उन्होंने प्रधानमंत्री की सराहना की है.
लेकिन नोटबंदी के कारण कारोबार पर पड़ रहे असर से परेशान होकर उन्होंने वित्तमंत्री अरुण जेटली को पत्र भी लिखा था.
मोदी का विरोध
प्रकाश पांडे ने शुरुआत में नोटबंदी का समर्थन किया था. उन्हें उम्मीद थी कि समय के साथ उनका कारोबार फिर पटरी पर लौट आएगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
मई में किए गए इस पोस्ट में उन्होंने पहली बार नरेंद्र मोदी का विरोध किया.
अपनी परेशानियों के संबंध में प्रकाश पांडे ने प्रधानमंत्री कार्यालय में भी शिकायत भेजी थी. जिसका कार्यालय में संज्ञान भी लिया गया था.
प्रकाश को उम्मीद थी कि सरकार उनकी मदद में आगे आएगी.
प्रकाश पांडे बार-बार सरकार से क़दम उठाने की मांग कर रहे थे. उन्होंने फ़ेसबुक पर कुछ इस तरह के पोस्ट किए.
प्रकाश पांडे का वीडियो
कमला पांडे कहती हैं कि उनके पति ने हर तरीके से सरकार के पास अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की.
प्रकाश पांडे ने ज़हर खाने के बाद भी एक वीडियो पोस्ट किया था इसमें उन्होंने बताया था कि वे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के ओएसडी के साथ बीते कई महीनों से संपर्क में थे और उन्हें अपने कारोबार की दिक्कतों के बारे में बता रहे थे.
प्रकाश पांडे ने इस वीडियो में कहा है, "मैं सरकार से सरकारी विभागों में फंसा हुआ अपना पैसा ही मांग रहा था. बीजेपी की सरकार ने बेड़ा गर्क कर दिया है. कारोबारियों को आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर दिया है. मैंने ज़हर खा लिया है, अब मैं नहीं बचूंगा लेकिन मैं नहीं चाहता कि किसी और व्यापारी के साथ ऐसा हो."
जांच का विषय है ट्रांसपोर्टर की मौत
वहीं उत्तराखंड सरकार का कहना है कि ट्रांसपोर्टर प्रकाश पांडे की मौत जांच का विषय है.
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट ने बीबीसी से कहा, "उत्तराखंड सरकार और मुख्यमंत्री इस पूरे घटनाक्रम से बहुत आहत हैं. सरकार परिवार को लेकर चिंतित है और विचार कर रही है कि किस तरीके से परिवार की मदद की जा सकती है. ये पूरा मामला अब जांच का विषय है."
रमेश कहते हैं, "मृतक का पहला वीडियो आया था जिसमें वो ज़हर खाने की बात कर रहे हैं. उसके बाद उन्हें बीजेपी मुख्यालय कौन लेकर आया ये जांच का विषय है. ये सवाल भी उठ रहा है कि कहीं वो किसी राजनीतिक साज़िश का हिस्सा न बन गए हैं."

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सरकार के लिए सोचने का समय
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना है कि जीएसटी और नोटबंदी से आहत व्यापारी की आत्महत्या सरकार के लिए एक चेतावनी है.
उन्होंने बीबीसी से कहा, "ये एक तरह से हमारे लिए बड़ी भारी चेतावनी भी है. प्रकाश ने अपने बयान में नोटबंदी से व्यापार में गिरावट आने और जीएसटी से त्रस्त होकर आत्महत्या करने की बात कही है. उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय और हर जगह गुहार लगाई और जब कहीं उनकी बात नहीं सुनी गई तो उन्होंने अपनी जान दे दी. निम्न और मध्यमवर्ग जीएसटी और नोटबंदी से त्रस्त हो गया है. नोटबंदी और जीएसटी के बाद के हालात के गंभीर अध्ययन की ज़रूरत है ताकि कोई और इस तरह का कदम उठाने को मजबूर न हो."
हरीश रावत ने ये भी कहा कि प्रकाश पांडे की आत्महत्या को कायराना क़दम बताने के बजाए उनकी छटपटाहट को समझना चाहिए.
वहीं उत्तराखंड भाजपा के उपाध्यक्ष केदार जोशी कहते हैं, "इस घटनाक्रम ने पार्टी को झकझोर दिया है. हालात भले ही कितने भी मुश्किल थे, प्रकाश पांडे को ये क़दम नहीं उठाना चाहिए था."












