सरकार का अनुमान, 2017-18 में घटेगी जीडीपी ग्रोथ

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अर्थव्यस्था में सुस्ती को लेकर विपक्ष का निशाना बन रही नरेंद्र मोदी सरकार को एक और झटका लगा है.
आगामी वित्त विर्ष में देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) दर में कमी का अनुमान लगाया गया है.
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने साल 2017-18 में देश की अर्थव्यवस्था की रफ़्तार धीमी रहने की संभावना जताई है.
मंत्रालय द्वारा जारी की गई रिपोर्ट 'राष्ट्रीय आय 2017-18 का पहला अग्रिम अनुमान' में ये आकंड़े दिए गए हैं.

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जीडीपी की दर कम रहने का अनुमान
इस रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों में आगामी वित्त वर्ष 2017-18 में जीडीपी की दर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है जबकि 2016-17 में यह दर 7.1 प्रतिशत थी.
इससे पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली भी संसद में मान चुके हैं कि वित्त वर्ष 2016-17 में विकास दर धीमी पड़ी है.
हाल ही में साल की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में जीडीपी आंकड़ों ने एक बार फिर से रफ़्तार पकड़ी थी. देश की जीडीपी में पिछली पांच तिमाहियों से चली आ रहा गिरावट का सिलसिला टूटा था.
केंद्रीय सांख्यिकी संगठन ने दूसरी तिमाही में विकास दर 6.3 फ़ीसदी बताई थी. वहीं, जून में खत्म हुई तिमाही में जीडीपी की दर 5.7 फ़ीसदी दर्ज की गई थी.

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दूसरी तिमाही में विकास दर के आंकड़ों में वृद्धि के बाद सरकार ने भी अर्थव्यवस्था के आगे मजबूत होने की उम्मीद जताई थी लेकिन ताज़ा आंकड़े विकास दर में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं दिखा रहे हैं.
विपक्षी दल लगातार अर्थव्यवस्था में सुस्ती के लिए भारत सरकार की आर्थिक नीतियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं जिनमें नोटबंदी और जीएसटी प्रमुख हैं. मगर सरकार जल्द ही अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने की बात कह रही है.
वहीं, इन आंकड़ों की जानकारी देते हुए बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने भी ट्वीट किया.
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अपने ट्वीट में स्वामी ने लिखा, ''भारत को ग़रीबी खत्म करने के लिए अगले 10 सालों में कम से कम 10 प्रतिशत विकास दर की जरूरत है.''












